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Brent crude price: क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर के पार, महंगे तेल से भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

Brent crude oil price: पश्चिम एशिया में सुलगते संघर्ष और नए सिरे से भड़की हिंसा के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (कच्चा तेल) के दाम आसमान छूने लगे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं। जुलाई की शुरुआत में जो कीमतें करीब 79 डॉलर थीं, वे अब लगभग 20 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं, जिससे बाजार में कुछ समय की शांति के बाद राहत का दौर थम गया है।

बीते सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें 88 से 97 डॉलर के दायरे में कारोबार करती नजर आईं। 31 अगस्त को ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिकी हमलों और उसके बाद ईरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई के बाद यह तेजी आई है। इस सैन्य तनातनी ने क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात पर अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं।

भारत के लिए क्यों चिंता का विषय है महंगा तेल?
भारत अपनी कुल क्रूड ऑयल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसकी वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। वित्त वर्ष 2026 में देश का कुल तेल आयात बिल करीब 123 अरब डॉलर रहा था। एक अनुमान के मुताबिक, यदि क्रूड ऑयल की कीमतों में एक डॉलर की भी बढ़ोतरी पूरे सालभर बनी रहती है, तो इससे देश के सालाना आयात बिल में लगभग 18,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।

चालू वित्त वर्ष 2027 के शुरुआती चार महीनों में भारत ने 63.4 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 56.5 प्रतिशत अधिक है। यदि ये बढ़ी हुई कीमतें आम उपभोक्ताओं तक पहुंचती हैं, तो इससे देश में महंगाई भड़क सकती है, आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी चौड़ा हो सकता है।

सप्लाई रूट पर संकट और भारत का विकल्प
पारंपरिक रूप से पश्चिम एशिया भारत की कुल क्रूड जरूरतों का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करता रहा है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जिससे पहले वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता था, के बंद होने से इन सप्लीज में भारी गिरावट आई है।

इस संकट से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात की दिशा में अपने विकल्प बढ़ाए हैं। बाजार में तेल की उपलब्धता तो है, लेकिन लंबे शिपिंग रूट्स और कुछ क्रूड ग्रेड्स की भारी प्रकृति (Heavier nature) के कारण ढुलाई और प्रोसेसिंग की लागत काफी बढ़ गई है।

देश में लगातार बढ़ रही है ईंधन की मांग
एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं, तो दूसरी तरफ देश के भीतर भी मांग तेजी से ऊपर जा रही है। अगस्त महीने में भारत में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 7.88 प्रतिशत बढ़कर 3.82 मिलियन टन पर पहुंच गई, जबकि डीजल की मांग 6.46 प्रतिशत की तेजी के साथ 7 मिलियन टन दर्ज की गई। ईंधन की यह बढ़ती खपत आने वाले दिनों में देश की आयात जरूरतों को और ज्यादा बढ़ाएगी।

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदम
अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए भारत अब लगभग 41 देशों से तेल की खरीद कर रहा है और नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में जुटा है। इसके अलावा, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 84,000 करोड़ रुपए की 'समुद्र मंथन' अपतटीय अन्वेषण (Offshore exploration) योजना पर भी जोर दिया जा रहा है। अनुमान है कि भारत के पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय बेसिनों में 5,600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल-समकक्ष हाइड्रोकार्बन की क्षमता मौजूद है।

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  Sports

दिल्ली के क्रिकेटर Vansh Bedi ने Match Fixing आरोपों को नकारा, CSK विवाद पर दी सफाई

दिल्ली के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज वंश बेदी ने भारतीय क्रिकेट से जुड़े कथित मैच फिक्सिंग विवाद में अपना नाम सामने आने के बाद सफाई दी है। वंश बेदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि उनका नाम पूर्व रणजी ट्रॉफी क्रिकेटर रचित भाटिया के कथित स्टिंग अभियान में बताए गए चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाड़ी से जोड़ना पूरी तरह गलत है। उन्होंने इस तरह के दावों को झूठा और मानहानि करने वाला बताया है।

