सबसे ज्यादा कमाई करने वाले प्रधानमंत्री बने वोंग: मिलेगी ₹27 करोड़ सैलरी, अमेरिका-भारत समेत बड़े नेताओं से कई गुना ज्यादा
Singapore PM Salary: सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की सैलरी को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। सरकार ने प्रधानमंत्री, उप-प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इसके बाद वोंग की सालाना सैलरी 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़कर 3.6 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब ₹27 करोड़ हो जाएगी। इस बढ़ोतरी के बाद सिंगापुर के प्रधानमंत्री की कमाई दुनिया के कई प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों से काफी अधिक हो जाएगी।
15 साल बाद सिंगापुर के नेताओं की सैलरी में बदलाव
सिंगापुर सरकार ने करीब 15 साल बाद राजनीतिक नेतृत्व के वेतन ढांचे में बदलाव किया है। सरकार का कहना है कि प्रतिस्पर्धी वेतन के जरिए योग्य और अनुभवी लोगों को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। सरकार इसे बेहतर प्रशासन और प्रतिभाशाली नेतृत्व को बनाए रखने से भी जोड़कर देखती है।
हालांकि, सिंगापुर में नेताओं की सैलरी का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि मंत्रियों और आम नागरिकों की आय के बीच काफी बड़ा अंतर है।
₹27 करोड़ होगी लॉरेंस वोंग की सालाना सैलरी
नई व्यवस्था के बाद प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग का सालाना वेतन 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़कर 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर हो जाएगा। यानी उनकी सालाना कमाई में करीब 1.4 मिलियन सिंगापुर डॉलर की बढ़ोतरी होगी।
भारतीय मुद्रा में मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से यह रकम लगभग ₹27 करोड़ सालाना बैठती है। वास्तविक भारतीय रुपये की राशि विनिमय दर में बदलाव के साथ बदल सकती है।
वोंग ने यह भी कहा है कि उनके कार्यकाल के दौरान वेतन में हुई बढ़ोतरी की पूरी अतिरिक्त राशि को वह अच्छे कामों के लिए दान करने की योजना बना रहे हैं।
उप-प्रधानमंत्री और मंत्रियों की सैलरी भी बढ़ेगी
सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के वेतन में भी बदलाव किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत:
उप-प्रधानमंत्री: सालाना वेतन 1.87 मिलियन से बढ़कर 3.06 मिलियन सिंगापुर डॉलर।
कैबिनेट मंत्री: वरिष्ठता और जिम्मेदारियों के आधार पर करीब 1.80 से 2.88 मिलियन सिंगापुर डॉलर सालाना।
प्रधानमंत्री: सालाना वेतन 2.2 मिलियन से बढ़कर 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर।
हालांकि, मौजूदा नेताओं को तत्काल पूरी नई वेतन संरचना पर नहीं लाया जाएगा। उन्हें 15 अक्टूबर से अधिकतम 9 प्रतिशत तक का एकमुश्त एडजस्टमेंट मिल सकता है। यह व्यक्तिगत परिस्थितियों और प्रदर्शन जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
ट्रंप और मोदी से कितनी ज्यादा है वोंग की सैलरी?
सिंगापुर के प्रधानमंत्री की सैलरी बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेताओं के वेतन की तुलना भी चर्चा में है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वेतन और विनिमय दरों के आधार पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करीब ₹3.4 करोड़ सालाना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करीब ₹24 लाख सालाना वेतन मिलता है।
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री और जापान के प्रधानमंत्री की सालाना सरकारी सैलरी भी वोंग के प्रस्तावित वेतन से काफी कम बताई गई है।
हालांकि, अलग-अलग देशों में वेतन, भत्ते, सुविधाओं और आधिकारिक भुगतान की संरचना अलग होती है। इसलिए केवल बेस सैलरी के आधार पर की गई अंतरराष्ट्रीय तुलना को पूरी तस्वीर नहीं माना जा सकता।
'राजनेताओं की सैलरी भावनात्मक मुद्दा'
वोंग ने खुद माना कि राजनीतिक नेताओं की सैलरी का विषय आसान नहीं है। उनका कहना है कि इसमें शामिल रकम आम नागरिकों की आय की तुलना में काफी ज्यादा है, इसलिए लोगों का इस मुद्दे पर सवाल उठाना और अलग-अलग राय रखना स्वाभाविक है।
सिंगापुर में उनकी People's Action Party (PAP) लंबे समय से सत्ता में है। सरकार का तर्क है कि नेताओं के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन तय करने से भ्रष्टाचार के जोखिम को कम करने और सक्षम लोगों को सार्वजनिक जीवन में आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
स्वतंत्र कमेटी की सिफारिश पर बढ़ाई गई सैलरी
लॉरेंस वोंग के अनुसार वेतन बढ़ाने की सिफारिश एक स्वतंत्र कमेटी ने की थी। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत भविष्य में वेतन में बदलाव नेताओं की जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत प्रदर्शन को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
सिंगापुर लंबे समय से अपने अपेक्षाकृत कम भ्रष्टाचार स्तर और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है। ऐसे में नेताओं की सैलरी बढ़ाने का फैसला एक तरफ बेहतर प्रतिभाओं को राजनीति में लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ आम लोगों के बीच यह बहस भी पैदा कर सकता है कि सार्वजनिक पदों पर इतनी ऊंची सैलरी कितनी उचित है।
