विश्व अल्जाइमर दिवस 2026: जितनी जल्दी पहचान, उतनी बेहतर देखभाल
नई दिल्ली, 20 सितंबर (आईएएनएस)। अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कई बार शुरुआती लक्षणों को लोग उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। समय रहते बदलावों को पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना आगे की देखभाल और सहायता की योजना बनाने में मदद कर सकता है।
अल्जाइमर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। जितनी जल्दी आपको बीमारी के बारे में पता चलेगा, उतना ही बेहतर तरीके से आगे की तैयारी और जरूरी सहायता की जा सकती है। इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अल्जाइमर और डिमेंशिया के शुरुआती संकेत हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है। जैसे व्यक्ति को समय या जगह को लेकर भ्रम होने लगना, रोजमर्रा की योजना बनाने या किसी समस्या को हल करने में परेशानी होना और पहले से आसानी से किए जाने वाले परिचित कामों को करने में कठिनाई महसूस होना।
इसी तरह ऐसी याददाश्त की कमी, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। कुछ लोग काम या सामाजिक गतिविधियों से धीरे-धीरे दूरी बनाने लगते हैं। ऐसे बदलाव दिखाई दें तो उन्हें केवल बढ़ती उम्र का असर मानने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
अल्जाइमर से बचाव के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी है। नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। रोजाना टहलना, योग या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां शरीर के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी हैं।
अपने दोस्तों और परिवार के साथ मजबूत सामाजिक जुड़ाव बनाए रखें। बातचीत करना, लोगों से मिलना-जुलना और सामूहिक गतिविधियों में शामिल होना व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से सक्रिय रख सकता है।
खाने में फल और सब्जियों सहित संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें। साथ ही पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है। कोशिश करें कि सोने और जागने का समय लगभग तय रहे।
दिमाग को सक्रिय रखने के लिए नई चीजें सीखते रहें। किताब पढ़ना, कोई नया कौशल सीखना, संगीत या रचनात्मक गतिविधियों में रुचि लेना जैसे काम मानसिक सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ऐसी गतिविधियों के लिए भी समय निकालें, जिनसे आपको खुशी और संतुष्टि मिलती है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर: सितंबर में FPI बने बिकवाल, सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का आउटफ्लो सितंबर में अब तक (1 से 19 सितंबर) 23,676 करोड़ रुपए रहा है, इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार थे. यह जानकारी एनालिस्ट्स की ओर से दी गई. हालांकि, विदेशी निवेशक प्राइमरी बाजार में लगातार खरीदार बने हुए हैं. सितंबर में अब तक, उन्होंने करीब 2,703 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो कि 2026 में एफपीआई द्वारा किया कुल निवेश 48,550 करोड़ रुपए पहुंच गया है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ.वी.के. विजयकुमार ने कहा कि इससे सेकेंडरी मार्केट के सुस्त प्रदर्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी की कुछ हद तक वजह समझ में आती है. पिछले हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला. ऊंची एनर्जी कीमतों से महंगाई पर पड़ने वाले असर और आर्थिक विकास पर इसके नतीजों को लेकर चिंताएं बनी रहीं. सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ. एनालिस्ट्स का कहना है कि कई हफ्तों तक अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते के आखिर में मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे बड़े इंडेक्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ.
ये भी पढ़ें: 'कार लॉक है और कंट्रोल में नहीं...' लुधियाना में बिना चालक चलती दिखी इलेक्ट्रिक कार, टेक्नोलॉजी पर उठे सवाल
कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार की धारणा को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहे. यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी ने ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी. आगे चलकर, एफपीआई फ्लो पर ईरान-यूएस के बीच चल रहे टकराव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर का काफी असर पड़ेगा. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और यूएस बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर (यूएस 10-वर्षीय यील्ड 5 प्रतिशत पर) भारतीय इक्विटी बाजार और एफपीआई फ्लो के लिए नकारात्मक हैं. हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बेहतर कमाई की उम्मीदें सकारात्मक कराक हैं.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation










