Salman Khan: सलमान खान की तबीयत को लेकर मचा हड़कंप; ‘बिग बॉस 20’ के वायरल प्रोमो का एक्टर ने बताया पूरा सच
Salman Khan Bigg Boss 20 Health Update: ‘बिग बॉस 20’ के वीकेंड का वार का एक प्रोमो सामने आने के बाद सलमान खान की सेहत को लेकर फैंस परेशान हो गए थे। प्रोमो में सलमान दर्द में नजर आए और कुछ देर बाद स्टेज पर लेटते हुए दिखाई दिए। वीडियो वायरल होने के बाद अब सलमान ने खुद इस पूरे मामले पर सफाई दी है।
सलमान ने बताया सच
सलमान खान ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर बताया कि भगवान की कृपा से उनकी सेहत बिल्कुल ठीक है। उन्होंने कहा कि प्रोमो को जिस तरह से एडिट किया गया, उससे पूरा मामला कुछ और ही नजर आने लगा।
सलमान ने प्रोमो की एडिटिंग पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, प्रोमो देखने के बाद ऐसा लग रहा था जैसे वह सच में किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हों।
काजी को सबक सिखाने के लिए किया ऐसा
Bigg Boss 20 Weekend Ka Vaar PROMO | Salman Khan Ki Bigdi TABIYAT | Salman Stage Pe Let Gaye ???? pic.twitter.com/H4UZGfUKbk
— BiggBoss24x7 (@BiggBoss24x7) September 19, 2026
सलमान ने बताया कि शो में उनके दर्द में होने की वजह कुछ और थी। वह कंटेस्टेंट काजी को समझाना चाहते थे कि अपनी सेहत को मनोरंजन का हिस्सा बनाना सही नहीं है।
सलमान के मुताबिक, काजी ने घर में अपनी तबीयत खराब होने का नाटक किया था। घर के बाकी 15 कंटेस्टेंट्स को इसकी जानकारी नहीं थी और वे सच में उनकी सेहत को लेकर परेशान हो गए थे।
इसी बात को समझाने के लिए सलमान ने भी वैसा ही किया। उन्होंने बताया कि उनका दर्द सिर्फ काजी को यह दिखाने के लिए था कि उसने जो किया, वह गलत था।
प्रोमो ऐसे नहीं कटना चाहिए था
सलमान ने अपने बयान में प्रोमो की एडिटिंग को लेकर माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि प्रोमो जिस तरह से काटा गया, उससे पूरे मामले का मतलब ही बदल गया।
उन्होंने बिग बॉस की तरफ से भी फैंस से माफी मांगी और कहा कि शायद शो को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के प्रोमो बनाए जाते हैं।
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ISRO के साथ साझेदारी असाधारण, विज्ञान अभियानों में क्षमता विकास सराहनीय: NASA
(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 20 सितंबर नासा के भारतीय-अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ ‘‘असाधारण’’ साझेदारी है और वह दोनों संस्थानों के बीच भविष्य में और अधिक सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। नासा के सहायक प्रशासक एवं मुख्य अभियंता क्षत्रिय ने प्रतिष्ठित ‘इंट्रेपिड म्यूजियम’ में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ विशेष बातचीत में कहा, ‘‘हम पहले से ही इसरो के साथ असाधारण सहयोग कर रहे हैं।’’ नासा में उच्च पदस्थ अधिकारी क्षत्रिय ने कहा, ‘‘विज्ञान अभियानों के साथ-साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में इसरो जिस क्षमता का विकास कर रहा है, उसे देखना अविश्वसनीय है और हम भविष्य में और अधिक सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।’’ उन्होंने नासा और इसरो की साझेदारी वाले निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार) मिशन का उल्लेख किया। निसार पृथ्वी का अध्ययन करने वाला उपग्रह है, जिसे जुलाई 2025 में प्रक्षेपित किया गया था।
