खबर हटके- चुनावी वादे के लिए 500 कुत्तों की मौत:पालक पनीर के लिए अमेरिका में झगड़ा; बच्चों के लिए ₹1 में हवाई यात्रा शुरू
सड़क से कुत्ते हटाने का चुनावी वादा करने वाले एक नेता ने जीतते ही 500 कुत्तों को जहर देकर मरवा दिया। वहीं अमेरिका में पनीर को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। इधर बच्चों को 1 रुपए में हवाई यात्रा करने का मौका मिल रहा है। तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… ************* रिसर्च सहयोग: किशन कुमार खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
पेरेंटिंग- परीक्षा में बेटे के मार्क्स अच्छे नहीं:कहीं उसका IQ कमजोर तो नहीं, कैसे पता लगाएं, क्या IQ टेस्ट कराना ठीक है
सवाल- मैं बैंगलोर से हूं। मेरा 12 साल का बेटा क्लास 6 में है। मैथ और साइंस में उसके बहुत मार्क्स बहुत कम आते हैं। मेरे दोस्तों ने सुझाया कि बच्चे का IQ टेस्ट कराओ, ताकि पता चले कि उसके इंटेलिजेंस का लेवल क्या है। लेकिन मुझे डर है कि इस टेस्ट से उसका कॉन्फिडेंस कम न हो जाए। क्या बच्चों का IQ टेस्ट कराना चाहिए? क्या इससे सचमुच फायदा होगा? बिना प्रेशर डाले बच्चे को पढ़ाई के लिए कैसे प्रेरित करें? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- मैं आपकी इस दुविधा को पूरी तरह समझ सकती हूं। बतौर पेरेंट बच्चे के स्कूल मार्क्स देखकर चिंता होना बिल्कुल स्वाभाविक है। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 12 साल की उम्र में एवरेज मार्क्स आना कोई असामान्य बात नहीं है। इस उम्र में बच्चे सीखने की प्रक्रिया में होते हैं और मैथ व साइंस जैसे विषयों में परेशानी बहुत आम है। हालांकि सही मार्गदर्शन, धैर्य और सपोर्ट मिलने पर यही बच्चे आगे चलकर बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। बच्चे के कम मार्क्स के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। जैसेकि- इसलिए केवल एवरेज मार्क्स के आधार पर बच्चे को जज करना या उस पर दबाव बनाना सही नहीं है। इसके अलावा हो सकता है कि आपका बेटा अन्य विषयों या किसी दूसरे क्षेत्रों में बहुत अच्छा हो। कई बच्चे म्यूजिक, पेंटिंग, खेल या किसी क्रिएटिव फील्ड में कमाल करते हैं। इसलिए सबसे पहले बच्चे की रुचियों और उसकी क्षमताओं को समझने की कोशिश कीजिए। अक्सर माता-पिता यही गलती करते हैं। वे बच्चों को अपनी इच्छानुसार डॉक्टर, इंजीनियर और IAS वगैरह बनाना चाहते हैं। इस कोशिश में वे बच्चे की रुचियों, क्षमताओं और स्वभाव को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि पढ़ाई के शुरुआती दौर में बच्चे को दिशा देने से ज्यादा, उन्हें समझने और भावनात्मक रूप से सपोर्ट करने की जरूरत होती है। बच्चे जैसे हैं, उन्हें वैसे ही स्वीकार करना पेरेंटिंग की पहली सीढ़ी है। हर बच्चे की अपनी एक पहचान होती है और अपनी खास रुचियां होती हैं। पेरेंटिंग का मतलब उसे किसी तय ढांचे में ढालना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उन्हें निखरने का मौका देना है। इसी सोच के साथ आगे बढ़िए और पेरेंटिंग की कुछ प्राइमरी जिम्मेदारियों पर ध्यान दीजिए। अब आते हैं IQ टेस्ट यानी ‘इंटेलिजेंस कोशेंट’ टेस्ट के सवाल पर कि ये क्या है, कैसे काम करता है, कब जरूरी है और अगर स्कोर कम आए तो क्या करें? तो चलिए, स्टेप-बाय-स्टेप इसे समझते हैं। इंटेलिजेंस क्या है? इंटेलिजेंस वह क्षमता है, जिससे बच्चा सोचता-समझता है, समस्या का समाधान करता है और नए हालात में खुद को ढालता है। कोई बच्चा पढ़ाई में तेज होता है, कोई खेल में, कोई म्यूजिक या आर्ट में, तो कोई लोगों को समझने और उनसे जुड़ने में। हर बच्चे की इंटेलिजेंस अलग होती है। उसे सिर्फ किताबों और मार्क्स से नहीं मापा जा सकता है। यह बहुत सारी क्षमताओं का मेल है। जैसेकि- IQ टेस्ट क्या है? IQ टेस्ट यानी ’इंटेलिजेंस कोशेंट’ टेस्ट से बच्चे की सोचने-समझने, तर्क करने और समस्या सुलझाने की क्षमता का पता लगाया जाता है। यह टेस्ट मुख्य रूप से लॉजिकल थिंकिंग, मैथमैटिकल अंडरस्टैंडिंग, मेमोरी और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को मापता है। हालांकि IQ टेस्ट में इमोशनल इंटेलिजेंस, क्रिएटिविटी, सोशल स्किल्स और टैलेंट जैसे कई पहलू नहीं शामिल होते हैं। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) के मुताबिक, IQ टेस्ट इंटेलिजेंस के सिर्फ कुछ हिस्सों को ही मापता है। यह बच्चे के आसपास के वातावरण, सीखने की प्रक्रिया और पहले से मिली जानकारी से प्रभावित होता है। IQ टेस्ट क्या मापता है? IQ टेस्ट की शुरुआत वर्ष 1905 में फ्रांस के साइकोलॉजिस्ट अल्फ्रेड बिने और थियोडोर साइमन ने की थी। इसका मकसद बच्चों की स्कूल रेडिनेस जांचना था। यानी बच्चा सीखने के लिए कितना तैयार है। समय के साथ यह साफ हुआ कि IQ स्कोर कई बातों से प्रभावित होता है। जैसे बच्चे का माहौल, भाषा, एक्सपोजर और उस दिन का मूड। इसलिए IQ को बच्चे की स्मार्टनेस का पूरा पैमाना मानना सही नहीं है। एक अच्छा स्टैंडर्डाइज्ड IQ टेस्ट बच्चे की कई क्षमताओं को परखता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- IQ टेस्ट कब कराना चाहिए? IQ टेस्ट हर बच्चे के लिए जरूरी नहीं है। अगर बच्चा सिर्फ एवरेज नंबर लाता है, फोकस में दिक्कत है या उसे मैथ मुश्किल लगती है तो IQ टेस्ट की जरूरत नहीं है। हालांकि कुछ स्थितियों में IQ टेस्ट कराना सही माना जाता है। भारत में कुछ IQ टेस्ट किए जाते हैं, जो भारतीय बच्चों और उनके माहौल को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। ध्यान रखें, ऑनलाइन IQ टेस्ट भरोसेमंद नहीं होते हैं। टेस्ट का सही और सटीक मूल्यांकन हमेशा प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट द्वारा ही किया जाना चाहिए। IQ स्कोर कैसे समझें? IQ स्कोर को एक इंडिकेटर की तरह समझना चाहिए, जजमेंट की तरह नहीं। यह बताता है कि बच्चा सोचने-समझने, तर्क करने और कुछ खास तरह की जानकारी को कितनी तेजी से प्रोसेस करता है। लेकिन यह नहीं बताता कि बच्चा कितना क्रिएटिव है या किस फील्ड में बेहतर कर सकता है। इसलिए IQ स्कोर को सिर्फ बच्चे की प्रोफाइल के एक हिस्से की तरह देखना चाहिए। नीचे दिए ग्राफिक से IQ स्कोर इंटरप्रिटेशन समझिए- IQ स्कोर लो आए तो क्या करें? अगर बच्चे का IQ स्कोर थोड़ा कम आए तो इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चा कमजोर है। यह बस यह बताता है कि उसे किस क्षेत्र में सपोर्ट की जरूरत है। हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन की एक रिसर्च के मुताबिक, पॉजिटिव रीइनफोर्समेंट से बच्चों की परफॉर्मेंस लगभग 25% तक बेहतर होती है। वहीं ज्यादा प्रेशर और स्ट्रेस उनके सीखने की प्रक्रिया को ब्लॉक कर देता है। इसलिए बच्चों के साथ धैर्य, समझ और प्रोत्साहन बेहद जरूरी है। इसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखें। अंत में यही कहूंगी कि आपका बेटा 12 साल का है। इस उम्र में अगर पेरेंट्स का सही सपोर्ट मिले तो बच्चे बहुत तेजी से सीखते हैं। अगर वह हेल्दी है, सामान्य तरीके से सीख रहा है तो IQ टेस्ट की कोई जरूरी नहीं है। आपका लक्ष्य बच्चे को स्मार्ट साबित करना नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से सीखने में मदद करना होना चाहिए। ........................ पेरेंटिंग से जुड़ी ये स्टोरी भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा पॉकेट मनी मांगता है: क्योंकि उसके दोस्तों को मिलती है, क्या इतने छोटे बच्चे को पैसे देना ठीक है? जब बच्चा अपने दोस्तों को पॉकेट मनी लाते हुए देखता है तो तुलना करना स्वाभाविक है। ऐसे में उसे डांटें नहीं, बल्कि समझाएं कि हर परिवार के नियम, जरूरतें और आर्थिक स्थिति अलग होती है। पूरी खबर पढ़िए...
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