Gurugram में बिना अनुमति के विदेशी नागरिकों को ठहराने के आरोप में 73 फ्लैट मालिकों पर मामला दर्ज
हरियाणा के गुरुग्राम में बिना अनुमति और बिना फॉर्म-सी भरे विदेशी नागरिकों को अपने फ्लैट में ठहराने के आरोप में 73 फ्लैट मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, खेड़की दौला पुलिस थाने को सूचना मिली थी कि कई विदेशी नागरिकों को बिना फॉर्म-सी और आवश्यक अनुमति के सेक्टर-82 क्षेत्र स्थित डीएलएफ प्राइमस सोसाइटी के कई फ्लैट में ठहराया जा रहा है।
सूचना मिलने पर पुलिस डीएलएफ प्राइमस सोसाइटी पहुंची और सोसाइटी से संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की। गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 73 फ्लैट मालिकों ने अपने फ्लैट में रहने वाले विदेशी नागरिकों की जानकारी नहीं दी थी और विदेशी नागरिकों के रहने से संबंधित फॉर्म-सी भी नहीं भरा था।
उन्होंने बताया कि खेड़की दौला पुलिस थाने में सभी 73 फ्लैट मालिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। उन्होंने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और विदेशी नागरिकों की निगरानी को ध्यान में रखते हुए फॉर्म-सी भरना और अपने निवास स्थान के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है।
पुलिस ने कहा है कि सभी होटल, गेस्ट हाउस, होम स्टे, पीजी संचालकों और फ्लैट मालिकों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाता है कि उनके प्रतिष्ठान में ठहरने वाले प्रत्येक विदेशी नागरिक का फॉर्म-सी भरा जाए और संबंधित पुलिस थाने को सूचना दी जाए।
Delhi court ने आप के पूर्व विधायक नितिन त्यागी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया
दिल्ली की एक अदालत ने 2019 में एक निजी निर्माण कंपनी के कर्मचारियों को परेशान करने के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नितिन त्यागी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।
त्यागी और उनके साथियों पर आरोप है कि उन्होंने 29 नवंबर, 2019 को यमुना के डूब क्षेत्र की बहाली और पुनरुद्धार के लिए काम पर लगाए गए कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने 13 जनवरी के आदेश में पूर्व विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 427 (50 रुपये या उससे अधिक का नुकसान करने वाला शरारती कृत्य), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 186 (सार्वजनिक कार्य में बाधा डालना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें किसी भी सरकारी अधिकारी को चोट पहुंचाने, हमला करने या आपराधिक बल प्रयोग करने से संबंधित अपराधों से मुक्त कर दिया।
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