Canada को EU का सहयोगी सदस्य बनाने की पहल, Emmanuel Macron ने किया समर्थन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ मुलाकात की और उनके देश को यूरोपीय संघ (ईयू) का पहला सहयोगी सदस्य बनाए जाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने रविवार को फ्रांस के क्षेत्र सेंट-पियरे-ए-मिकलॉन में मुलाकात के दौरान अंतरिक्ष, रक्षा, ऊर्जा और कारोबार समेत विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमति जताई। यह मुलाकात कनाडा के अमेरिका के साथ संबंधों में गिरावट के बीच उसके यूरोप की ओर तेजी से बढ़ते झुकाव के लिहाज से खास महत्व रखती है।
कार्नी के साथ खड़े मैक्रों ने कहा, ‘‘हम यूरोपीय संघ के साथ कनाडा के संबंध और मजबूत करने की इस पहल का पूरा समर्थन करते हैं। इसमें कनाडा को संघ का सहयोगी सदस्य बनाने के साथ ही उसे व्यापक यूरोपीय समुदाय से पूरी तरह जोड़ना भी शामिल है।’’ कार्नी ने कहा कि कनाडा और फ्रांस के मूल्य साझा हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी अंतरिक्ष एजेंसियों और रक्षा मंत्रालयों को प्रक्षेपण प्रणालियों एवं जमीन पर स्थित सिग्नल ग्रहण केंद्रों समेत बुनियादी ढांचा विकसित करने और साझा करने का जिम्मा देंगे।
दोनों देशों ने ऊर्जा, दूरसंचार, जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने की क्षमता और आर्थिक विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इससे कुछ दिन पहले यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा को ईयू का पहला सहयोगी सदस्य बनाने का प्रस्ताव रखा था। कार्नी ने इस संभावना का स्वागत किया है।
उनका कहना है कि यूरोप के साथ गहरे संबंध कनाडा को अधिक विकल्प देंगे और उसे किसी एक देश के आर्थिक दबाव के प्रति कम संवेदनशील बनाएंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क, आर्थिक रियायतों की मांग और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बार-बार की गई बातों ने कनाडा के यूरोप की ओर झुकाव को और तेज किया है। ट्रंप ने हाल में सोशल मीडिया पर एक ऐसा नक्शा भी साझा किया था, जिसमें कनाडा और सेंट-पियरे-ए-मिकलॉन समेत पूरे उत्तरी अमेरिका पर अमेरिकी झंडा दिखाया गया था।
मैक्रों ने रविवार को सेंट-पियरे-ए-मिकलॉन के हवाई अड्डे पर कार्नी का स्वागत किया। मैक्रों ने यह भी कहा कि रविवार की वार्ता ऐसे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई बाधाओं और ईंधन एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंकाओं के बीच फ्रांस के लिए तेल एवं गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। मैक्रों ने कहा, ‘‘कनाडा के पास महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों के बड़े भंडार हैं।
वह तेल और प्राकृतिक गैस का भी एक प्रमुख उत्पादक है।’’ कार्नी के कार्यालय ने एक बयान में बताया कि दोनों नेताओं ने एयरोस्पेस, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और क्वांटम कंप्यूटिंग, उपग्रहों तथा सुपरकंप्यूटिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों पर भी चर्चा की। कार्नी रविवार देर रात ओटावा लौटे, जहां उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टॉर के साथ रक्षा, आर्कटिक सुरक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की। वह सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क रवाना होंगे।
ग्लोबल इमरजेंसी!! ईरान को मिटाने के मूड में आया अमेरिका, 109 जहाजों की नाकेबंदी से मचा हड़कंप
अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वह ईरान को लेकर 'फैसला लेने के मूड' में हैं और आने वाले दिनों में 'बहुत बड़ी चीज़ें' हो सकती हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेहरान ने कतरी मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन को वार्ता शुरू करने के लिए 7 शर्तें भेजी हैं, साथ ही मांगें न माने जाने पर 'निर्णायक युद्ध' की चेतावनी दी है।
'ठीक से पेश आएं'
फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह 'फैसला लेने के मूड' में हैं और अगर ईरानी सरकार 'ठीक से पेश नहीं आती' है, तो निकट भविष्य में अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर 'बहुत बड़ी चीज़ें' होने वाली हैं। ट्रंप ने कहा, "मेरा सवाल यह है कि मैं पूरे देश को कब और कैसे तबाह कर सकता हूँ? उन्हें ठीक से पेश आना चाहिए।"
अपने पास मौजूद विकल्पों के बारे में बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह देश को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं, उसे आर्थिक रूप से बर्बाद होने दे सकते हैं, या कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने भविष्यवाणी की कि "बहुत जल्द ही बहुत बड़ी चीज़ें होने वाली हैं।"
ट्रंप ने 3 विकल्प बताए
ट्रंप ने ईरान से निपटने के लिए तीन विकल्प बताए: 'ईरान को खत्म करना', उन्हें 'आर्थिक रूप से बर्बाद होने देना', या 'कोई समझौता करना'। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की संभावित न्यूयॉर्क यात्रा पर भी टिप्पणी की। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह यात्रा के दौरान पेज़ेशकियन से मिलेंगे, तो ट्रंप ने कहा कि वह अपने ईरानी समकक्ष के साथ बातचीत करने के लिए 'शायद तैयार' होंगे।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, पेज़ेशकियन के एक वरिष्ठ ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका जाने और संयुक्त राष्ट्र सत्र के दौरान अन्य विश्व नेताओं के साथ बैठकें करने की उम्मीद है।
अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ के पास 109 कमर्शियल जहाज़ों का रास्ता बदला
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि वॉशिंगटन द्वारा ईरान पर लगातार जारी नौसैनिक नाकेबंदी के बीच उसकी सेना ने 109 कमर्शियल जहाज़ों का रास्ता बदल दिया है, क्योंकि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव से क्षेत्रीय शिपिंग में बाधा आ रही है।
रविवार (स्थानीय समय) को X पर एक पोस्ट में, CENTCOM ने कहा कि यह ताज़ा आंकड़ा उन जहाज़ों का है जिनका रास्ता अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी का पालन सुनिश्चित करने के लिए बदला गया था। CENTCOM ने कहा, "USS जॉन पॉल जोन्स (DDG 53) पर एक अमेरिकी नाविक पहरा दे रहा है। 20 सितंबर तक, CENTCOM की सेनाओं ने नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के लिए 109 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया है।"
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अमेरिकी सेना ने 14 जुलाई को ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक पर नाकेबंदी फिर से लागू कर दी। CENTCOM ने कहा है कि ये नियम ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने-जाने वाले जहाजों पर लागू होते हैं, जबकि अमेरिकी सेना उन जहाजों के लिए क्षेत्रीय जलक्षेत्र में ट्रैफिक को सपोर्ट करना जारी रखेगी जो नाकेबंदी का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं।
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यह ताज़ा घटनाक्रम वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) टकराव का केंद्र है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट के लिए एक अहम रास्ता है, और संघर्ष के बीच शिपिंग गतिविधियों में भारी गिरावट आई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 17 सितंबर को केवल चार कमोडिटी जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे, जो 16 जहाजों के 10-दिन के औसत से काफी कम है।
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