सिक्किम के 71 सरकारी स्कूलों में शुरू हुआ AI-पावर्ड लर्निंग प्रोग्राम, बच्चों की पढ़ाई होगी और आसान
Sikkim AI learning programme: सिक्किम सरकार ने स्कूली शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 71 सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित लर्निंग प्रोग्राम की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता और गणितीय कौशल को मजबूत करना है। शिक्षा विभाग की ओर से रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
शिक्षकों की भूमिका रहेगी सर्वोपरि
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक ही केंद्र में रहेंगे। एआई का इस्तेमाल क्लासरूम की पारंपरिक पढ़ाई के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि एक सहायक टूल के रूप में किया जाएगा। इस आधुनिक तकनीक को नियमित स्कूल समय के दौरान एक विशेष 60 मिनट की 'AI-FunZone' क्लास के माध्यम से जोड़ा गया है। विभाग के मुताबिक, इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद अनुकूली और तकनीक-सक्षम शिक्षा के जरिए छात्रों की बुनियादी योग्यताओं को निखारना है।
इन क्षेत्रों के स्कूलों में हो रहा है लागू
यह महत्वाकांक्षी 'AI-FunZone' कार्यक्रम फिलहाल गंगटोक जिले के खामदोंग, नाडोक और मार्तम ब्लॉकों के सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने बीते अप्रैल महीने में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से तीसरी से पांचवीं कक्षा के बच्चों पर केंद्रित है, जिन्हें अंग्रेजी, नेपाली और गणित विषयों में डिजिटल लर्निंग सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है।
कैसे काम करता है 'AI-FunZone'?
विभाग के अनुसार, यह कार्यक्रम बच्चों को कंप्यूटर या साझा डिजिटल उपकरणों के जरिए रोजाना छोटे और व्यक्तिगत प्रैक्टिस सेशन उपलब्ध कराता है। यह स्मार्ट सिस्टम बच्चों को पढ़ते हुए सुन सकता है, उनकी खास कमियों की पहचान कर सकता है और उनके सीखने के स्तर के अनुसार अगले कार्यों को ढाल सकता है। गणित के विषय में यह तकनीक खास गलतियों को पकड़कर उसी हिसाब से अभ्यास तैयार करती है। इसके अलावा, एक रियल-टाइम डैशबोर्ड शिक्षकों को प्रत्येक छात्र की प्रगति पर नजर रखने और जिन क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है, उन्हें तुरंत पहचानने में मदद करता है।
तकनीकी बुनियादी ढांचा और ट्रेनिंग
इस प्रोग्राम को सुचारू रूप से चलाने के लिए कंप्यूटर या टैबलेट, हेडसेट और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता होती है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ स्टैंडअलोन प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूलों में डिजिटल बुनियादी ढांचे की कुछ कमी की बात सामने आई है। इसके बावजूद, तीनों ब्लॉकों के लगभग 300 रिसोर्स पर्सन (संसाधन व्यक्तियों) का प्रशिक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
बिना परीक्षा के डर के सीख रहे हैं बच्चे
विभाग ने बताया कि शिक्षक और छात्र दोनों की तरफ से इस प्रोग्राम को लेकर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कंप्यूटर, ग्राफिक्स, ऑडियो और इंटरैक्टिव गतिविधियों के इस्तेमाल से बच्चों में स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने और उपचारात्मक शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। इस गैर-परीक्षा आधारित दृष्टिकोण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र बिना किसी रैंकिंग या तुलना के डर के खुलकर अभ्यास कर सकते हैं। साथ ही, एआई आधारित मूल्यांकन से शिक्षकों को लर्निंग गैप समझने और नियमित कक्षाओं के दौरान उन्हें दूर करने में आसानी होती है। स्कूल प्रमुखों ने भी माना है कि इस कार्यक्रम को लागू करना काफी सरल है और इससे प्रशासनिक काम का बोझ भी न्यूनतम रहता है।
नशे के खिलाफ CBSE की नई पहल: छात्रों के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ टॉकाथॉन आयोजित; एक्सपर्ट्स ने दिए सवालों के जवाब
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ विषय पर विशेष टॉकाथॉन का आयोजन किया। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को आयोजित इस 45 मिनट के संवादात्मक कार्यक्रम में विशेषज्ञों, शिक्षकों और छात्रों ने हिस्सा लिया।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों के साथ सीधे संवाद स्थापित करना और उन्हें नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में युवाओं को स्वस्थ और जिम्मेदार विकल्प चुनने के महत्व के बारे में बताया गया।
सोशल मीडिया के जरिए छात्रों से किया संवाद
CBSE ने इस टॉकाथॉन के जरिए छात्रों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, Instagram और YouTube पर विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने का अवसर दिया। बोर्ड ने छात्रों से #NashaMuktYuva और #CBSETalkathon हैशटैग के साथ अपने सवाल साझा करने के लिए आमंत्रित किया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए आज के बच्चों और युवाओं को मजबूत आधार देना जरूरी है। ऐसे में उन्हें स्वस्थ आदतों और जिम्मेदार फैसलों के प्रति जागरूक करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
AIIMS और NCB के विशेषज्ञों ने दिए छात्रों के सवालों के जवाब
टॉकाथॉन में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का पैनल शामिल हुआ। इसमें AIIMS नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. नंद कुमार, नोएडा के मयूर स्कूल की प्रिंसिपल अलका अवस्थी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), नई दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक अनीस सी. शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर लाइव आए छात्रों के सवालों को सुना और उनके जवाब दिए। चर्चा के दौरान छात्रों की जिज्ञासाओं और चिंताओं को प्रमुखता से शामिल किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य, पीयर प्रेशर और नशे की लत पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं, दोस्तों के दबाव यानी पीयर प्रेशर से निपटने और नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए जरूरी कदमों पर सवाल पूछे।
विशेषज्ञों ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना और उनके सवालों पर चर्चा की। इस संवाद के माध्यम से युवाओं को नशे से जुड़े मुद्दों को समझने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के महत्व से अवगत कराने का प्रयास किया गया।
CBSE की यह पहल छात्रों के बीच नशे की रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाने और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत करने का अवसर देने की दिशा में आयोजित की गई।
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