प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर वैश्विक दक्षिण के हितों की पुरजोर वकालत कर रहा है, और वैश्विक एजेंडा के केंद्र में इस क्षेत्र की चिंताओं को लगातार प्राथमिकता देने के अपने दृष्टिकोण को रेखांकित किया। संसद भवन में राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी), 2026 में अपने संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री ने वैश्विक दक्षिण के एजेंडे को आगे बढ़ाने में भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उसके नवाचारों से पूरे वैश्विक दक्षिण और राष्ट्रमंडल देशों को लाभ मिले, और साथ ही सहयोगी देशों के लिए ओपन-सोर्स प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है ताकि वे भारत में लागू की जा रही प्रणालियों के समान प्रणालियाँ विकसित कर सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर वैश्विक दक्षिण के हितों की पुरजोर वकालत कर रहा है। जी20 की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने वैश्विक एजेंडा के केंद्र में वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को रखा है। भारत का निरंतर प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि हम जो भी नवाचार करें, उससे पूरे वैश्विक दक्षिण और राष्ट्रमंडल देशों को लाभ मिले। हम ओपन-सोर्स तकनीकी प्लेटफॉर्म भी बना रहे हैं ताकि वैश्विक दक्षिण में हमारे सहयोगी देश भी भारत जैसी प्रणालियाँ विकसित कर सकें। प्रधानमंत्री ने भारतीय लोकतंत्र के समावेशी स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि इसकी पहचान अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता से होती है।
जन कल्याण की भावना से प्रेरित होकर, हम समावेशी रूप से काम कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी पीछे न छूटे। इसी प्रतिबद्धता के कारण भारत ने हाल के वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। भारत में लोकतंत्र वास्तव में परिणाम देता है। भारत में लोकतंत्र का अर्थ है अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाना। उन्होंने आगे कहा, हम बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। और जन कल्याण की इसी भावना के कारण पिछले कुछ वर्षों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
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क्या एक पुरुष गर्भवती हो सकता है? इस सवाल को लेकर एक अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर और भारतीय मूल की डॉक्टर के बीच में जमकर बहस हो गई। दरअसल, डर्कसेन सीनेट कार्यालय भवन में महिलाओं की सुरक्षा: रासायनिक गर्भपात दवाओं के खतरों को उजागर करना शीर्षक वाली समिति की सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन अमेरिकी सीनेटर जोश हॉली और भारतीय अमेरिकी प्रसूति-स्त्री रोग विशेषज्ञ (OB-GYN) डॉ. निशा वर्मा के बीच एक बहस छिड़ गई। प्रजनन स्वास्थ्य के लिए चिकित्सकों की वरिष्ठ सलाहकार एर्मा को सीनेट समिति द्वारा सुनवाई के लिए बुलाया गया था, जहां उन्होंने गर्भपात की दवाओं पर प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने सांसदों से कहा दवाओं द्वारा गर्भपात का गहन अध्ययन किया गया है और 100 से अधिक उच्च-स्तरीय पीयर-रिव्यूड अध्ययनों में रिसर्च हो चुकी है और यह सुरक्षित व प्रभावी साबित हुई है।
सुनवाई के दौरान माहौल उस वक्त गर्मा गया जब रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली ने डॉ वर्मा से सीधा सवाल पूछा, क्या पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं? वर्मा हिचकिचाईं और जवाब दिया कि वह विभिन्न लैंगिक पहचान वाले मरीजों का इलाज करती हैं। उन्होंने हां या ना में जवाब देने से बचते हुए कहा, मैं उन लोगों की भी देखभाल करती हूं जो खुद को महिला के रूप में नहीं पहचानते। हॉली ने बार-बार उनसे सीधे जवाब देने का आग्रह किया और जोर देकर कहा कि यह प्रश्न राजनीति के बजाय जीव विज्ञान से संबंधित है।
प्रजनन स्वास्थ्य सलाहकार और फिजिशियंस फॉर रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी एक वरिष्ठ हस्ती डॉ. वर्मा ने अपने शुरुआती भाषण में दवाइयों से होने वाले गर्भपात का बचाव किया। उन्होंने सांसदों को बताया कि इन दवाइयों पर व्यापक शोध किया गया है और दशकों से इन्हें सुरक्षित रूप से निर्धारित किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक कारणों से लगाए गए प्रतिबंध मरीजों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा लक्ष्य एक जैविक वास्तविकता स्थापित करना है। यह विज्ञान और प्रमाणों के बारे में है और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह एक चिकित्सा पेशेवर के रूप में उनकी विश्वसनीयता का परीक्षण कर रहे थे।
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