ब्रिटेन में चोरी करते वक्त खुद की वीडियो बनाता था चोर, एक लापरवाही ने पूरी गैंग को मुश्किलों में डाला
ब्रिटेन में एक लापरवाह चोर की एक गलती ने पूरी गैंग को मुश्किलों में डाल दिया. दरअसल, एक चोर घरों में सेंधमारी करते और लग्जरी कार चोरी करते वक्त वीडियो बनाता था, जिसमें वह खुद को भी दिखाता था. खास बात है कि इसी वीडियो की वजह से पुलिस ने उस आरोपी को उसकी पूरी गैंग के साथ गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस का कहना है कि वीडियो के शौकीन चोर का नाम हमजा गफूर है. वह अपनी वीडियो में सबकुछ दिखाता था, जैसे- चोरी के लिए मास्क पहनते हुए, चोरी की हुई गाड़ी चलाते हुए, घरो में डाका डालकर नकदी चुराते हुए. उसको शायद अंदाजा नहीं था कि सोशल मीडिया और मोबाइल में पड़ी ये वीडियोज ही एक दिन उसके और उसके पूरे गैंग के लिए काल बनकर सामने आ जाएंगी.
हमजा और उसका गैंग खासतौर पर महंगी गाड़ियों को निशाना बनाते थे. चोरी की कारों को वह तेजी से काफिले की तरह चलाते थे. 11 सितंबर 2023 को वे 35 हजार पाउंड (लगभग 42.44 लाख रुपये) की वोक्सवैगन टिगुआन चोरी की. पुलिस ने उनका पीछा किया तो उन्होंने कार छोड़ दी और भाग गए. जब पुलिस ने कार चेक की तो उसमें महंगा साउंड सिस्टम था ही नहीं यानी चोर उसे निकालकर अपने साथ ले गए. इसके बाद 30 अक्टूबर 2023 को उन्होंने 79 हजार पाउंड (95 लाक रुये से अधिक) की BMW X3 चोरी हो गई और मालिक को बाद में पुलिस ने बताया कि ब्रैडफॉर्ड में उसकी कार एक हादेस का शिकार हो गई है.
ऐसे पकड़ाए सभी आरोपी
पुलिस ने जब उस कार की जांच की तो उसमें से डीएनए और फिंगर प्रिंट मिले. एक टूटा आईफोन भी मिला, जिसने पुलिस को आरोपी तक पहुंचाने में मदद की. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेजों को भी खंगाला. ड्राइवर एयरबैग से डीएनए मिलने पर कामरान अहमद पकड़ा गया. लाइटर पर निशान मिलने की वजह से पुलिस ने मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को हमजा के कमरे से लग्जीरियस बैग में बड़ी मात्रा में कोकीन और हेरोइन भी मिली है.
इन आरोपियों को हुई सजा
- हमजा गफूर- 6 साल जेल
- मोहम्मद जुबैर- 3 साल 9 महीने
- कामरान अहमद- 2 साल
- जॉर्डन मे और डेंजल मडुमा- 3 साल 4 महीने
- 18 वर्षीय डायलन शटलवर्थ को सुधारात्मक आदेश दिया गया
पुलिस ने कहा- हमजा समझदार चोर नहीं
कुल मिलाकर गैंग को 15 साल की जेल हुई हैं. पुलिस ने मामले में तंज कसा और कहा कि हमजा समझदार चोर नहीं था. क्योंकि खुद की बनाई गई वीडियो ही उसकी सजा का कारण बन गई है. पुलिस अधिकारियों की मानें तो अब ये सभी लंबे वक्त तक जेल में ही रहेंगे, जिससे समाज को ज्यादा सुरक्षित रहेगा.
Cancer Causes: बच्चों के प्लेग्राउंड में मिले कैंसर के कीटाणु! UK की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, भारत में कितना खतरा?
Cancer Causes: ब्रिटेन की एक हालिया स्टडी ने बच्चों की सेहत को लेकर दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है. इस नई रिसर्च में दावा किया गया है कि ब्रिटेन के करीब 60% बच्चों के प्ले ग्राउंड्स और पार्कों में कैंसर से जुड़े कीटनाशक ग्लाइफोसेट (Glyphosate) मौजूद है. मगर उससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि यह रसायन सिर्फ पार्क की घास या मिट्टी तक सीमित नहीं है बल्कि यहां लगे झूलों, स्लाइड और खेल उपकरणों पर भी लगे हुए थे.
