Airstrike से भड़का Afghanistan, Taliban ने Pakistan को दी Crushing Response की चेतावनी, India के पड़ोस में फिर से सैन्य टकराव की आशंका
पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए हवाई हमला किया है, लेकिन इस बार तालिबान ने भी इस्लामाबाद को कड़ा सबक सिखाने की ठानते हुए खुली और सख्त चेतावनी जारी कर दी है। हम आपको बता दें कि अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक में कम से कम तीन लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है। पाकिस्तानी कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुछ ही दिन पहले तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने साफ कहा था कि अफगान जमीन पर किसी भी पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और इसे उन्होंने “क्रशिंग रिस्पॉन्स” यानी करारा जवाब बताया था।
कुनार पर हमला, टकराव का खतरा बढ़ा
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने कुनार के अलावा पक्तिका प्रांत में भी हवाई कार्रवाई की। अफगान अधिकारियों ने जहां तीन लोगों के मारे जाने की जानकारी दी है, वहीं पाकिस्तान की ओर से तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई। दूसरी ओर, पाकिस्तानी पक्ष का दावा है कि उसकी कार्रवाई संदिग्ध आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर की गई। यह कार्रवाई पाकिस्तान में हाल में हुए घातक आतंकी हमलों के बाद हुई है। हम आपको याद दिला दें कि पिछले सप्ताह कोहाट में पुलिस परिसर के पास हुए हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी और पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने इसके पीछे अफगानिस्तान से संचालित आतंकवादी नेटवर्क की आशंका जताई है।
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इसी मुद्दे को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पुराना आरोप-प्रत्यारोप अब सीधे सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP के लड़ाके अफगान जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले करते हैं। तालिबान इन आरोपों को लगातार खारिज करता है और कहता है कि वह अफगानिस्तान की धरती को दूसरे देशों के खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देता।
तालिबान की दो टूक चेतावनी
पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता की ओर से अफगानिस्तान में आतंकवादी समूहों की भर्ती, प्रशिक्षण और हथियारबंदी के आरोपों के जवाब में तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अगर पाकिस्तान आत्मरक्षा के नाम पर अफगान क्षेत्र में कार्रवाई करता है तो काबुल को अपनी संप्रभुता की रक्षा का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा समस्याओं की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि TTP और बलूच सशस्त्र समूहों से जुड़ी हिंसा तालिबान के 2021 में सत्ता में लौटने से पहले से मौजूद है।
हालांकि तालिबान की भाषा में सैन्य चेतावनी जितनी कठोर है, उतना ही महत्वपूर्ण उसका दूसरा संदेश भी है। काबुल ने बातचीत का दरवाजा बंद नहीं किया है। मुजाहिद ने पाकिस्तान के साथ बेहतर खुफिया सहयोग और सीमा सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बताई है तथा सऊदी अरब को दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की संभावित भूमिका के लिए समर्थन दिया है। यानी काबुल एक तरफ सैन्य जवाब की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरी तरफ राजनयिक रास्ता खुला रखने की कोशिश भी कर रहा है।
पाकिस्तान के भीतर भी बढ़ता दबाव
इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा और बेहद महत्वपूर्ण पहलू पाकिस्तान की घरेलू स्थिति है। इस्लामाबाद इस समय एक साथ सुरक्षा, राजनीति और अर्थव्यवस्था के दबाव से जूझ रहा है। देश में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी भी पेट्रोलियम लेवी के खिलाफ राजधानी की ओर मार्च कर रही है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी में पहुंचने से रोकने की तैयारी शुरू कर दी है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने चेतावनी दी है कि हड़ताल, धरना, लंबे मार्च और सड़कों की नाकेबंदी से अर्थव्यवस्था को रोजाना करीब 120 अरब पाकिस्तानी रुपये, यानी लगभग 400-434 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। अनुमान के मुताबिक सेवाक्षेत्र को करीब 86 अरब रुपये, उद्योग को 25 अरब और कृषि को 9 अरब रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो सकता है। सरकार ने यह भी चेताया है कि इंटरनेट बाधित होने की स्थिति में आईटी निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है।
