Sawal Hai Bawal Hai: Election आते ही ED का Action,Kanchana Yadav ने जमकर धोया
Sawal Hai Bawal Hai: गुरुवार 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है कि ईडी के मामले में दखल नहीं दिया जा सकता है. दरअसल ईडी ने पश्चिम बंगाल में बीते दिनों आईपैक संस्था पर रेड की थी. ऐसे में बंगाल सरकार ने ईडी पर आरोप लगाया कि उसने पार्टी के जरूरी दस्तावेज चुरा लिए. वहीं ईडी ने अपने काम में दखल देने और अहम दस्तावेजों को ले जाने का पश्चिम बंगाल की सीएम पर आरोप लगाया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है और कोर्ट ने इसमें की अहम टिप्पणियां की हैं. कुछ ऐसा ही मामला झारखंड में भी देखने को मिला है. इन दोनों की मामलों ने इस वक्त तूल पकड़ा हुआ है. सवाल उठता है क्या सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद ममता बनर्जी बैकफुट पर आ गई है? क्या झारखंड में ईडी वर्सेस पुलिस राज्य बनाम केंद्र सरकार की लड़ाई का हिस्सा बन गया है?
भ्रष्टाचार के खिलाफ ईडी के एक्शन पर राजनीति क्यों होनी चाहिए? ईडी का इस्तेमाल चुनावी राज्यों में विपक्ष को क्या डराने के लिए किया जाता है? जो अमूमन विपक्ष का यह आरोप रहता है. इन्हीं सब सवालों पर बात करने के लिए बहुत ही खास पैनल न्यूज़ स्टेशन के मंच पर जुड़ा. आरएलडी से मलूक नागर साहब, कांग्रेस पार्टी से अबू शर्मा साहब और विजय शर्मा साहब भारतीय जनता पार्टी से जुड़े. देखिए अहम विषय पर चर्चा.
जासूसी के आरोप में ब्रिटिश डिप्लोमैट के खिलाफ रूस का एक्शन, दो हफ्ते में देश छोड़ने का आदेश
नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। रूस ने ब्रिटिश डिप्लोमैटिक स्टाफ के एक सदस्य को जासूसी के आरोप में देश से निकालने का आदेश दिया। बता दें कि रूस का यह आदेश अमेरिका के रूसी टैंकर पर कब्जा करने में ब्रिटेन के साथ देने के बाद सामने आया है। डिप्लोमैट पर ब्रिटेन इंटेलिजेंस के लिए काम करने का आरोप है।
फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (एफएसबी) ने गुरुवार को कहा कि मॉस्को में ब्रिटिश दूतावास में सेक्रेटरी गैरेथ सैमुअल डेविस, ब्रिटेन सीक्रेट सर्विस के लिए काम करते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने ब्रिटेन के चार्ज डीअफेयर्स, डाने ढोलकिया को समन भेजा है, ताकि उनके सामने औपचारिक विरोध किया जा सके और संदिग्ध जासूस को दो हफ्ते के अंदर रूस से जाने की मांग की जा सके।
रूसी विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा, “मॉस्को रूसी इलाके में ब्रिटिश स्पेशल सर्विस के बिना बताए एजेंट की एक्टिविटी को बर्दाश्त नहीं करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सरकार की जीरो-टॉलरेंस की नीति है।
ब्रिटिश मिशन की डिप्टी हेड ने दिन में पहले रूसी विदेश मंत्रालय की बिल्डिंग में आने और जाने के दौरान पत्रकारों से बात करने से मना कर दिया। ब्रिटेन और रूस के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं, जिसकी वजह से जासूसी के शक में अक्सर डिप्लोमैटिक स्टाफ को आपसी तौर पर निकाला गया।
रूस ने कहा कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर रूस का सामना करने के लिए दुश्मनी को लंबा खींचने की कोशिश कर रही है। रूसी अधिकारियों का दावा है कि ब्रिटेन दशकों से इसी रणनीति पर काम कर रहा है।
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच भी तनाव जारी है। इस बीच, हाल ही में अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से रूसी टैंकर पर कब्जा कर लिया। हालांकि, टैंकर में तेल नहीं था। इसके अलावा, अमेरिका ने रूस के जब्त जहाज मैरिनेरा पर सवार क्रू के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का दावा किया। वहीं, रूसी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वह अमेरिकी कर्मियों के जहाज पर सवार होने की खबरों पर करीबी नजर रखे हुए है।
मंत्रालय ने कहा कि रूस ने अमेरिका से मांग की है कि वह टैंकर पर सवार रूसी नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार करे और उनके अधिकारों का पूरा सम्मान सुनिश्चित करे और उन्हें जल्द से जल्द वापस घर भेजे। वहीं, अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने एक्स सोशल नेटवर्क पर लिखा कि यूएस अधिकारी जब्त किए गए मैरिनेरा टैंकर, जिसे बेला-1 के नाम से भी जाना जाता है, के क्रू मेंबर्स के खिलाफ क्रिमिनल मामला दर्ज करेंगे।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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