Sangrur में व्यक्ति के आत्महत्या प्रयास के बाद Punjab में मादक पदार्थों पर सियासी तकरार
पंजाब के संगरूर जिले में एक व्यक्ति द्वारा अपने गांव में मादक पदार्थों की आपूर्ति को लेकर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किए जाने के बाद सोमवार को राज्य में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद विपक्षी दलों ने इस समस्या पर अंकुश लगाने में ‘‘विफल’’ रहने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधा, जबकि सत्तारूढ़ दल ने पलटवार करते हुए इन आरोपों को ‘‘निम्न स्तर की राजनीति’’ करार दिया। संगरूर के नमोल गांव के निवासी जग्गा सिंह ने कथित तौर पर रविवार को संगरूर जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
उसका दावा है कि अपने गांव में मादक पदार्थों की आपूर्ति का एक वीडियो साझा करने के बाद स्थानीय सरपंच ने उसे धमकियां दी थीं। ग्रामीण ने यह भी दावा किया कि उसने इस मामले में पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिलहाल उसका पटियाला के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
नमोल पंचायत के नेताओं ने जग्गा सिंह के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि वह पंचायत के साथ विवाद से जुड़े एक मामले में ‘‘खुद को बचाने’’ के लिए ये आरोप लगा रहा है। वहीं, पुलिस ने कहा कि इस ग्रामीण के खिलाफ नौ प्राथमिकियां दर्ज हैं जिसमें एक मामला मादक पदार्थ से जुड़ा है जबकि चार आबकारी मामलों में भी उसे दोषी ठहराया जा चुका है। आप की पंजाब इकाई के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने भी जग्गा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित होने का दावा किया।
इसी के साथ उन्होंने उसके खिलाफ दर्ज मामलों का भी हवाला दिया जिनमें मादक पदार्थ और बलात्कार के आरोप शामिल हैं। संबंधित घटनाक्रम सात सितंबर को संगरूर में एक दलित व्यक्ति गुलजार सिंह द्वारा कथित तौर पर की गई आत्महत्या के बाद हुआ। गुलजार सिंह के परिवार का आरोप है कि दिर्बा में एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से मादक पदार्थों की आपूर्ति संबंधित सवाल पूछने पर उसे प्रताड़ित किया गया और उसके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
जग्गा सिंह ने एक वीडियो में दावा किया कि उसने इंटरनेट पर नशीले पदार्थ ‘चिट्टा’ (सिंथेटिक ड्रग्स) की आपूर्ति का वीडियो पोस्ट किया था। उसका आरोप है कि गांव के सरपंच ने उसे धमकाया और जबरदस्ती वीडियो ‘डिलीट’ करा दिया। उसने यह भी दावा किया कि उसके घर के कैमरे भी तोड़ दिए गए और शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जग्गा ने एक और वीडियो में आरोप लगाया कि नमोल गांव में मादक पदार्थों की ‘‘लगातार’’ आपूर्ति हो रही है। अरोड़ा ने कहा कि नमोल गांव की पंचायत ने पहले एक प्रस्ताव पारित किया था कि गांव में मादक पदार्थों को बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनके अनुसार, सात सितंबर को जग्गा ने कथित तौर पर गांव के सरपंच और पंचों के साथ दुर्व्यवहार किया, जिससे उनके बीच विवाद हुआ।
इसके बाद ग्राम पंचायत और जग्गा दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। अरोड़ा ने बताया कि 12 सितंबर को जग्गा ने धमकी दी थी कि यदि सरपंच और पंचायत के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वह आत्महत्या कर लेगा। अरोड़ा ने मान सरकार की आलोचना करने को लेकर विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जमीनी हकीकत को समझे बिना आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को ‘‘बदनाम’’ करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि वे नमोल गांव जाएं और पंचायत के खिलाफ बोलकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की यह ‘‘निम्न स्तर की राजनीति’’ बेहद ‘‘शर्मनाक और निंदनीय’’ है।
Bihar Building Bye laws 2026 के प्रारूप पर GoM बैठक में नियमों को सरल बनाने पर हुई चर्चा
माननीय उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आज सिंचाई भवन स्थित कार्यालय में नगर विकास एवं आवास विभाग से संबंधित बिहार भवन उपविधि-2026 के प्रारूप पर गठित उच्चस्तरीय मंत्रियों के समूह (GoM) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित भवन उपविधि के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, भवन निर्माण से संबंधित नियामक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, सुगम एवं जनोपयोगी बनाने के लिए विभिन्न सुझावों और अनुशंसाओं पर चर्चा की गई।
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बैठक में माननीय मंत्री, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग सह ग्रामीण विकास विभाग, श्री श्रवण कुमार, माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग, श्री राम कृपाल यादव, माननीय मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग, श्री नीतीश मिश्रा तथा माननीय मंत्री, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, श्री संजय कुमार सिंह उपस्थित रहे। बैठक के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार ने पी.पी.टी के माध्यम से बिहार भवन उपविधि-2026 के प्रारूप एवं प्रस्तावित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी।
माननीय उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नक्शे की वैधता से संबंधित प्रावधानों में प्रस्तावित संशोधन से आम लोगों को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न हितधारकों द्वारा दिए गए सकारात्मक एवं व्यावहारिक सुझाव बिहार भवन उपविधि-2026 को और अधिक प्रभावी, सरल एवं जनोपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
श्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि ”बिहार भवन उपविधि-2026 का मुख्य उद्देश्य व्यवसाय में सुगमता (Ease of Doing Business) एवं जीवन जीनें में सुगमता (Ease of Living) को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और लोगों को बेहतर सुविधा देना है। इसके तहत अनावश्यक नियमों और प्रक्रियाओं को कम किया जाएगा तथा भवन निर्माण की अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा।“
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श्री मिश्रा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के सुनियोजित, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित विकास के विज़न के अनुरूप बिहार भवन उपविधि-2026 के माध्यम से भवन निर्माण की प्रक्रियाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है, ताकि आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। मंत्री ने बताया कि बैठक में बिहार भवन उपविधि-2026 को समयानुकूल, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाने तथा भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर नगर विकास एवं आवास विभाग के वरीय पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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