राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर पूर्व सैनिकों की सराहना करते हुए कहा कि उनका अडिग साहस हर भारतीय को प्रेरित करता रहेगा।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “पूर्व सैनिक दिवस और सशस्त्र बल ध्वज दिवस जैसे अवसरों पर न केवल हमारे बहादुर सैनिकों को सलाम करने का बल्कि उन्हें सार्थक सहयोग देने का भी अवसर मिलता है। मुझे विश्वास है कि हमारे पूर्व सैनिक भविष्य में भी राष्ट्र के हित में पूरी निष्ठा से समर्पित रहेंगे।”
राष्ट्रपति ने कहा, “पूर्व सैनिक दिवस पर मैं हमारे पूर्व सैनिकों के शौर्य, समर्पण व बलिदान को सलाम करती हूं। उनका अडिग साहस हर भारतीय को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।”
हर साल 14 जनवरी को पूर्व सैनिक दिवस मनाया जाता है। यह सशस्त्र बलों के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा की सेवाओं के सम्मान में मनाया जाता है, जो 1953 में इसी दिन सेना से सेवानिवृत्त हुए थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भावी पीढ़ियों के लिए मिट्टी की रक्षा, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए इन्हें वर्तमान समय की सबसे अहम आवश्यकताओं में से एक बताया। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के आवास पर पोंगल से संबंधित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह त्योहार लोगों को शब्दों से परे जाकर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को जीवन शैली के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने आगे कहा कि मिशन लाइफ, एक पेड़ मां के नाम और अमृत सरोवर जैसी सरकारी पहलें इस भावना को और मजबूत कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की रक्षा करना, जल संरक्षण करना और संसाधनों का संतुलित उपयोग करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से हैं। मिशन लाइफ, एक पेड़ मां के नाम और अमृत सरोवर जैसी पहलें इसी भावना को आगे बढ़ा रही हैं। केंद्र सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। पोंगल का त्योहार हमें प्रेरित करता है कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे जीवन का हिस्सा बन जाए। जब धरती हमें इतना कुछ देती है, तो इसे संरक्षित करना हमारा कर्तव्य बन जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार कृषि को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में टिकाऊ कृषि पद्धतियां, "पहली बूंद, अधिक फसल" दृष्टिकोण के तहत प्रभावी जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, कृषि प्रौद्योगिकी और मूल्यवर्धन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कृषि में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा इस क्षेत्र में नए विचार और नई ऊर्जा ला रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु में प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक सम्मेलन को याद किया, जहां उन्होंने युवाओं के महत्वपूर्ण योगदान को देखा, जिनमें से कई ने खेती करने के लिए अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां छोड़ दी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम कृषि को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। आने वाले समय में, टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ, जल प्रबंधन—जैसा कि मैं अक्सर कहता हूँ, “पहली बूँद, अधिक फसल”—प्राकृतिक कृषि, कृषि प्रौद्योगिकी और मूल्यवर्धन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। इन सभी क्षेत्रों में हमारे युवा नए विचारों और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। कुछ महीने पहले ही मैंने तमिलनाडु में प्राकृतिक कृषि पर एक सम्मेलन में भाग लिया था, जहाँ मैंने हमारे युवाओं द्वारा निभाई जा रही उत्कृष्ट भूमिका को देखा। कई युवाओं ने खेती करने के लिए उच्च वेतन वाली पेशेवर नौकरियों को छोड़ दिया है। उनसे मिलकर मुझे गहरी संतुष्टि और प्रेरणा मिली।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि तमिल सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है, और इसे एक ऐसी संस्कृति बताया जो सदियों को जोड़ती है, इतिहास से सीख लेती है और भविष्य का मार्गदर्शन करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मित्रों, तमिल सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है। यह संस्कृति सदियों को जोड़ती है, इतिहास से सीखती है, वर्तमान का मार्गदर्शन करती है और भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है। इसी से प्रेरित होकर आज का भारत अपनी जड़ों से शक्ति प्राप्त करते हुए नई संभावनाओं की ओर आगे बढ़ रहा है।
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