NEXA को कभी किसी खास निर्देश या 'ब्रीफ़' के आधार पर नहीं बनाया गया था। एक दशक से भी पहले, किसी ने भी मारुति सुज़ुकी से कार के अलावा किसी और तरह के रिटेल अनुभव की मांग नहीं की थी; बाज़ार ने भी इसकी ज़रूरत नहीं जताई थी। फिर भी, NEXA ने इसे पहले ही भांप लिया और एक ऐसी जगह बनाई जहाँ कार ही सब कुछ नहीं थी, बल्कि यह भारत में कार खरीदने और उसके साथ जीने के तरीके का एक हिस्सा बन गई। बिना कहे ही आगे बढ़ने की यह सोच हमेशा बनी रही, भले ही ग्राहक बदल गए हैं—अब उनकी पहचान आय या उम्र से नहीं, बल्कि उनकी सोच से होती है। NEXA इस बदलते हुए ग्राहक वर्ग को 'कॉस्मोपॉलिटन्स' (Cosmopolitans) कहता है, और इन्हीं को ध्यान में रखते हुए NEXA के सबसे खास मॉडल, 'बलेनो' (Baleno) को नए सिरे से तैयार किया गया है।
NEXA के पोर्टफोलियो में बलेनो लंबे समय से सिर्फ़ एक कार से कहीं ज़्यादा रही है। यह एक रिश्ता है, लाखों भारतीय खरीदारों के लिए सपनों को पूरा करने की शुरुआत है, और एक ऐसा बेंचमार्क है जिससे इस सेगमेंट के दूसरे मॉडल अपनी तुलना करते हैं। लेकिन NEXA के लिए लीडरशिप का मतलब कभी भी एक जगह रुककर अपनी पुरानी पहचान को बचाए रखना नहीं रहा है; इसका मतलब हमेशा माहौल और लोगों की ज़रूरतों को समझना रहा है। लोगों की ज़रूरतों को समझने पर पता चला कि आज का ग्राहक ऐसा है जिसे अपने आत्मविश्वास को शब्दों में बताने की ज़रूरत नहीं है; उसका आत्मविश्वास उसके पहनावे, स्टाइल और रोज़मर्रा के जीवन में झलकता है।
सिर्फ़ एक बात – कि स्टाइल असलियत (सब्सटेंस) के उलट नहीं है, बल्कि असलियत का ही एक रूप है जब वह बिना किसी रोक-टोक के सामने आती है – इसी सोच पर शानदार नई बलेनो को बनाया गया है। इसकी पोज़िशनिंग के पीछे यही सोच है – 'डेयर टू गो ग्लैम' (ग्लैमरस बनने की हिम्मत करें) – जो हर छोटी-बड़ी बात को खास बनाने, हर सफ़र को एक एहसास में बदलने और हर आगमन को यादगार बनाने का न्योता देती है। यह सोच बाहर से साफ़ नज़र आती है। शानदार नई बलेनो, NEXA के 'क्रफ़्टेड फ़्यूचरिज़्म' को असल रूप देती है।
इसमें सिग्नेचर NEXWave ग्रिल को ज़्यादा बोल्ड और थ्री-डायमेंशनल लुक दिया गया है – यह अब पहले से ज़्यादा चौड़ी है और इस पर हॉरिज़ॉन्टल क्रोम गार्निश लगी है। तराशा हुआ बंपर और क्रोम फेंडर गार्निश कार के चारों ओर वही कॉन्फिडेंस दिखाते हैं, जबकि आगे की तरफ़ सिग्नेचर LED प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स के साथ NEXTre' LED DRLs और पीछे की तरफ़ NEXTre' LED टेल लैम्प्स इसे हर एंगल से एक अलग पहचान देते हैं। एक स्लीक शार्क फ़िन एंटीना इसके लुक को पूरा करता है और साथ ही हवा के दबाव और शोर को भी कम करता है – यह इस बात का सबूत है कि डिज़ाइन से जुड़े छोटे-छोटे फ़ैसले भी सोच-समझकर लिए गए थे।
कॉन्फिडेंस सिर्फ़ दिखने तक ही सीमित नहीं है। शानदार नई बलेनो में लेवल 2 ADAS दिया गया है, जो सामने की सड़क को पढ़ने के लिए मोनोकुलर कैमरा और मिलीमीटर-वेव रडार का इस्तेमाल करता है। इससे एडेप्टिव क्रूज़ कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट, लेन डिपार्चर प्रिवेंशन और वॉर्निंग, एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग और ऑटो हाई बीम जैसे फ़ीचर मिलते हैं। ये सभी चुपचाप काम करते हैं ताकि ड्राइवर का ध्यान सड़क पर बना रहे। यही स्मार्टनेस गाड़ी के अंदर भी SmartPlay Pro+, हेड-अप डिस्प्ले, 360 व्यू कैमरा, वायरलेस चार्जिंग और क्लैरियन-ट्यून्ड ऑडियो सिस्टम के साथ जारी रहती है। इन्हें गाड़ी में बहुत सोच-समझकर शामिल किया गया है, न कि बस ऊपर से थोपा गया है, ताकि हर ड्राइव बेहतर और स्मार्ट लगे, और कभी भी मुश्किल न हो।
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आज के समय में कार खरीदते वक्त लोग केवल इंजन, माइलेज या डिजाइन ही नहीं देखते, बल्कि आधुनिक सेफ्टी फीचर्स पर भी खास ध्यान देते हैं। इन्हीं में सबसे चर्चित तकनीक ADAS (Advanced Driver Assistance System) है। यह सिस्टम ड्राइविंग को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, जितनी तेजी से यह तकनीक लोकप्रिय हो रही है, उतना ही जरूरी है कि इसके काम करने के तरीके और सीमाओं को भी समझा जाए। खासतौर पर भारतीय सड़कों और ट्रैफिक की वास्तविक परिस्थितियों में ADAS हर समय समान प्रदर्शन नहीं कर पाता।
ADAS कैसे करता है काम?