US-Iran Conflict: अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर किया हमला; जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से चला आ रहा तनाव अब सीधे सैन्य टकरावों और मिसाइल हमलों में बदल चुका है। अमेरिकी युद्धपोतों पर ईरानी हमलों के प्रयासों के बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े 5 प्रमुख तेल टैंकरों पर एयरस्ट्राइक कर दी।
इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी तीखा पलटवार किया और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों व सहयोगी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
Iran's missile blitz on US bases in MIddle East — what we know so far
— Sputnik (@SputnikInt) September 8, 2026
Iran launched a massive retaliation after the US struck 5 Iranian tankers. Here's the latest:
???? IRGC says it targeted areas where F-35, F-16, F-15 fighter jets are stationed and serviced at US bases
????… pic.twitter.com/Q4jryS8KZj
अमेरिकी का बड़ा एक्शन: ओमान की खाड़ी और खार्ग द्वीप पर 5 ईरानी टैंकर तबाह
CENTCOM के आधिकारिक बयान के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने ओमान की खाड़ी में स्थित 4 टैंकरों (M/T Kaviz, M/T Charminar, M/T Horizon 1, M/T Riesco) और ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप के पास खड़े M/T Derya नामक टैंकर पर भीषण हमला किया।
CENTCOM forces destroyed five Iranian crude oil carriers, Sept. 8, after the Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) targeted a U.S. Navy warship with ballistic missiles twice over the past two days. The U.S. warship successfully evaded the attempted Iranian attacks and… pic.twitter.com/Gi8a2tloN1
— U.S. Central Command (@CENTCOM) September 8, 2026
अमेरिकी सेना ने बताया कि हमलों से ठीक पहले जहाजों के चालक दल को जहाज खाली करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था, ताकि कोई जनहानि न हो। इसके बाद मिसाइलें दागकर पांचों टैंकरों को पूरी तरह से जलकर नष्ट और बेकार कर दिया गया।
अमेरिका का दावा: अरबों डॉलर का 'शैडो नेटवर्क' और नौसैनिक हमलों का जवाब
अमेरिकी सैन्य कमान (CENTCOM) का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइलों से किए गए दो नाकाम हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिकी युद्धपोत ने दोनों ईरानी मिसाइलों को चकमा देकर खुद को सुरक्षित बचा लिया था।
CENTCOM ने दावा किया कि जिन 5 टैंकरों को नष्ट किया गया है, वे ईरान के उस बहु-अरब डॉलर वाले 'शैडो नेटवर्क' का हिस्सा थे, जिससे IRGC और उसके क्षेत्रीय नेटवर्क को फंडिंग मिलती थी।
ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर पलटवार: दागीं 20 बैलिस्टिक मिसाइलें
अपने तेल टैंकरों पर हुए हमले से बौखलाए ईरान ने कुछ ही घंटों के भीतर जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाकर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। जॉर्डन के सशस्त्र बलों और एयर डिफेंस सिस्टम ने तत्परता दिखाते हुए 18 मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट करके मार गिराया। वहीं, बची हुई 2 मिसाइलें गैर-आबादी वाले इलाकों में जाकर गिरीं। इस हमले में किसी भी अमेरिकी या जॉर्डन के सैनिक की मौत की खबर नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट में 10 जहाजों पर दावों की जंग और अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन का कब्जा
ईरानी सेना (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में प्रतिबंधित जलमार्ग का उपयोग कर रहे 2 अमेरिकी जहाजों और 8 तेल टैंकरों समेत कुल 10 जहाजों को निशाना बनाया है। इसके साथ ही, IRGC ने होर्मुज क्षेत्र से एक अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन को कब्जे में लेने का दावा करते हुए उसकी तस्वीरें जारी की हैं।
जांच में यह ड्रोन अमेरिकी रक्षा कंपनी एंड्यूरिल के 'Dive-LD' मॉडल जैसा दिखाई दे रहा है। ईरान ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों में लंगर डाले अमेरिकी जहाजों को भी तत्काल खाली करने की सख्त चेतावनी दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की सख्त चेतावनी और खार्ग द्वीप का आर्थिक संकट
कोलंबिया दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, "ईरान जब भी हमारे नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश करेगा, उसे भारी आर्थिक कीमत चुकानी होगी और अपने तेल टैंकर गंवाने पड़ेंगे।"
विश्लेषकों का मानना है कि खार्ग द्वीप के पास टैंकरों को निशाना बनाकर अमेरिका ने ईरान की आर्थिक रीढ़ पर सीधा हमला किया है। 5 सितंबर को 3 टैंकरों की तबाही के बाद अब 5 और टैंकर गंवाने से दोनों देश भीषण महायुद्ध की दहलीज पर आ खड़े हुए हैं।
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