ट्रंप ने अमेरिकी सेना को तैयार रहने के लिए कह दिया है। क्योंकि ईरान में खामिया नहीं बुनियादी मानवीय अधिकारों को कुचलने पर आमादा है। ट्रंप ने ना सिर्फ सभी सहयोगी देशों से ईरान छोड़ने की अपील की है बल्कि कुछ ने तो इस पर तैयारी भी शुरू कर दी है। इजराइल ने अपने सभी एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया है। कनाडा ने भी एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा। यह संकेत बताते हैं कि ईरान में आज रात कुछ बहुत बड़ा होने वाला है। बातचीत के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और ट्रंप पूरी तरह एक्शन मोड में दिख रहे हैं। अमेरिका की चेतावनी और वॉर लेवल की तैयारियों के रिपोर्ट्स को ईरान ने खारिज किया है। बल्कि ईरान में मचे बवाल का दोष अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की एजेंसीज पर बढ़ा है। इधर अमेरिका की तैयारी दो मोर्चों पर साफ दिख रही है। एक तो ईरान में सैन्य दखल जो कभी भी फुल फ्लेज्ड अटैक की शक्ल ले सकता है और दूसरी तरफ बगावत के साथ खामने के तख्तापलट की तैयारी।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट एक्सओस के मुताबिक ट्रंप के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ पिछले हफ्ते ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी से सीक्रेट मुलाकात की। यह बैठक चुपचाप हुई और इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। रजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। वो 1978 में अपने पिता के सत्ता से हटने से पहले ही ईरान छोड़ चुके थे। इसके बाद से वह ज्यादातर अमेरिका में ही रहे हैं। लेकिन अब वह भी ईरान में हो रही हिंसा का मुखर विरोध करते हुए सत्ता पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ दो हफ्ते से जारी विद्रोह में अब तक 2 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी ईरान प्रशासन के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दी है। उन्होंने कहा कि इन मौतों के लिए अमेरिका जिम्मेदार है, क्योंकि उसी ने विद्रोह भड़काया है। वहीं, ब्रिटिश वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने 12 हजार मौतों का दावा किया है। वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों को सरकारी इमारतों पर कब्जा करने की सलाह दी। ईरान में हालात तनावपूर्ण बने रहे, लेकिन कई दिनों बाद इंटरनेट और फोन लाइनें चालू होने के बाद ईरान के लोग दुनिया से जुड़े। प्रदर्शन की वजह से संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया था। लोगों ने कॉल कर और सोशल मीडिया के जरिए नुकसान के हालात बर्या किए। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से कहा कि वे प्रदर्शन जारी रखें, मदद रास्ते में है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस रूप में होगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा 'ईरानी देशभक्तों, विरोध करते रहो अपनी संस्थाओं पर कब्ज करो !' ट्रंप ने लिखा कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं बंद होने तक किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी और जिम्मेदार लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगे।
पहली बार इस संख्या को लेकर सरकारी स्तर पर संकेत मिले हैं। ईरानी सरकारी टीवी ने माना कि हालिया हिंसा में कई लोगों को देश ने खोया है। यह बयान शहीद फाउंडेशन के चीफ अहमद मौसावी के हवाले से पढ़ा गया। अमेरिकी संस्था ने दावा किया कि मरने वालों की संख्या 2 हजार से ज्यादा हो गई है।
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यूरोपीय यूनियन इस समय भारत की फॉरेन पॉलिसी पर बकायदा स्टडी कर रहा है। इतना ही नहीं एक रिपोर्ट भी पब्लिश की गई है जिसमें यूरोप खुद मान रहा कि भारत अमेरिका रूस ब्रिक्स, जी20, और ग्लोबल साउथ सबके साथ एक साथ कैसे चल पा रहा है। यह यूरोप के लिए अब एक पहेली बन चुका है और इसी बीच भारत और चीन ने वेनेजुएला के तेल बाजार में बड़ी एंट्री मार दी है जिससे अमेरिका का टोन तक बदलता हुआ दिख रहा है। दरअसल दुनिया के ऑयल मार्केट में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय बाद वेनेजुला का कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में लौटने जा रहा है। आपको याद होगा अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वेनेजुला का तेल लगभग बाजार से गायब था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
दुनिया की दो सबसे बड़ी कमोडिटी ट्रेंडिंग कंपनियां और ट्रेफिग्रा ने भारत और चीन की रिफाइनरियों से बातचीत शुरू कर दी है ताकि मार्च से वेनेजुला का तेल सप्लाई किया जा सके। इन कंपनियों को अमेरिकी सरकार से विशेष अनुमति मिली है कि वेनेजुला के तेल की मार्केटिंग तक कर सकें। यानी जो तेल सालों से गोदामों में फंसा था अब वह कानूनी तरीके से जहाजों में लोड होगा। अब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और सस्ता तेल मतलब सीधा फायदा। बताया जा रहा है कि वेनेजुला का तेल ब्रिंड क्रूड से 8 से 8.5 प्रति बैरल सस्ता ऑफर किया गया है। इसलिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन हिंदुस्तान पेट्रोलियम इस डील में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अब चीन की सरकारी कंपनी पेट्रो चाइना जो पहले वेनेजुला का बड़ा ग्राहक थी अब दोबारा मैदान में उतरने की तैयारी में है। खास बात है कि इस बार डील छोटे प्राइवेट रिफाइनियों से नहीं सीधे सरकारी कंपनियों से की जा रही है। यानी अब तेल की सप्लाई छुपे रास्तों से नहीं खुले और वैध तरीके से होगी। यह दिखाता है कि अमेरिका खुद अब वेनेजुला को पूरी तरह अलग-थलग नहीं रखना चाहता है।
इसका असर ग्लोबल ऑयल प्राइस पर पड़ेगा। ईरान सप्लाई में रुकावट के बीच वेनेजुला का तेल कीमतों को काबू में रख सकता है। यानी दुनिया को थोड़ी राहत। अब आते हैं दूसरी बड़ी खबर पर। साल 2025 में यूरोपीय यूनियन ने भारत की विदेश नीति पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष था कि भारत ने स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी को पैसिव नहीं एक्टिव बनाया है। ईयू मानता है कि भारत किसी एक गुट में नहीं बंधा है। ना अमेरिका का जूनियर पार्टनर है। ना रूस या चीन के दबाव में है। भारत की नीति है एक्टिव मल्टी एलाइनमेंट यानी अमेरिका से टेक्नोलॉजी, ब्रिक्स से ग्लोबल साउथ और G20 से ग्लोबल गवर्नेंस सब कुछ एक साथ।
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