भारत के पार्क कितने सेफ?
यूके की रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारत में भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या यहां के बच्चों के खेल मैदान सुरक्षित हैं? क्या भारत में हालात ब्रिटेन से भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं? ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां सार्वजनिक स्थानों पर कीटनाशकों का प्रयोग और उसकी निगरानी को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है.
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UK स्टडी ने क्यों बढ़ाई चिंता
ब्रिटेन में पेस्टिसाइड एक्शन नेटवर्क यूके (पैन यूके) के विशेषज्ञों ने इंग्लैंड के कई इलाकों के प्लेग्राउंड्स से करीब 13 सैंपल्स उठाए थे. इनमें से 8 नमूनों की टेस्टिंग में पाया गया कि वहां झूलों तथा अन्य उपकरणों पर कैंसर वाले कीटाणु हैं.
हालांकि, इस स्टडी को करने के पीछे का कारण यह था कि बच्चों के रोजमर्रा के खेलने की जगहों पर पेस्टिसाइड्स का स्तर कितना सुरक्षित है. इस जांच के दौरान पाया गया कि नगर परिषदों और स्थानीय निकायों द्वारा घास और खरपतवार हटाने के लिए ग्लाइफोसेट का नियमित रूप से छिड़काव करते है.
क्यों खतरनाक है ग्लाइफोसेट?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ग्लाइफोसेट को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का एक कारण है. WHO की सहयोगी संस्था IARC इसे पहले से कैंसर कारक बता चुकी है. ऐसे में अब बच्चों के प्लेयिंग एरिया में इसकी मौजूदगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.
कैसे होगा कैंसर?
रिसर्चर्स ने बताया कि ग्लाइफोसेट से कैंसर हो सकता है. यदि पार्क में ऐसे खतरनाक रसायन होंगे तो बच्चों को इंफेक्शन हो सकता है. दरअसल, जो छोटे बच्चे होते हैं वे अपने मुंह में उंगलियां डालते हैं. ऐसे में यह सामान्य बात है कि अपने गंदे हाथों से नाक, आंख और मुंह को छूएं. कई बार बच्चे गंदे उपकरणों को भी मुंह में रख लेते हैं, जिससे उन्हें इंफेक्शन हो सकता है.
एक्सपर्ट ने दी ये सलाह
यूएस के सर्टिफाइड नेचुरोपैथी डॉ. स्टीफन कैब्राल बताते हैं कि ग्लाइफोसेट एक ऐसा खतरनाक रसायन है, जो इंसानों, जानवरों और कई प्रकार के पौधों की प्रजातियों के लिए खतरनाक है. उन्होंने कहा है कि किसी गर्भवती मां के संपर्क में ग्लाइफोसेट के पार्टिकल्स आ जाए तो उसके शिशु को भी कैंसर हो सकता है. ब्रेस्टफीड कराने वाली माताओं से भी बच्चे को कैंसर हो सकता है. इसलिए, इसके इस्तेमाल पर कड़े कानून बनाए जाने चाहिए.
भारत में बड़े पैमाने पर होता है इस्तेमाल
भारत में नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और स्थानीय निकायों द्वारा पार्कों, सड़कों के किनारे, खाली प्लॉट्स और सरकारी जमीनों पर ग्लाइफोसेट रसायन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.
मगर समस्या यह है कि भारत के खेल मैदानों में कीटनाशकों के स्तर की कोई आधिकारिक जांच नहीं होती है और न ही यह जानकारी आम लोगों को दी जाती है कि इसका इस्तेमाल कब, कहां और कितनी मात्रा में करना चाहिए.
Glyphosate के संपर्क में रहने से क्या होगा?
बता दें कि यह रसायन बच्चों समेत वयस्कों को भी प्रभावित कर सकता है. लंबे समय तक ग्लाइफोसेट जैसे कीटनाशकों के संपर्क में रहने से कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-
- हार्मोनल इंबैलेंस.
- सांस से जुड़ी समस्याएं.
- न्यूरोलॉजिकल डिजीज.
- और कई प्रकार के कैंसर जैसे लिंफोमा.
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