नीति आयोग ने देश के राज्यों की निर्यात तैयारी पर जारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। नीति आयोग ने बुधवार को निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) 2024 जारी किया है। इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत के अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेश निर्यात के लिए कितने तैयार हैं।
यह रिपोर्ट देश के 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य से जुड़ी है, जो कि विकसित भारत 2047 के सपने को पूरा करने में भी मदद करेगा। यह रिपोर्ट आंकड़ों के आधार पर यह चेक करती है कि राज्यों में निर्यात से जुड़ी व्यवस्था कितनी मजबूत, सुरक्षित और सभी को शामिल करने वाली है।
इस इंडेक्स के जरिए यह भी पता चलता है कि राज्यों को निर्यात बढ़ाने में किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है और कौन-सी नीतियां मददगार हो सकती हैं।
रिपोर्ट जारी करते समय नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत का निर्यात अब इस बात पर निर्भर करता है कि राज्य और जिले कितने तैयार हैं। उन्होंने कहा कि निर्यात से जुड़ा ढांचा मजबूत करना, लागत कम करना, अच्छी संस्थाएं बनाना और साफ नीतियां बनाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि अगर राज्यों और जिलों में निर्यात की तैयारी अच्छी होगी, तो इससे लंबे समय तक विकास होगा, रोजगार बढ़ेगा और क्षेत्रों के बीच अंतर कम होगा।
निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 को चार मुख्य स्तंभों में बांटा गया है, जिनमें 13 उप-स्तंभ और 70 संकेतक शामिल किए गए हैं, ताकि सही तरीके से राज्यों की तैयारी को समझा जा सके।
इस 2024 संस्करण में कुछ नए विषय भी जोड़े गए हैं, जैसे अर्थव्यवस्था की स्थिरता, लागत की प्रतिस्पर्धा, लोगों की कौशल क्षमता, वित्तीय सुविधाएं और छोटे उद्योगों की स्थिति। इससे रिपोर्ट और ज्यादा उपयोगी बन गई है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना करने के लिए उन्हें बड़े राज्य, छोटे राज्य, पूर्वोत्तर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी में उन्हें लीडर, चुनौती देने वाले और आगे बढ़ने वाले राज्यों में रखा गया है।
रिपोर्ट में जिलों पर खास ध्यान दिया गया है, क्योंकि जिले ही निर्यात को जमीन पर मजबूत बनाते हैं। स्थानीय उद्योग, उत्पादन केंद्र और आपूर्ति शृंखला को ध्यान में रखकर रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है।
यह रिपोर्ट पूरी तरह आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सरकारी संस्थाओं से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है और सभी हिस्सों को बराबर महत्व दिया गया है।
निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 के अनुसार, बड़े राज्यों की श्रेणी में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में उभरे हैं।
नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका बहुत अहम है। उन्हें अपनी ताकत पहचाननी होगी, कमियों को दूर करना होगा और नए व्यापार के मौकों का सही इस्तेमाल करना होगा, ताकि भारत का निर्यात और आगे बढ़ सके।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
विपक्ष मराठी भाषा को लेकर सिर्फ सियासत कर रहा है, बीजेपी की जड़ों में है मराठी अस्मिता है- रविंद्र चव्हाण
महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी भाषा को लेकर चल रहे वाद विवाद पर अब बीजेपी महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण ने विपक्ष को दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने कहा की मराठी भाषा पर जो विपक्ष कर रहा है वो सिर्फ सियासत के लिए है जबकि बीजेपी के लिए मराठी भाषा या “मराठी” शब्द किसी एक व्यक्ति या फिर वर्ग तक सीमित नहीं है बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच का प्रतीक है।
मराठी भाषा के नाम पर बीजेपी के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने वालों को रविन्द्र चौहान ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का मराठी दृष्टिकोण लोगों को बाँटने वाला नही बल्कि “हम हमारे सब” की भावना पर आधारित है, जिसमें मराठी भाषा, संस्कृति और अस्मिता ये तीनों शामिल हैं।
महाराष्ट्र के 29 महानगर पालिका चुनाव को लेकर मतदान
गुरुवार 15 जनवरी को महाराष्ट्र के 29 महानगर पालिका चुनाव को लेकर मतदान होने हैं। चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने मराठी भाषा और मराठी अस्मिता को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा जिसपर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने अब पलटवार किया है। उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए “मराठी” शब्द मराठी व्याकरण के बहुवचन की तरह है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारा मराठी दृष्टिकोण सकारात्मकता फैलाने वाला है, जिससे मराठी भाषा, साहित्य और मराठी संस्कृति के प्रचार-प्रसार की अपेक्षा है।
विपक्ष मराठी भाषा का राजनीतीकरण कर रहा है
जिस तरह से ठाकरे बंधुओं ने चुनावी सभाओं से बीजेपी और मराठी को बाँटने की कोशिश की है उसके जवाब में विपक्ष पर निशाना साधते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष को मराठी भाषा का राजनीतिकरण न करने की सलाह दी है और मराठी को लेकर विपक्ष की भूमिका को नकारात्मकता से भरी बताया। और कहा की “भाजपा और मराठी माणूस ये दो अलग-अलग बातें नहीं हैं। बल्कि मराठी लोगों द्वारा स्थापित मातृ संस्था की विचारधारा ही भाजपा की विचारधारा है।”
विपक्ष पर तीखा जुबानी प्रहार करते हुए उन्होंने कहा की ज्ञानेश्वर माउली के “विश्वात्मके देवे” जैसे वैश्विक सिद्धांत से उनकी कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखती। संविधान के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, स्वातंत्र्यवीर सावरकर और बाळासाहेब ठाकरे इन तीनों ही महान मराठी भाषी व्यक्तित्वों के विचारों से प्रेरित होकर देश और समाज के निर्माण का काम बीजेपी कई वर्षों से करती आ रही है।
मराठी भाषियों के लिए बीजेपी प्रतिबद्ध
रवीन्द्र चौहान ने कहा की केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में जहाँ भी मराठी भाषी रहते हैं उनकी उन्नति के लिए बीजेपी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्य की प्रगति, राज्य के नागरिकों का जीवन सुगम हो और देशभक्त व संस्कारित पीढ़ी तैयार हो, इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। अंत में उन्होंने कहा की बीजेपी ने मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाया जिसके करण आज गुड़ी पड़वा पर्व दुनिया भर में मनाया जाता है और गुड़ी पड़वा के दिन निकलने वाली शोभायात्रा की संकल्पना भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई थी और यही हमारा मराठी भाषा के प्रति “बहुवचन” दृष्टिकोण है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















