बुधवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के सहयोगी संगठनों के 29 नक्सलियों ने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे दरभा मंडल में माओवादी प्रभाव को एक बड़ा झटका लगा है। सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने "पुणे मार्गेम" पुनर्वास पहल के तहत हुए इन आत्मसमर्पणों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की नीति और हाल ही में गोगुंडा में स्थापित सुरक्षा शिविर को एक महत्वपूर्ण माओवादी गढ़ को नष्ट करने का श्रेय दिया।
इस समूह में गोगुंडा में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संगठन (डीएकेएमएस) के प्रमुख पोडियम बुध्रा भी शामिल थे, जिन पर 2 लाख रुपये का इनाम था। इनके अलावा, डीएकेएमएस, मिलिशिया और जनताना सरकार के सदस्य भी इसमें शामिल थे। सुरक्षा और समाज में पुनर्एकीकरण के वादों से प्रभावित होकर उन्होंने वरिष्ठ पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। गोगुंडा का दुर्गम इलाका कभी माओवादियों के दरभा डिवीजन के लिए सुरक्षित पनाहगाह हुआ करता था, लेकिन नवस्थापित सुरक्षा शिविर ने आक्रामक नक्सल-विरोधी अभियानों, तलाशी अभियानों और निरंतर दबाव को जन्म दिया, जिससे उनकी गतिविधियां कमजोर पड़ गईं। इससे विद्रोहियों का समर्थन नेटवर्क काफी कमजोर हो गया, जिसके कारण ये आत्मसमर्पण हुए और यह क्षेत्र में एक निर्णायक मोड़ का संकेत है।
चव्हाण ने शेष माओवादियों से सम्मानजनक जीवन के लिए हिंसा छोड़ने का आग्रह किया। हाल के रुझान गति दर्शाते हैं - 8 जनवरी को पड़ोसी दंतेवाड़ा में 63, 7 जनवरी को सुकमा में और 2025 में पूरे राज्य में 1,500 से अधिक लोगों ने आत्मसमर्पण किया। नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित 31 मार्च, 2026 की समय सीमा के अनुरूप, ये घटनाक्रम मजबूत सुरक्षा और नीतिगत प्रोत्साहनों के बीच बढ़ते आत्मसमर्पणों को दर्शाते हैं।
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सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के संकल्प और संयम का ‘निर्णायक प्रदर्शन’ था और इसने देश की सेना और युवाओं की नैतिक ताकत तथा पेशेवर योग्यता को दर्शाया। उल्लेखनीय है कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पिछले साल अप्रैल में हुए भयावह पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में छह-सात मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादियों को मार गिराया गया था।
सेना प्रमुख ने नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के गणतंत्र दिवस शिविर में कैडेट को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर भारत के संकल्प और संयम का निर्णायक प्रदर्शन था। इसने हमारे सशस्त्र बलों और हमारे युवाओं की नैतिक ताकत और पेशेवेर योग्यता को दर्शाया।’’ जनरल द्विवेदी ने एक दिन पहले ही पाकिस्तान को सख्त संदेश देते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और दुश्मन की किसी भी दुस्साहस वाली करतूत का सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
सेना प्रमुख ने आज के आयोजन में पिछले साल मई में हुई निर्णायक सैन्य कार्रवाई में एनसीसी के योगदान को याद किया। सेना प्रमुख ने कहा कि अभियान के दौरान, देश भर में 75,000 से अधिक एनसीसी कैडेट ने नागरिक रक्षा, अस्पताल प्रबंधन, आपदा राहत और सामुदायिक सेवा के कार्यों में अथक स्वयंसेवा की। उन्होंने कहा, ‘‘हाल की घटनाओं ने दिखाया है कि भारतीय युवा कितने सक्षम हैं। आप ‘जेनरेशन जेड’ की सबसे शक्तिशाली और सर्वाधिक आबादी के प्रतिनिधि हैं। हमारे युवा ताकत का भंडार हैं, जिसे अनुशासन, उद्देश्य और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए।’’ जनरल द्विवेदी ने कहा कि एनसीसी युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में शामिल होने का पसंदीदा रास्ता बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए ‘सभ्यतागत आत्मनिर्भरता’, यानी सोच, प्रौद्योगिकी, नवाचार और चरित्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत है।
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में सैन्य प्रकोष्ठ के साथ ही प्रौद्योगिकी क्लस्टर और सैन्य इंटर्नशिप कार्यक्रम 2025 और 2026 जैसी पहल इसी भावना को बढ़ावा देने के लिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम आपको राष्ट्रीय सुरक्षा, नवाचार और विकास पहलों में सक्रियता से भागीदारी के लिए आमंत्रित करते हैं।’’ जनरल द्विवेदी ने अपने भाषण में कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प अकेले सरकार के स्तर पर हासिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इसे युवा नेताओं, एनसीसी कैडेट, नवप्रवर्तकों, शिक्षकों, इंजीनियर, चिकित्सकों, सैनिकों और आप जैसे जिम्मेदार नागरिक प्राप्त करेंगे।’’
सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘तो, आइए विश्वास के साथ आगे बढ़ें, अनुशासन के साथ मार्च करें, ईमानदारी के साथ नवाचार करें, और भविष्य के नेता बनें जिनकी हमें तलाश है। हम सब मिलकर एक मजबूत, आत्मनिर्भर, एकजुट और विकसित भारत बनाएंगे।’’
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