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बैतूल के चिचोली में NSUI का प्रदर्शन, स्मार्ट मीटर समेत कई मुद्दों को लेकर उठाई आवाज, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

बैतूल: मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का विरोध लगातार सामने आ रहा है। प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की व्यवस्था और बिजली बिलों को लेकर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। ताजा मामला बैतूल जिल से सामने आया है। जहां सोमवार को चिचोली में NSUI कार्यकर्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

बता दें कि NSUI ब्लॉक अध्यक्ष अमन खान के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने चिचोली में पांच सूत्रीय मांगों को लेकर कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया एवं क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान युवाओं में बढ़ते नशे, शिक्षा, स्वास्थ्य, अपराध और खेल सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

NSUI ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

बता दें कि प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला मुद्दा स्मार्ट मीटर का था। NSUI ने आरोप लगाया कि चिचोली नगर में विद्युत विभाग उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगा रहा है। उन्होंंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाये। चेतावनी देते हुए आगे कहा कि अगर मांग पूरी नहीं होने पर संगठन आंदोलन को और तेज करेगा।

NSUI की प्रमुख मांगें-

  • क्षेत्र में फेल रहे युवाओं के बीच नशा पर रोक
  • प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के जर्जर भवनों की मरम्मत
  • कन्या विद्यालय चिचोली में व्यवस्थित शौचालय एवं बाउंड्रीवाल निर्माण
  • क्षेत्र में बढ़ते अपराध की रोकथाम , स्मार्ट मीटर न लगाने की मांग
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला रोग विशेषज्ञ व शिशु रोग विशेषज्ञ की पुनः नियुक्ति

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Explainer: सेलेब्स को इतना ट्रोल क्यों करते हैं लोग? स्टार को बुरा-भला कहने के पीछे क्या होता है ट्रोलर्स का मकसद

Why Do People Troll Celebrities: जब से सोशल मीडिया का दौर आया है, इन प्लेटफॉर्म ने सेलेब्रिटीज और आम लोगों के बीच की दूरी को काफी कम कर दिया है. आज जब किसी स्टार की नई फिल्म अनाउंस होती है या उनका लुक हो, वजन बढ़ना या घटना हो, कोई बयान हो या पर्सनल लाइफ से जुड़ी खबर, ये सब मुद्दों मिनटों में चर्चा में आ जाते है. इसी के साथ कई लोग सोशल मीडिया पर इन पर अपनी अपनी राय रखते हैं, कुछ लोग सवाल पूछते हैं और वहीं, लोग सीधा ट्रोलिंग और गाली-गलौज, बॉडी शेमिंग और पर्सनल अटैक पर उतर आते हैं. यही बिहेवियर जब जानबूझकर किसी को भड़काने, परेशान करने या रिएक्शन लेने के लिए किया जाता है, तो उसे आम तौर पर ऑनलाइन ट्रोलिंग कहा जाता है.

लेकिन यहां एक सवाल यह है कि आखिर कोई इंसान किसी ऐसे सेलेब्रिटी को क्यों निशाना बनाता है, जिसे वह पर्सनली जानता तक नहीं है? आखिर किसी स्टार को बुरा-भला कहकर उसे क्या मिलता है? इसका जवाब सिर्फ यह नहीं है कि लोग सेलेब्रिटीज से हेट करते हैं. साइकोलॉजी और सोशल मीडिया बिहेविर पर हुई रिसर्च बताती है कि ट्रोलिंग के पीछे कई कारण होते हैं. 

ट्रोलिंग और आलोचना में क्या अंतर है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर नेगेटिव कमेंट ट्रोलिंग नहीं होता. किसी फिल्म को खराब कहना, किसी एक्टर की एक्टिंग पर कमेंट करना या किसी सेलेब्रिटी के पब्लिक स्टेटमेंट से सहमत ना होना नॉर्मल आलोचना हो सकती है क्योंकि सोशल मीडिया पर हर शख्स को अपनी बात रखने और कहने का राइट है.  ट्रोलिंग तब मानी जाती है जब  किसी व्यक्ति का मकसद चर्चा करना नहीं, बल्कि सामने वाले को भड़काना, बेइज्ज करना या जानबूझकर कॉन्ट्रोवर्सी पैदा करना हो. यानी किसी स्टार की फिल्म पसंद न आना आलोचना है, लेकिन सिर्फ उसे परेशान करने के लिए लगातार उसे निशाना बनाया जाए और सेलेब्स गाली देना या पर्सनल लाइफ को लेकर अपमानजनक कमेंट करना ट्रोलिंग की कैटेगरी में आता है. 

सेलेब्स को ट्रोल्स करने से ट्रोलर्स को आखिर मिलता क्या है?

ट्रोलिंग का सबसे बड़ा रिवॉर्ड कई बार कोई पैसा या किसी तरह फायदा नहीं, बल्कि रिएक्शन होता है. अगर ट्रोल किए गए सेलेब्रिटी के फैंस लड़ने लगें, कमेंट सेक्शन में बहस शुरू हो जाए या पोस्ट वायरल हो जाए, तो ट्रोलर को यह ऐसा लग सकता है कि उसने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया. यही वजह है कि कई बार ट्रोलर का असली निशाना सेलेब्रिटी से ज्यादा उसका फैन बेस होता है. उसे पता होता है कि अगर वह किसी बड़े सेलेब्स के बारे में भड़काऊ कमेंट करेगा, तो फैंस जवाब देंगे और उससे उसे ज्यादा एंगेजमेंट मिलेगी. 

गुमनामी क्यों बढ़ाती है ट्रोलिंग?

सोशल मीडिया पर पहचान छिपी होने या सामने वाले से दूरी होने का असर भी बहुत इंपोर्टेंट है. आमने-सामने किसी शख्स को गाली देने में सोसाइटी का प्रेशर, शर्मिंदगी और तुरंत रिप्लाई का डर होता है. लेकिन ऑनलाइन स्पेस में ऐसा कुछ नहीं होता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अनजान नाम वाले अकाउंट चलाने वाला हर शक्स ट्रोलर ही होता है. बात सिर्फ इतनी है कि पहचान छिपी होने की वजह से ट्रोलर्स को एग्रेसिव और खुलकर गाली-गलौज  करना का फायदा मिल जाता है. 

सेलेब्रिटीज ही बार-बार निशाने पर क्यों आते हैं?

यहां सेलेब्रिटी की पॉपुलैरिटी ही सबसे अहम है. दरअसल, जब कोई ट्रोलर किसी बड़े स्टार के बारे में कमेंट करता है, उसके चांस होते हैं कि वो बात ज्यादा लोगों में जाएगी. जितना बड़ा फैन बेस, उतनी ज्यादा पॉसिबॉलिटी कि कमेंट का जवाब आएगा और लोग उसके बारे में चर्चा करेंगे. इसलिए सेलेब्रिटी ट्रोलिंग में एक तरह का विजिबिलिटी फैक्टर भी काम करता है. किसी अनजान शख्स को ट्रोल करने से शायद उतना अटेंशन नहीं मिलेगा, जितना किसी बड़े स्टार को ट्रोल करने से मिल सकता है. 

क्या ट्रोलिंग का सैडिज्म से है कनेक्शन?

यह ट्रोलिंग का सबसे सीरियस पहलू है. कुछ स्टडीज में एवरीडे सैडिज्म यानी दूसरों को परेशान या दुखी देखकर खुशी मिलने की बिहेवियर और ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच समानता पाई गई. साल 2014 की एक स्टडी में 1,215 लोगों के दो ऑनलाइन स्टडी के बेस पर ट्रोलिंग एंजॉयमेंट और सैडिज्म के बीच समानता पाई गई थी.  हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ट्रोलर को किसी साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर से जोड़ दिया जाए. रिसर्च पर्सनैलिटी ट्रेट्स के बीच सांख्यिकीय संबंध की बात करती है, हर शक्स का क्लिनिकल डायग्नोसिस नहीं होता है.

सलमान खान का मामला क्यों बना बड़ा उदाहरण?

हाल ही में सलमान खान ने बिग बॉस में खुद ट्रोलिंग कल्चर पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उन्हें उम्र, वजन और लुक्स को लेकर उन्हें ट्रोल किया गया था. इसके इसके साथ ही उन्होंने अपने ऊपर होने वाली बॉडी शेमिंग का उदाहरण दिया और कहा, 'भाई मोटा हो गया है. कर लो ना ट्रोल.' इसके बाद उन्होंने अपनी हैट और जैकेट उतारकर अपनी बात रखी और ट्रोलर्स को उन्हें ट्रोल करने की चुनौती दी. सलमान ने इसके साथ ही सेलेब्रिटीज की उम्र, वजन और लुक्स पर होने वाली कमेंट्स पर भी सवाल उठाया. उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को दूसरों को ट्रोल करने से पहले खुद को देखना चाहिए.

सलमान ने कैटरीना कैफ का भी किया जिक्र

सलमान खान ने इसी बातचीत में फीमेल सेलेब्स और खासकर प्रेग्नेंसी के बाद बॉडी में होने वाले चेंजेस को होनी वाली ट्रोलिंग पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कैटरीना कैफ का नाम लिए बिना कहा कि प्रेग्नेंसी के बाद वजन बढ़ना सामान्य है और किसी महिला को अपने फैमिली के साथ समय बिताने के बाद फिल्मों में लौटने पर अपनी फिटनेस को लेकर खुद फैसला करने का अधिकार होना चाहिए. इससे समझा जा सकता है कि सेलेब्रिटी ट्रोलिंग सिर्फ फिल्मों या एक्टिंग तक सीमित नहीं है. कई बार लोगों की उम्र, शरीर, कपड़े, चेहरा, शादी, प्रेग्नेंसी और पर्सनल लाइफ को लेकर भी ट्रोल करने लग जाते हैं. 

क्या हर ट्रोल अपने मकसद में कामयाब हो जाता है?

ऐसा जरूरी नहीं है कि हर ट्रोल अपने मकसद में कामयाब हो जाता है. कई बार सेलेब्रिटी जवाब ही नहीं देते. लेकिन किसी कमेंट पर सेलेब्रिटी रिएक्शन देता है या फैंस बड़ी संख्या उस बारे में बात करने लगते  हैं तो वही चीज सोशल मीडिया पर ज्यादा विजिबिल होती है और उसी से रीच बढ़ती है. यही सोशल मीडिया एंगेजमेंट का एक इंपोर्टेंट हिस्सा है. कॉन्ट्रोवर्शियल कमेंट पर जितना ज्यादा रिएक्शन आता है, उतनी ज्यादा उसकी विजिबिलिटी बढ़ने के चांस होते हैं. इस वजह से ट्रोलिंग कभी-कभी खुद एक साइकल बन जाती है. इसलिए ये बात सेलिब्रिटीज और उनके फैंस पर भी डिपेंड करता हैं कि ट्रोलर्स की बातों पर वे कितना ध्यान देते हैं.

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