एपेक का 32वां व्यापार मंत्रियों का सम्मेलन मई 2026 में सूचो में आयोजित होगा
बीजिंग, 16 जनवरी (आईएएनएस)। चीनी वाणिज्य मंत्रालय की प्रवक्ता ह योंगछ्येन ने 15 जनवरी को आयोजित नियमित प्रेस वार्ता में बताया कि एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग संगठन (एपेक) का 32वां व्यापार मंत्रियों का सम्मेलन इस मई में पूर्वी चीन के च्यांग सु प्रांत के सूचो शहर में आयोजित होगा।
यह सम्मेलन मुख्य तौर पर एशिया प्रशांत और विश्व के महत्वपूर्ण आर्थिक व व्यापारिक मुद्दों पर विचार करेगा और इस नवंबर में होने वाले एपेक के नेताओं के अनौपचारिक सम्मेलन के लिए आर्थिक व व्यापारिक क्षेत्रों की तैयारी करेगा।
ध्यान रहे वर्ष 2026 में चीन तीसरी बार एपेक की मेजबानी करेगा और सिलसिलेवार बैठकें करेगा।
प्रवक्ता ने परिचय देते हुए कहा कि व्यापार मंत्रियों का सम्मेलन एपेक के चीन वर्ष और एशिया प्रशांत के समान समुदाय का निर्माण कर समान समृद्धि बढ़ाने के मुख्य विषय से केंद्रित रहकर खुलेपन, सृजन व सहयोग पर फोकस रखकर क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और एशिया प्रशांत मुक्त व्यापार क्षेत्र का निर्माण बढ़ाएगा, बहुपक्षीय व्यापार तंत्र का समर्थन करेगा, डिजिटल सहयोग मजबूत करेगा और हरित अर्थव्यवस्था का विकास करेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान की स्थिति पर नजर, अपने लोगों के लिए जरूरी कदम उठाएंगे: भारत
नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत, ईरान में तेजी से बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और देश में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें छात्र, व्यवसायिक लोग, पेशेवर, तीर्थयात्री और नाविक शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्थिति को देखते हुए, हमने कुछ सलाहें जारी की हैं। सभी भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा न करने का अनुरोध किया गया है और जो भारतीय पहले से ईरान में हैं, उन्हें उपलब्ध साधनों से, जिनमें वाणिज्यिक उड़ानें शामिल हैं, देश छोड़ने की सलाह दी गई है। हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और अपने नागरिकों की भलाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।”
ईरान में विरोध प्रदर्शन प्रारंभ में गंभीर आर्थिक परिस्थितियों, जैसे कि रिकॉर्ड स्तर की मुद्रास्फीति और मुद्रा पतन, के कारण शुरू हुए और अब पूरे देश में फैल गए हैं। प्रदर्शनकारी राजनीतिक और शासन संबंधी बड़े बदलावों की मांग कर रहे हैं।
5 जनवरी को भारत ने अपने नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी और ईरान में रहने वाले भारतीयों से कहा गया था कि यदि उन्होंने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, तो भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराएं।
चाबहार पोर्ट परियोजना से भारत के बाहर होने की खबरों के सवाल पर जयसवाल ने कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी खजाना विभाग ने एक पत्र जारी किया था जिसमें चाबहार पोर्ट के लिए शर्तीय प्रतिबंध छूट की गाइडलाइन दी गई थी, जो 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। हम इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ संपर्क में हैं।”
पिछले साल, अमेरिका ने भारत को चाबहार पोर्ट पर संचालन जारी रखने के लिए छह महीने की प्रतिबंध छूट दी थी, जो 29 अक्टूबर से प्रभावी थी।
2024 में भारत और ईरान ने शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास के लिए 10 साल का समझौता किया था। हालांकि, अमेरिकी विदेश सचिव ने 2018 में ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट के तहत दी गई प्रतिबंध छूट को 29 सितंबर से रद्द कर दिया, जिससे चाबहार पोर्ट या अन्य संबंधित गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हो सकते थे।
इसके बावजूद भारत अप्रैल तक बिना किसी दंडात्मक कार्रवाई के टर्मिनल का विकास और संचालन जारी रख रहा है। यह बंदरगाह भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सुनिश्चित करता है और पाकिस्तान को पार किए बिना व्यापार और कनेक्टिविटी की सुविधा देता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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