Barack Obama: 'अनियंत्रित एआई मानवता के लिए बड़ा खतरा', पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की चेतावनी
Barack Obama on Artificial Intelligence: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनियंत्रित विस्तार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ओबामा ने स्पष्ट किया है कि यदि इस अत्याधुनिक तकनीक का सही ढंग से प्रबंधन और नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह भविष्य में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
एक निजी फंडरेजिंग कार्यक्रम के दौरान सामने आए ये बयान ऐसे वक्त पर आए हैं जब अमेरिकी सांसदों की ओर से एआई सिस्टम पर कड़े नियम लागू करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। यह सुगबुगाहट एंथ्रोपिक के दो शोधकर्ताओं द्वारा दी गई उस चेतावनी के बाद और तेज हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस तकनीक की बेलगाम प्रगति मानव जाति के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है।
निजी हाथों में तेजी से आगे बढ़ रही तकनीक पर नियंत्रण जरूरी
अखबार के अनुसार, ओबामा ने अपने एक बयान में कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जो निजी क्षेत्र के हाथों में बहुत तेजी से विकसित हो रहा है और यदि इस पर उचित नियंत्रण नहीं रखा गया, तो यह स्थिति को बिगाड़ सकता है। उनके कार्यालय से प्राप्त टिप्पणियों के अंशों के हवाले से यह भी सामने आया है कि उन्होंने हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज को विशेष सलाह दी है। ओबामा ने कहा कि यदि आगामी 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करते हैं, तो उन्हें एआई नीति को लेकर एक स्पष्ट सार्वजनिक चर्चा का ढांचा तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
राजनीतिक एजेंडे में शामिल हो एआई सुरक्षा और आर्थिक मुद्दे
अपनी इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, पूर्व राष्ट्रपति ने साल 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल होने वाले संभावित उम्मीदवारों से भी आग्रह किया है कि वे एआई को अपने प्रमुख चुनावी एजेंडे में शामिल करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उम्मीदवारों के पास इस तकनीक से जुड़े सुरक्षा खतरों और आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए एक ठोस व स्पष्ट कार्ययोजना होनी चाहिए। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें एआई एजेंटों के बाहरी सिस्टम को हैक करने और सुरक्षा शोधकर्ताओं द्वारा जोखिमों के चलते अपनी कंपनियां छोड़ने जैसी घटनाओं ने मानव जाति के विनाश की चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
एआई कंपनियों के प्रमुखों ने भी धीमी की गति की वकालत
इस बीच, उद्योग जगत के दिग्गजों ने भी इन चिंताओं पर अपनी मुहर लगाई है। एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने एआई के संभावित दुरुपयोग के मद्देनजर कंपनियों से मॉडल क्षमताओं पर काम की रफ्तार कुछ धीमी करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस बात पर ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एक्सएआई (xAI) का संचालन करने वाले दिग्गज उद्यमी एलन मस्क ने भी अपनी सहमति जताई है, जिससे तकनीकी जगत में सुरक्षा मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है।
CIA Briefs Bin Laden Target List: CIA ने सार्वजनिक किए 70 से ज्यादा सीक्रेट दस्तावेज, ओसामा की हिट लिस्ट में था भारत
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) द्वारा सार्वजनिक किए गए लगभग 70 से अधिक प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ (PDB) दस्तावेजों ने 9/11 हमलों से पहले की वैश्विक सुरक्षा स्थिति की परतें खोल दी हैं।
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सौंपे गए इन अति-गोपनीय दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि अल-कायदा का नेटवर्क अमेरिका ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों को अपने निशाने पर लेने की योजना बना रहा था।
28 अगस्त 1998 का दस्तावेज: भारत था हिट लिस्ट में
सीआईए द्वारा 28 अगस्त 1998 को तैयार किए गए एक खुफिया दस्तावेज (शीर्षक: "Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat") में विशेष रूप से भारत का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, लादेन का नेटवर्क केवल पश्चिमी देशों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि भारत में भी बड़े हमलों को अंजाम देने की फिराक में था।
हालांकि, इस दस्तावेज में किसी विशिष्ट स्थान या ऑपरेशन की तारीख का विस्तृत ब्योरा नहीं था, लेकिन लादेन की मंशा और भारत के प्रति उसके खतरे को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया था।
— Abhishek Yadav (@iabhiy) September 13, 2026
भारत के अलावा इन देशों पर भी थी अल-कायदा की नजर
खुफिया ब्रीफिंग में खुलासा किया गया है कि बिन लादेन भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, सऊदी अरब, कुवैत, मिस्र, यमन, युगांडा और नाइजीरिया में भी अमेरिकी ठिकानों या स्थानीय सरकारों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था।
सीआईए ने अमेरिकी नेतृत्व को आगाह किया था कि अल-कायदा का बुनियादी ढांचा तेजी से फैल रहा है और वह अपरंपरागत हथियारों को हासिल करने का प्रयास कर रहा है।
9/11 की 25वीं बरसी पर सार्वजनिक हुए 100 से ज्यादा पन्ने
वर्ष 2001 के भयानक हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर सीआईए ने 100 से अधिक पन्नों के ऐतिहासिक दस्तावेजों को डीक्लासिफाइड किया है। इन फाइलों से पता चलता है कि 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही अमेरिकी खुफिया समुदाय को अल-कायदा की गतिविधियों, उसके फंडिंग नेटवर्क और वैश्विक खतरे के बारे में लगातार जानकारियां मिल रही थीं।
दक्षिण एशियाई सुरक्षा परिदृश्य पर पड़ा था असर
विशेषज्ञों का मानना है कि 1998 के आसपास लादेन द्वारा भारत को निशाना बनाने की बात सामने आना इस बात की पुष्टि करता है कि अल-कायदा उस दौर में जम्मू-कश्मीर और भारतीय उपमहाद्वीप में मौजूद अन्य चरमपंथी संगठनों के साथ संपर्क साधने की कोशिश कर रहा था। सीआईए की इस रिपोर्ट से साबित होता है कि 9/11 से बहुत पहले ही भारत वैश्विक इस्लामी आतंकवाद की हिट लिस्ट में शामिल हो चुका था।
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