2026 में दुनिया भर में एआई पर खर्च 2.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। वर्ष 2026 में दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर खर्च करीब 2.52 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत अधिक होगा। गुरुवार को जारी गार्टनर की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
गार्टनर के विशिष्ट उपाध्यक्ष विश्लेषक जॉन-डेविड लवलॉक ने कहा कि एआई को अपनाने में केवल पैसा ही सबसे बड़ा कारण नहीं है, इसके लिए जरूरी है कि संस्थानों के पास प्रशिक्षित लोग और सही काम करने की व्यवस्था भी हो।
उन्होंने बताया कि अब कंपनियां केवल भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा करने के बजाय, पहले से सिद्ध परिणामों को ज्यादा महत्व दे रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई की बुनियादी व्यवस्था तैयार करने के चलते एआई के लिए खास सर्वरों पर खर्च में 49 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। यह कुल एआई खर्च का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा होगा।
इसके अलावा, एआई से जुड़ी तकनीकी सुविधाएं तैयार करने में करीब 401 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। यह खर्च तकनीकी कंपनियों द्वारा एआई को मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा।
लवलॉक ने आगे कहा कि वर्ष 2026 तक एआई एक ऐसे दौर में रहेगा, जहां लोगों की उम्मीदें कुछ हद तक कम हो सकती हैं। इसलिए ज्यादातर कंपनियां एआई को किसी नई योजना के रूप में नहीं, बल्कि अपने पुराने सॉफ्टवेयर देने वाली कंपनियों के जरिए ही अपनाएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक एआई से होने वाले लाभ का सही अनुमान नहीं लग जाता, तब तक कंपनियां इसे बड़े स्तर पर लागू नहीं कर पाएंगी।
एक अन्य हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2030 तक दुनिया में एआई की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल करीब 2 ट्रिलियन डॉलर की आमदनी चाहिए होगी, ताकि कंप्यूटिंग शक्ति का खर्च उठाया जा सके।
हालांकि, एआई से होने वाली बचत के बावजूद भी दुनिया को अभी करीब 800 अरब डॉलर की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक एआई के लिए जरूरी बिजली की मांग 200 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसमें से आधी बिजली की जरूरत अमेरिका में होगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे कंप्यूटर की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे बड़ी कंपनियां अब एआई को केवल प्रयोग के तौर पर नहीं, बल्कि मुनाफा कमाने के लिए इस्तेमाल करने लगी हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में कई कंपनियों ने एआई को अपने मुख्य कामकाज में अपनाकर 10 से 25 प्रतिशत तक मुनाफा बढ़ाया है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गर्म या ठंडा पानी, जानिए कौन सा सर्दियों में चेहरे के लिए सही?
मुंबई, 15 जनवरी (आईएएनएस)। सर्दियों में अक्सर लोगों के मन में ये सवाल जरूर होता है कि अपने चेहरे को किस पानी से धोएं, गर्म या फिर ठंडे पानी से। सुबह का समय हमारी त्वचा के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। नींद के दौरान त्वचा खुद को रीचार्ज करती है और दिन की शुरुआत सही तरीके से करने से त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है।
आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि पानी का तापमान हमारी त्वचा के पोर्स, तेल और नमी पर सीधा असर डालता है, इसलिए सर्दियों में चेहरे को धोने का सही तरीका जानना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले बात करते हैं गर्म पानी की। शुरुआत में यह ताजगी और आराम देने वाला लगता है, लेकिन अगर बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल चेहरा धोने के लिए करते हैं, तो यह त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
आयुर्वेद में बताया गया है कि बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक तैलीय परत को हटा देता है, जिससे त्वचा रूखी और लाल होने लगती है। विज्ञान के अनुसार, गर्म पानी त्वचा के ऊपर मौजूद नेचुरल बैरियर सेबम को खत्म कर देता है, जो त्वचा को नमी और संक्रमण से बचाता है। लगातार गर्म पानी का इस्तेमाल करने से चेहरे पर खुजली, रूखापन और कभी-कभी मुंहासे जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए, चाहे ठंडा मौसम हो या गर्म, अत्यधिक गर्म पानी से चेहरे को धोना ठीक नहीं है।
अब बात करें ठंडे पानी की, तो ठंडा पानी चेहरे को तरोताजा महसूस कराता है। आयुर्वेद के अनुसार, ठंडा पानी वात दोष को संतुलित करता है और स्किन में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाकर ताजगी देता है। यह सूजन और लालिमा को कम करने में मदद करता है और चेहरे की पोर्स को अस्थायी रूप से सिकोड़ देता है। लेकिन विज्ञान बताता है कि सिर्फ ठंडे पानी से त्वचा की गहरी सफाई पूरी तरह नहीं होती, क्योंकि ठंडा पानी तेल और गंदगी को पूरी तरह हटाने में कम असरदार होता है। लगातार ठंडे पानी का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है, इसलिए इसे मुख्य सफाई के लिए इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
सर्दियों में सबसे अच्छा तरीका है गुनगुने पानी का इस्तेमाल। आयुर्वेद इसे संतुलित और सौम्य पानी मानता है, जो त्वचा को नुकसान पहुंचाए बिना साफ करता है। गुनगुना पानी चेहरे की गंदगी, तेल और पसीने को धीरे-धीरे हटा देता है और स्किन के नेचुरल ऑयल को बरकरार रखता है। विज्ञान के अनुसार, गुनगुना पानी पोर्स को खोलकर गंदगी और डेड स्किन को बाहर निकालता है, जिससे त्वचा नरम, ताजा और चमकदार बनती है। साथ ही, यह स्किन को ड्राई या इरिटेट होने से बचाता है।
एक और तरीका है बर्फ या आइस वाटर का। यह त्वचा को तुरंत ताज़गी देने वाला लगता है और रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर सूजन और लालिमा को कम करता है। आयुर्वेद के हिसाब से यह वात को शांत करता है और चेहरे को ठंडक पहुंचाता है। हालांकि, लंबे समय तक आइस वाटर का इस्तेमाल करने से त्वचा की नमी कम हो सकती है और यह रूखी बन सकती है, इसलिए बर्फ के पानी का इस्तेमाल हमेशा सावधानी के साथ करना चाहिए। वहीं, चेहरा धोने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए।
--आईएएनएस
पीके/एबीएम
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