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भारत के स्टार्टअप्स की दुनिया में धमक, हर सेक्टर में दिखा 'मेक इन इंडिया' का जलवा

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। भारत स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम के दस साल पूरे कर रहा है। इस खास अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। आइए जानते हैं कि भारत की वो कौन-कौन सी स्टार्टअप्स कंपनियां हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। खास बात यह है कि यूनिकॉर्न से लेकर एआई और पेट फूड तक कई स्टार्टअप्स कंपनियों ने अपनी पहचान बनाई है।

सबसे पहले बात करते हैं, भारत के प्रमुख सॉफ्टवेयर स्टार्टअप जोहो की। जोहो भारत का सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (एसएएएस) स्टार्टअप है, जो व्यवसायों के लिए क्लाउड आधारित एप्लीकेशन, सीआरएम, ईमेल, अकाउंटिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ऑफिस सूट जैसे अन्य टूल सर्विस देता है। इसके संस्थापक श्रीधर वेम्बू हैं। यह नैसडैक पर लिस्ट होने वाली पहली बड़ी भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी है।

इसके अलावा ब्राउजर स्टैक नाम की सॉफ्टवेयर कंपनी भी है, जो डेवलपर्स और क्वालिटी एश्योरेंस टीमों को दुनिया भर के वास्तविक उपकरणों और ब्राउजरों पर अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप्स का परीक्षण करने में मदद करती है। इसके यूजर्स लगभग 135 से ज्यादा देशों में हैं।

एआई और डीप टेक और डेटा साइंस के मामले में फ्रैक्टल एनालिटिक्स भी तहलका मचा रहा है। यह अमेरिका, ब्रिटेन और एपीएसी (पश्चिमी प्रशांत महासागर के आसपास का प्रमुख आर्थिक और भू-राजनीतिक क्षेत्र) में ऑपरेट करता है।

एआई की दुनिया में मैड स्ट्रीट भी भारतीय स्टार्टअप की रेस में आगे है। रिटेल और फैशन इंडस्ट्री में इसका काफी इस्तेमाल होता है। भारत के साथ अमेरिका और यूरोप के बाजार में सिगट्यूपल मेडिकल एआई के क्षेत्र में काम कर रहा है। यह मेडिकल क्षेत्र में स्मार्ट डायग्नोस्टिक समाधानों का एक्सपर्ट है।

फिनटेक में पेटीएम, रेजरपे और पाइन लैब्स भी सफल भारतीय स्टार्टअप हैं। डिजिटल पेमेंट के मामले में पेटीएम पार्टनरशिप मॉडल के आधार पर कनाडा, जापान और यूएई में है। इसके अलावा, रेजरपे की भारत, मलेशिया और सिंगापुर में और पाइन लैब्स की एशिया और मिडिल ईस्ट में मजबूत पकड़ है।

ई-कॉमर्स और कंज्यूमर में फ्लिपकार्ट सबसे सफल भारतीय स्टार्टअप है, जो अब अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट के स्वामित्व में है। फ्लिपकार्ट की स्थापना भारत में 2007 में शुरू हुई थी, जिसे 2018 में वॉलमार्ट ने अधिग्रहण कर लिया।

भारत की सबसे तेज ग्लोबल स्केलिंग स्टार्टअप्स में ओयो का नाम सबसे आगे है, जिसकी मौजूदगी लगभग 35 से ज्यादा देशों में है। इसके अलावा सोशल कॉमर्स मीशो भी एक भारतीय स्टार्टअप है, जिसकी भारत समेत दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट में मौजूदगी है।

हेल्थटेक और बायोटेक क्षेत्र में फार्मइजी एक भारतीय स्टार्टअप है, जो ग्लोबली दवाइयों की सोर्सिंग करता है। इन्नोवाकर एक हेल्थकेयर डेटा कंपनी है, जिसका मुख्य बाजार अमेरिका है।

स्पेस और एडवांस टेक में स्काईरूट एयरोस्पेस अग्निकुल एक भारतीय स्टार्टअप है। वहीं मोबिलिटी के सेक्टर में ओला काफी तरक्की कर रहा है। इसकी मौजूदगी ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, और न्यूजीलैंड में है।

