बिहार : जदयू के दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए सीएम नीतीश, भाजपा कार्यालय में भी जुटे नेता
पटना, 14 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज को लेकर सियासत जमकर हो रही है। इस बीच, बुधवार को जहां एक ओर जदयू के भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए, वहीं भाजपा प्रदेश कार्यालय में भी किसान मोर्चा द्वारा आयोजित चूड़ा-दही भोज में बिहार सरकार के कई मंत्री और कार्यकर्ता पहुंचे।
ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज:अगर हारे तो लौटाने होंगे अरबों डॉलर; अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- हम बर्बाद हो जाएंगे
ट्रम्प के टैरिफ लगाने के अधिकार को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज यानी बुधवार को फैसला सुनाएगा। फैसला भारतीय समयानुसार आज रात 8 बजे तक आ सकता है। इसे लेकर ट्रम्प ने चिंता जताई है। ट्रम्प ने सोमवार को कहा था, ‘कोर्ट ने उनके टैरिफ लगाने के अधिकार को सीमित किया, तो अमेरिका को टैरिफ से आए अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं।’ दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रम्प के अप्रैल 2025 के ग्लोबल टैरिफ से जुड़े मामले पर फैसला सुनाने वाला है। इसमें यह देखा जाएगा कि क्या राष्ट्रपति को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत इतने बड़े टैरिफ लगाने का अधिकार है या नहीं। यह कानून 1977 में नेशनल इमरजेंसी हालात के लिए बनाया गया था, जो कुछ हालात में नेशनल इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर रोक लगाने या कंट्रोल का अधिकार देता है। ट्रम्प का दावा है कि इन टैरिफ्स से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से ज्यादा राजस्व मिला है, और ये राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हैं। उन्होंने मीडिया पर कोर्ट को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया। ट्रम्प ने व्यापार घाटे को इमरजेंसी बताकर टैरिफ लगाया था ट्रम्प ने 1977 के IEEPA कानून का हवाला देकर अमेरिका के व्यापार घाटे को नेशनल इमरजेंसी घोषित किया और ज्यादातर देशों पर टैरिफ लगाया था। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार के टैरिफ लगाने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए थे। उस दौरान जजों ने पूछा था कि क्या राष्ट्रपति को इस तरह के ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने इस मामले में लंबी सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है। ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल इन टैरिफ के ऐलान किए थे। इन टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से बाहर जाकर आयात होने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाए। एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट राज्यों ने छोटे कारोबारियों के साथ मिलकर ट्रम्प सरकार के खिलाफ यह केस किया है। निचली अदालतों ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था निचली अदालतों (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और फेडरल सर्किट कोर्ट) ने टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। उनका मानना है कि IEEPA टैरिफ लगाने की इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मौखिक बहस सुनी, जहां जजों ने ट्रम्प की ओर से पेश किए गए दलीलों पर संदेह जताया। कोर्ट के 6-3 बहुमत के बावजूद, जस्टिस ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकता है, क्योंकि टैरिफ टैक्स का रूप हैं और यह संसद की जिम्मेदारी हैं। फैसला आने की उम्मीद 9 जनवरी 2026 को थी, लेकिन इसे टाल दिया गया। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह देरी ट्रम्प प्रशासन के पक्ष में जा सकती है, क्योंकि इससे कोर्ट को और विचार करने का समय मिलता है। अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रम्प के खिलाफ आता है अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रम्प के पक्ष में आता है ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें से 25% टैरिफ रूसी तेल की खरीदने की वजह से लगाया है। इसके चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है।
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