ADAS कई आधुनिक तकनीकों का संयोजन है। इसमें कैमरे, रडार, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कुछ मॉडलों में LiDAR जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। ये सिस्टम सड़क की लेन, आगे चल रहे वाहनों, पैदल यात्रियों और अन्य संभावित बाधाओं की लगातार निगरानी करते हैं। किसी खतरे की स्थिति बनने पर यह ड्राइवर को चेतावनी देता है और जरूरत पड़ने पर ब्रेकिंग या स्टीयरिंग में भी सहायता करता है।
धुंधली लेन मार्किंग बन सकती है चुनौती
भारत की कई सड़कों पर लेन मार्किंग या तो मिट चुकी होती है या फिर साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में लेन कीप असिस्ट और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसे फीचर सही तरीके से काम नहीं कर पाते। यदि सिस्टम लेन को पहचानने में असफल हो जाए, तो वह अचानक निष्क्रिय हो सकता है। ऐसी स्थिति में वाहन का पूरा नियंत्रण तुरंत ड्राइवर को संभालना पड़ता है।
अनियमित ट्रैफिक पैटर्न से बढ़ती है मुश्किल
भारतीय ट्रैफिक दुनिया के सबसे जटिल ट्रैफिक सिस्टम में से एक माना जाता है। सड़क पर अचानक बाइक, ऑटो, साइकिल, पैदल यात्री या जानवर आ जाना आम बात है। कई बार ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) ऐसे हालात में जरूरत से पहले ब्रेक लगा देता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाधा को सही समय पर पहचानने में भी दिक्कत हो सकती है। इससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
खराब मौसम में घट सकती है सिस्टम की क्षमता
तेज बारिश, घना कोहरा, धूल या कीचड़ कैमरा और रडार की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। यदि सेंसर सही तरीके से आसपास का वातावरण नहीं देख पाएंगे, तो ADAS फीचर्स अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं या उनकी सटीकता कम हो सकती है। इसलिए खराब मौसम में केवल इस तकनीक पर निर्भर रहना सुरक्षित नहीं माना जाता।
सेंसर की सफाई और रखरखाव भी है जरूरी
कई लोग यह भूल जाते हैं कि ADAS का प्रदर्शन सेंसर और कैमरों की साफ-सफाई पर भी निर्भर करता है। यदि इन पर धूल, कीचड़ या पानी की परत जम जाए तो सिस्टम गलत अलर्ट दे सकता है या काम करना बंद कर सकता है। नियमित सर्विसिंग और सेंसर की जांच इस तकनीक की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ADAS का सही इस्तेमाल कैसे करें?
ADAS को कभी भी ऑटो-पायलट या पूरी तरह स्वचालित ड्राइविंग सिस्टम न समझें। यह केवल ड्राइवर की सहायता करने वाली तकनीक है। ड्राइविंग के दौरान हमेशा दोनों हाथ स्टीयरिंग पर रखें, सड़क पर पूरा ध्यान दें और वाहन की गति परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित रखें। खराब मौसम, भीड़भाड़ वाले इलाके और ग्रामीण सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतना सबसे बेहतर विकल्प है।
ADAS आधुनिक कारों की सुरक्षा को नई ऊंचाई देता है और दुर्घटनाओं की संभावना कम करने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन भारतीय सड़कों की वास्तविक परिस्थितियों में इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएं भी हैं। इसलिए इस तकनीक को ड्राइवर का विकल्प नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सहायक के रूप में इस्तेमाल करना ही समझदारी है। सुरक्षित ड्राइविंग का सबसे बड़ा आधार आज भी सतर्क और जिम्मेदार चालक ही है।
- डॉ. अनिमेष शर्मा
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