फूड डिलिवरी ऐप जोमेटो भी 20 से ज्यादा देशों में अपनी सेवाएं दे चुका है। इनमोबी विज्ञापन तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाला भारत का पहला यूनिकॉर्न है, जिसकी वैश्विक स्तर पर पहचान है।

एपीआई प्लेटफॉर्म के तौर पर भारतीय स्टार्टअप पोस्टमैन ने अपनी पहचान बनाई है। फोन पे भी एक भारतीय कंपनी है। यह भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा बनाए गए यूपीआई भुगतान सिस्टम पर काम करता है। दुनिया के कई देशों में यूपीआई काम कर रहा है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आईएसआई की नई साजिश, पंजाब को मोहरा बनाकर खालिस्तान आंदोलन भड़काने की योजना

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। खुफिया एजेंसियों से मिले ताजा इनपुट के मुताबिक पाकिस्तान स्थित अराजक तत्व पंजाब में ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद की बाढ़ लाने की साजिश रच रहे हैं। हाल ही में लाहौर में हुई एक बैठक में तय किया गया कि इस पूरे ऑपरेशन की अगुवाई प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) करेगा। इस योजना के तहत पंजाब में ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद की बड़े पैमाने पर सप्लाई की जाएगी।

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, इससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को फिर से सक्रिय करने में मदद मिलेगी, जबकि शेष खेप को जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाया जाएगा।

इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि कनाडा और अन्य देशों में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों की ओर से आईएसआई पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि पंजाब में उनके मंसूबे सफल नहीं हो पा रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब पुलिस ने अब तक इन तत्वों को राज्य में पैर जमाने से प्रभावी ढंग से रोका है।

एक अधिकारी ने बताया कि पंजाब का युवा वर्ग अलग खालिस्तान राष्ट्र के विचार को साफ तौर पर नकार रहा है। युवाओं के कट्टरपंथीकरण की कई कोशिशें नाकाम रही हैं, जिसका बड़ा कारण राज्य के बुजुर्गों की भूमिका है, जिन्होंने इस आंदोलन के दुष्परिणामों के बारे में खुलकर बात की है।

बीकेआई का मानना है कि जब विचारधारा काम नहीं कर रही है, तो पैसे के जरिए पंजाब के युवाओं की भर्ती की जानी चाहिए। इसी कड़ी में लाहौर के गुलबर्ग इलाके में हुई बैठक में पंजाब में एक नई और आक्रामक रणनीति अपनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों के अनुसार, पंजाब में ड्रग्स की समस्या पहले से ही गंभीर है। बैठक में यह तय किया गया कि युवाओं को ड्रग्स और पैसों के लालच के जरिए खालिस्तान आंदोलन की ओर आकर्षित किया जाएगा, क्योंकि विचारधारा के आधार पर समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

खुफिया एजेंसियों को यह भी पता चला है कि बीकेआई ने आईएसआई द्वारा उपलब्ध कराए गए गोदामों में भारी मात्रा में ड्रग्स, हथियार और गोला-बारूद जमा कर रखा है। बीकेआई के ये ठिकाने लाहौर, इस्लामाबाद और फैजाबाद में स्थापित हैं।

पिछले कुछ महीनों में इन गोदामों में बड़ी खेप पहुंची है और इन्हें भारत भेजने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं।

हाल के दिनों में यह भी देखा गया है कि पंजाब में खालिस्तानी तत्वों को जमीनी स्तर पर समर्थन नहीं मिल रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी गतिविधियां अपेक्षाकृत सफल रही हैं। ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) जैसे आतंकी संगठन कथित जनमत संग्रह आयोजित करने के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए भारत के खिलाफ नफरत फैलाने में सक्रिय हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय इन तत्वों ने अब आईएसआई से सवाल करना शुरू कर दिया है कि भारत में उनके अभियानों को क्यों नहीं बढ़ाया जा पा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इन तत्वों को भारत में गतिविधियां तेज करने के लिए पाकिस्तान के समर्थन की जरूरत है।

--आईएएनएस

डीएससी

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