बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर: सितंबर में FPI बने बिकवाल, सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का आउटफ्लो सितंबर में अब तक (1 से 19 सितंबर) 23,676 करोड़ रुपए रहा है, इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार थे. यह जानकारी एनालिस्ट्स की ओर से दी गई. हालांकि, विदेशी निवेशक प्राइमरी बाजार में लगातार खरीदार बने हुए हैं. सितंबर में अब तक, उन्होंने करीब 2,703 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो कि 2026 में एफपीआई द्वारा किया कुल निवेश 48,550 करोड़ रुपए पहुंच गया है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ.वी.के. विजयकुमार ने कहा कि इससे सेकेंडरी मार्केट के सुस्त प्रदर्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी की कुछ हद तक वजह समझ में आती है. पिछले हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला. ऊंची एनर्जी कीमतों से महंगाई पर पड़ने वाले असर और आर्थिक विकास पर इसके नतीजों को लेकर चिंताएं बनी रहीं. सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ. एनालिस्ट्स का कहना है कि कई हफ्तों तक अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते के आखिर में मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे बड़े इंडेक्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ.
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कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार की धारणा को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहे. यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी ने ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी. आगे चलकर, एफपीआई फ्लो पर ईरान-यूएस के बीच चल रहे टकराव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर का काफी असर पड़ेगा. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और यूएस बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर (यूएस 10-वर्षीय यील्ड 5 प्रतिशत पर) भारतीय इक्विटी बाजार और एफपीआई फ्लो के लिए नकारात्मक हैं. हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बेहतर कमाई की उम्मीदें सकारात्मक कराक हैं.
Input: IANS
No Insurance No Fuel: बिना बीमा के नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल! जानें कैसे काम करेगा ये नियम?
No Insurance No Fuel: केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों को लगातार कड़े कर रही है. जिससे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. जिसके चलते पहले सरकार ने नो हेलमेट, नो पेट्रोल की शुरुआत की. इस योजना के बाद अब नो इंश्योरेंस, नो पेट्रोल की बात शुरू हो गई है. जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को देखा है, उसके बाद से ही जो तमाम अथॉरिटीज इस पर काम करना शुरू कर रही हैं.
अब अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं होगा यानी बीमा नहीं होगा तो हो सकता है आने वाले समय में आपको पेट्रोल पंप से पेट्रोल ना मिले. बता दें कि सरकार बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा मोटर बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर ईंधन ना मिलने का नियम लागू करने की तैयारी की जा रही है. नया नियम क्या कह रहा है? नए नियम के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई जो है वह जल्द ही पेट्रोल पंपों पर नो इंश्योरेंस न्यू फ्यूल नियम जो है उसको लागू करने की तैयारी कर रहा है. देखें ये रिपोर्ट....
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