ईरान में बढ़ रहा संकट, भारत अपने नागरिकों को बाहर निकालनें की कोशिश में जुटा, मेडिकल छात्रों को पर टूटी मुसीबत
ईरान के हालात को देखते हुए भारत सरकार नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनकी वापसी की व्यवस्था की गई है. गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरान के बदलते हालात को देखते हुए उन भारतीय नागरिकों की वापसी की तैयारी जारी है. ये वापस लौटना चाहते हैं. एक दिन पहले ही भारत सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा पर न जाने की सलाह दी.
4,000 से अधिक छात्र
एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संगठनों की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में दो से तीन हजार प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. वहीं 10 हजार से अधिक लोग गिरफ्तार हो गए हैं. एक अनुमान के अनुसार, 8,000 से 10 हजार भारतीय नागरिक रहते हैं. इनमें करीब 3,000 मेडिकल छात्र है. वहीं 4,000 अन्य छात्र है. 2,000 मछुआरे और अन्य व्यापारी, पर्यटक व शिया तीर्थयात्री शामिल हैं.
भारतीय दूतावास से संपर्क
ऐसे ही हालात यूक्रेन में बने थे. जब तीन साल पहले रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था. उस समय भी हजारों की संख्या में मेडिकल छात्रों को देश छोड़कर भारत लौटना पड़ा था. इस दौरान उनकी पढ़ाई पर काफी असर हुआ. उनकी पढ़ाई पर ब्रेक लग गया था. बाद में भारत सरकार उनकी पढ़ाई पूरी कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की थी. अब इन छात्रों ने भारतीय दूतावास से संपर्क करना शुरू कर दिया है. आपको बात दें कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है. ईरान में अंदरूनी हालात बिगड़ रहे हैं. प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं. कई सरकारी दफ्तरों को नुकसान पहुंचाया जा चुका है.
ईमेल करके मदद मांगी जा सकती है
विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास के जरिए नागरिकों को सलाह दी है वह किसी भी यात्रा से बचें. दूतावास से संपर्क करें. दूतावास को ईमेल करके मदद मांगी जा सकती है. सरकार ने विशेष उड़ानों या अन्य साधनों से निकासी योजना तैयार कर रही है. इस तरह के केस में असैन्य विमानों के साथ भारतीय वायुसेना की सहायता भी ली जाती है.
3600 भारतीय नागरिकों को निकाल दिया
आपको बता दें कि बीते वर्ष ईरान एवं इजरायल के बीच युद्ध होने के हालात में भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंधु को चलाया. तेहरान से 3600 भारतीय नागरिकों को निकाल दिया गया था. इजरायल से करीब 800 भारतीयों को स्वदेश लौटाया गया था. वहीं इससे पहले यमन, सूडान व यूक्रेन से भी भारतीय नागरिकों को स्वदेश ला चुका है.
दूतावासों ने जारी की एडवाइजरी
इजरायल स्थित भारतीय दूतावास ने भारत के नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसी तरह की एडवाइजरी अमेरिका और ब्रिटेन के दूतावासों ने भी अपने नागरिकों के लिए जारी की हैं. एक्स पर पोस्ट में भारतीय दूतावास का कहना है कि क्षेत्र में मौजूदा के हालात को देखते हुए इजरायल में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क किया गया है. इजरायली अधिकारियों व होम फ्रंट कमांड की ओर से जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों के साथ प्रोटोकाल सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है.
चीन-कनाडा में संबंधों का नया दौर होगा शुरू? जिनपिंग और कनाडाई नेता के बीच आठ सालों में हुई पहली मुलाकात
बीजिंग, 16 जनवरी (आईएएनएस)। चीन और कनाडा के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत होती नजर आ रही है। करीब आठ सालों के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कनाडाई समकक्ष के साथ बातचीत शुरू की है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बीजिंग के साथ नई रणनीतिक साझेदारी की सराहना भी की। यह आठ साल में किसी कनाडाई नेता का पहला चीन दौरा था।
बता दें, बीते कुछ समय में चीन और कनाडा के बीच तनाव देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच एक-दूसरे के नागरिकों के खिलाफ बदले की कार्रवाई में गिरफ्तारी और कई ट्रेड विवादों को लेकर तनाव था। हालांकि, कनाडाई पीएम कार्नी ने खराब रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है ताकि अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम की जा सके।
अमेरिका कनाडा का मुख्य आर्थिक साझेदार है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में कनाडाई प्रोडक्ट्स पर टैरिफ तेजी से बढ़ा दिए गए हैं। ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में पीएम कार्नी ने राष्ट्रपति जिनपिंग को संबोधित करते हुए कहा, हम मिलकर इस रिश्ते की सबसे अच्छी बातों को आगे बढ़ा सकते हैं ताकि नई वैश्विक हकीकत के हिसाब से एक नया रिश्ता बना सकें।
वहीं पीएम कार्नी का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति शी ने कहा कि अक्टूबर में एपीईसी समिट के दौरान हुई उनकी पिछली बैठक में चीन-कनाडा के रिश्ते एक अहम मोड़ पर पहुंच गए थे। शी ने कहा, यह कहा जा सकता है कि पिछले साल हमारी मुलाकात ने चीन-कनाडा के रिश्तों को बेहतर बनाने में एक नया अध्याय शुरू किया।
उन्होंने कहा, चीन-कनाडा के रिश्तों का अच्छा और स्थिर विकास हमारे दोनों देशों के कॉमन इंटरेस्ट को पूरा करता है। मैं पिछले कुछ महीनों में सहयोग को फिर से शुरू करने के लिए हुई बातचीत को देखकर खुश हूं।
दरअसल, कनाडा ने 2018 में हुआवेई के फाउंडर की बेटी को अमेरिकी वारंट पर गिरफ्तार किया था, और चीन ने बदला लेने के लिए जासूसी के आरोप में दो कनाडाई नागरिकों को हिरासत में लिया था, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट आ गई थी।
इसके साथ ही दोनों देशों ने एक-दूसरे के एक्सपोर्ट पर टैरिफ लगाए और चीन पर कनाडा के चुनावों में दखल देने का भी आरोप लगाया था। हालांकि, पीएम कार्नी ने अब एक नया मोड़ लाने की कोशिश की है। बीजिंग ने भी कहा है कि वह रिश्तों को सही रास्ते पर वापस लाने को तैयार है। कनाडाई नेता ने गुरुवार को प्रीमियर ली कियांग से मुलाकात की। दोनों नेता व्यापार पर चर्चा करने के लिए बिजनेस लीडर्स से भी बातचीत करने वाले हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation

















.jpg)