इसका उद्देश्य पृथ्वी की भूमि, बर्फ, जल और वनस्पतियों में होने वाले बदलावों को मापना और समझना है। नासा के मुख्य परिचालन अधिकारी क्षत्रिय ने कहा, ‘‘निसार पहल को संयुक्त प्रयास से लाभ मिला।’’ क्षत्रिय ने कहा कि नासा मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम जैसे अभियानों में भी व्यापक स्तर पर साझेदारियां करता है और इसरो के साथ अपने अनुभवों से मिली सीख साझा करता है। उन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और अभियानों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के लिए इस क्षेत्र में नेतृत्व करना महत्वपूर्ण है, लेकिन हम अपने मूल्यों के साथ नेतृत्व करना चाहते हैं। यह केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि किसके पास सबसे अधिक मशीनें हैं। यह हमारे उन मानदंडों और मानकों के बारे में है, जिनके आधार पर हम अंतरिक्ष का अन्वेषण करते हैं।’’ क्षत्रिय ने कहा कि भारत ने 70 से अधिक अन्य देशों के साथ आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए मार्गदर्शक गैर-कानूनी रूप से बाध्यकारी सिद्धांतों का समूह है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक प्रतिबद्धता है कि हम इस तरह अन्वेषण करेंगे, जिसमें एक-दूसरे की संप्रभुता और लोकतांत्रिक देशों के रूप में हमारे मूल्यों का सम्मान होगा। यह भी बुनियादी रूप से महत्वपूर्ण है।
इसरो एक अविश्वसनीय साझेदार रहा है।’’ क्षत्रिय द्वितीय विश्व युद्ध के विमानवाहक पोत के नाम पर बने इंट्रेपिड म्यूजियम में आयोजित एक परिचर्चा में हिस्सा लेने के लिए शहर में थे। यह कार्यक्रम नासा के प्रोटोटाइप ऑर्बिटर ‘एंटरप्राइज’ के सार्वजनिक प्रदर्शन के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। ‘एंटरप्राइज’ ने बाद में स्पेस शटल कार्यक्रम का मार्ग प्रशस्त किया था।
‘प्रोटोटाइप ऑर्बिटर’ यानी ऐसा प्रारंभिक/परीक्षण मॉडल अंतरिक्ष यान, जिसे किसी नए अंतरिक्ष यान या मिशन की तकनीक और डिजाइन को परखने के लिए बनाया जाता है। परिचर्चा में नासा के पूर्व प्रशासक और अंतरिक्ष यात्री चार्ल्स एफ. बोल्डेन जूनियर तथा रिकॉर्डधारी अंतरिक्ष यात्री और एक्सिओम स्पेस की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक पेगी व्हिटसन भी शामिल हुईं। व्हिटसन ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ अपने सहयोग के बारे में बात की।
शुक्ला उस एक्सिओम मिशन-4 के पायलट थे, जिसकी कमान उन्होंने संभाली थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक्सिओम-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला को पाकर वास्तव में बहुत खुश थी। उन्होंने मुझे जो कुछ बताया है, उससे मुझे लगता है कि देश अंतरिक्ष के भविष्य और संभावनाओं को लेकर बहुत उत्साहित है, खासकर मानव अंतरिक्ष उड़ान को लेकर।
मुझे उन पर बहुत गर्व है।’’ लखनऊ में जन्मे शुक्ला भारतीय वायुसेना के एक सम्मानित पायलट और अशोक चक्र से सम्मानित अधिकारी हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए एक्सिओम मिशन-4 में पायलट के रूप में काम किया। जून 2025 में प्रक्षेपित एक्सिओम मिशन-4 में व्हिटसन कमांडर, शुक्ला पायलट तथा पोलैंड के स्लावोस्ज उजनांस्की-विस्निव्स्की और हंगरी के तिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ थे।
इस दल ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिनों तक रहकर अनुसंधान गतिविधियां कीं। अमेरिका की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री व्हिटसन ने एक्सिओम-4 मिशन के बाद अंतरिक्ष में कुल 695 दिन बिताए हैं, जो किसी भी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री या दुनिया की किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री से अधिक है। वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की पहली महिला कमांडर भी रह चुकी हैं।
वैश्विक अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए बोल्डेन ने कहा, ‘‘आपको केवल यह देखना है कि अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला पहला देश कौन था। इसका जवाब है- भारतीय।’’ भारत का पहला अंतरग्रहीय मंगल मिशन ‘मंगलयान’ या मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) नवंबर 2013 में पीएसएलवी-सी25 के जरिए प्रक्षेपित किया गया था। इसरो मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान भेजने वाली दुनिया की चौथी अंतरिक्ष एजेंसी बनी थी।
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