Climate Change से निपटने को सुव्यवस्थित नीतियां जरूरी: राष्ट्रपति Droupadi Murmu
(तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, 20 सितंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन की जटिल चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकारों, कानूनी विशेषज्ञों और प्रभावित समुदायों को शामिल करते हुए नीतियों और कार्यों का एक सुव्यवस्थित ढांचा जरूरी है। ‘पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस ढांचे में जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
साथ ही ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों, छोटे किसानों, महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों की जरूरतों के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन मानव अस्तित्व के कई स्तरों पर असंतुलन पैदा करता है। जैव विविधता का नुकसान, जल संकट और भूमि क्षरण जैसे मुद्दे इससे गहराई से जुड़े हुए हैं।
इसका खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।’’ उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणालियां, स्थानीय समुदायों की प्रथाएं और उनके वास्तविक अनुभव जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने की क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन उपायों के जरिए जलवायु के प्रति अनुकूलता को मजबूत करना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि टिकाऊ वनीकरण भी जलवायु अनुकूलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मुर्मू ने कहा कि जैव विविधता को बढ़ावा देने वाले और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप किए जाने वाले वनीकरण के प्रयास इस दिशा में अहम साबित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘टिकाऊ वनीकरण का वास्तविक उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि स्वस्थ और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से बहाल करना है।’’ अपने बचपन का एक उदाहरण देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने याद किया कि कैसे उनके पिता घर में खाना पकाने के लिए पास के जंगल से सूखी लकड़ी लाते थे और उसे काटने से पहले सम्मानपूर्वक सिर झुकाकर क्षमा मांगते थे। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने अपने पिता से पूछा कि लकड़ी काटने से पहले वह प्रार्थना क्यों करते हैं। इस पर उनके पिता ने कहा था कि यह लकड़ी कभी उस पेड़ का हिस्सा थी, जो फल, फूल, हवा और पानी देता था।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि लकड़ी के तने सूख गए हैं, लेकिन अब भी उनकी मदद कर रहे हैं। इस पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने याद किया कि खेत में जुताई करने से पहले उनके पिता धरती के सामने भी सिर झुकाते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अक्सर पूछती थी, आप खेत जोतने से पहले प्रार्थना क्यों करते हैं? इस पर वह कहते थे कि धरती हमारी मां है। हम जो कुछ भी पैदा करते हैं, जो भी उपज प्राप्त करते हैं, वह धरती की वजह से ही संभव है।’’ राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विनम्रता की यह भावना भारतीय संस्कृति में गहराई से समाई हुई है और यह मानवता तथा प्रकृति के बीच मूलभूत संबंधों की समझ को दर्शाती है।
उन्होंने पेड़ों की पत्तियों और लकड़ियों को बेचने के कारोबार को रोकने का भी आह्वान किया और कहा कि पौधे लोगों को जीवन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप हर साल पत्तियां तोड़ते रहेंगे तो कोई पौधा पेड़ कैसे बनेगा? वह कैसे जीवित रह पाएगा?’’ उन्होंने कहा कि अगर लोग खुद में बदलाव लाएंगे, तो धरती भी उसी के अनुसार बदल जाएगी।
सपा सत्ता में आई तो Remote Sensing से होगी विकास दुबे एनकाउंटर की जांच: Akhilesh Yadav
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे से जुड़ी कथित मुठभेड़ की तरफ इशारा करते हुए तंज किया कि उनकी पार्टी अगर उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आती है तो वह रिमोट सेंसिंग विभाग (दूर संवेदी विभाग) से कार पलटने वाली घटना की जांच कराएंगे। कानपुर देहात के बिकरू इलाके में दो-तीन जुलाई 2020 की रात को आठ पुलिसकर्मियों की घात लगाकर छत से गोलियां चलाते हुए हत्या किये जाने की वारदात के मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे की 10 जुलाई को उज्जैन से कानपुर लाते समय पुलिस की गाड़ी कथित रूप से दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गयी थी और पुलिस का दावा है कि हादसे के बाद भागने की कोशिश में दुबे पुलिस से हुई मुठभेड़ में मारा गया था। सपा प्रमुख ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रिमोट सेंसिंग के साथ-साथ सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से किसानों के फायदे के लिए और साथ ही स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि के क्षेत्रों में किया जाएगा।
यादव ने किसी का नाम लिये बगैर गैंगस्टर विकास दुबे की कथित मुठभेड़ में हुई मौत की ओर इशारा करते हुए कहा, रिमोट सेंसिंग विभाग एक बहुत पुराना विभाग है। हम निश्चित रूप से इस विभाग को उस घटना की जांच का काम सौंपेंगे कि आखिर गाड़ी कैसे पलटी थी। उन्होंने कहा, हम उन्हें अलग से फंड देंगे... चाहे वह 50 करोड़ रुपये हो या 100 करोड़ रुपये... और उन्हें उन गाड़ियों की आवाजाही का पता लगाने का निर्देश देंगे कि वे कहां से चली थी और उस जगह तक कैसे पहुंचीं?
इसके अलावा, हम अपराध से निपटने के लिए रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करेंगे, जिससे फर्जी एनकाउंटर जैसी घटनाओं पर भी रोशनी डालने में मदद मिलेगी। सपा प्रमुख ने गैंगस्टर विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कार पलटी नहीं थी, बल्कि यह सरकार को गिरने से बचाने की कोशिश थी ताकि सच सामने न आए।
पुलिस ने दावा किया था कि उज्जैन से कानपुर ले जाई जा रही पुलिस की गाड़ी के 10 जुलाई को दुर्घटनाग्रस्त होने और विकास दुबे के मौके से भागने की कोशिश करने के बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया था।
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