देखा जाए तो इस्लामाबाद के सामने चुनौती केवल अफगान सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर भी राजनीतिक और सुरक्षा संकट गहराता जा रहा है। राजधानी में संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, प्रवेश मार्गों पर कंटेनर लगाए जा रहे हैं और प्रमुख अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसी बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खैबर पख्तूनख्वा अध्यक्ष जुनैद अकबर के एक बयान ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। 27 सितंबर के प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च से पहले एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अकबर ने कहा कि PTI कार्यकर्ता मोटरवे, जीटी रोड और मार्गल्ला हिल्स समेत कई रास्तों से राजधानी में प्रवेश करेंगे और “हम इस्लामाबाद को सोमनाथ बना देंगे।” पाकिस्तान सरकार ने इसे सीधे तौर पर हिंसा की धमकी और राजधानी में अराजकता फैलाने की मंशा का संकेत बताया है।
उधर, अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के नये हमले के बाद सबसे बड़ा खतरा यह है कि एक सीमित एयर स्ट्राइक जवाबी गोलीबारी, सीमा संघर्ष और फिर व्यापक सैन्य टकराव में बदल सकती है। हम आपको याद दिला दें कि इस साल फरवरी में भी दोनों देशों के बीच वर्षों का सबसे गंभीर सैन्य टकराव हो चुका है और ताजा घटनाक्रम उसी चक्र की वापसी का संकेत देता है। बहरहाल, देखना होगा कि कुनार की यह बमबारी यहीं रुकती है या पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा एक बार फिर खुले सैन्य संघर्ष का नया मोर्चा बनती है।
- नीरज कुमार दुबे
पश्चिम बंगाल SIR: 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, सुप्रीम कोर्ट में EC ने ट्रिब्यूनल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा
पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। एसआईआर के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े लाखों मामलों की अपील लंबित है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि 16 सितंबर तक 37 लाख से अधिक अपीलों का निपटारा होना बाकी था।
आयोग ने कहा कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इन मामलों को पूरा करने में 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में आयोग ने अपीलों के जल्द निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
लाखों मामलों की अपील लंबित
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर से जुड़े आदेशों के खिलाफ कुल 38.31 लाख से अधिक अपीलें दाखिल की गई हैं। इनमें लगभग 22.21 लाख मामले ऐसे हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद उसे दोबारा शामिल करने की अपील की गई है। वहीं लगभग 16.10 लाख अपीलें ऐसे नामों को चुनौती देने से जुड़ी हैं जिन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया है। अभी 19 ट्रिब्यूनल इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इन ट्रिब्यूनलों का गठन किया था। इनमें हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी गई है।
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में बताया कि अप्रैल के मध्य में ट्रिब्यूनलों के काम शुरू करने के बाद अब तक 1,26,194 अपीलों का निपटारा किया जा चुका है। इस हिसाब से हर महीने औसतन लगभग 25 हजार मामलों पर फैसला हुआ है। 16 सितंबर तक 37,05,235 अपीलें लंबित थीं। आयोग का कहना है कि अगर इसी गति से सप्ताह के सातों दिन काम जारी रहा तो मौजूदा लंबित मामलों को खत्म करने में करीब 146 महीने यानी 12 साल से ज्यादा लग सकते हैं।
42 लोकसभा सीटों के हिसाब से ट्रिब्यूनल बढ़ाने का प्रस्ताव
लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग का प्रस्ताव है कि पश्चिम बंगाल की प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाया जाए। इस तरह राज्य में कुल 42 ट्रिब्यूनल हो जाएंगे। आयोग का कहना है कि इससे एसआईआर से जुड़ी अपीलों की सुनवाई में तेजी लाई जा सकेगी और लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा।
अब तक निपटाए गए मामलों में 1,13,943 अपीलों में मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने का फैसला हुआ है। वहीं, एसआईआर के कारण विधानसभा चुनाव के नतीजों पर असर पड़ने के दावे को भी चुनाव आयोग ने खारिज किया है। आयोग के मुताबिक, सिर्फ हटाए गए नामों और चुनाव में जीत के अंतर की तुलना के आधार पर एसआईआर के प्रभाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।
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