वंश बेदी ने अपने बयान में साफ कहा है कि वह उस खिलाड़ी नहीं हैं, जिसका कथित तौर पर रचित भाटिया ने जिक्र किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कथित मैच फिक्सिंग या उससे जुड़ी किसी भी गतिविधि में उनकी कोई भूमिका नहीं है। बेदी के मुताबिक, उनके नाम को इन आरोपों से जोड़ने वालों के खिलाफ उनकी कानूनी टीम उचित सिविल और आपराधिक कार्रवाई कर रही है।

गौरतलब है कि यह विवाद रचित भाटिया से जुड़े एक कथित सिक्रेट अभियान के बाद चर्चा में आया है। इस दौरान भाटिया ने कथित तौर पर दावा किया था कि उन्हें वर्ष 2025 के आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की संभावित अंतिम एकादश से जुड़ी अंदरूनी जानकारी मिलती थी। उनके अनुसार, यह जानकारी लंदन में मौजूद सट्टेबाजों तक स्नैपचैट के जरिए पहुंचाई जाती थी।

भाटिया ने कथित तौर पर यह भी दावा किया था कि उन्होंने पांच मुकाबलों में प्रत्येक से करीब 60 लाख रुपये कमाए थे। इस तरह उन्होंने कुल करीब तीन करोड़ रुपये की कमाई का दावा किया था। उनके कथित बयान में जानकारी देने वाले व्यक्ति को चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़े एक दोस्त के तौर पर बताया गया था। हालांकि, सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी में उस व्यक्ति का नाम वंश बेदी के रूप में घोषित नहीं किया गया था।

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बेदी का नाम चर्चा में आ गया। इसकी एक वजह यह रही कि वह वर्ष 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ जुड़े हुए थे। बाद में उन्होंने दिल्ली प्रीमियर लीग में सेंट्रल दिल्ली किंग्स का प्रतिनिधित्व किया। आईपीएल के दौरान टखने में चोट के कारण वह आगे के सत्र से बाहर भी हो गए थे। इन अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर सोशल मीडिया पर उनके नाम को लेकर अटकलें लगाई जाने लगीं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कथित गुप्त अभियान में सेंट्रल दिल्ली किंग्स से जुड़े एक मामले का भी जिक्र हुआ था। इसमें दिल्ली प्रीमियर लीग के एक मुकाबले से पहले संभावित टीम संयोजन की जानकारी दिए जाने की बात कही गई थी। इसी चर्चा में वंश बेदी के नाम का संदर्भ आया था। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता है कि टीम से जुड़ी जानकारी उन्होंने ही उपलब्ध कराई थी।

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ ने भी पूरे मामले को लेकर बीसीसीआई से मार्गदर्शन मांगा है। संघ की ओर से यह कहा गया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी खिलाड़ी की गलती जांच में साबित होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच, मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि दिल्ली प्रीमियर लीग के पिछले सीजन के दौरान वंश बेदी ने कथित तौर पर खुद भ्रष्ट गतिविधि से जुड़े एक प्रस्ताव की जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक अधिकारियों को दी थी। ऐसे में अब उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों और उनके द्वारा किए गए इस खंडन को लेकर जांच के तथ्यों का महत्व और बढ़ गया है।

बता दें कि फिलहाल बीसीसीआई की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिसमें वंश बेदी को कथित गतिविधियों में शामिल बताया गया हो। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और किसी आधिकारिक जांच में सामने आए निष्कर्ष के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

फिलहाल वंश बेदी की सफाई के बाद मामला इस सवाल पर टिक गया है कि उनके नाम को कथित विवाद से जोड़ने का ठोस आधार क्या है। जांच एजेंसियों या क्रिकेट अधिकारियों की ओर से आगे जो तथ्य सामने आते हैं, वही यह स्पष्ट कर पाएंगे कि कथित आरोपों में उनकी कोई भूमिका है या नहीं है।

Wed, 23 Sep 2026 19:03:00 +0530

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