गुजरात : आदिवासी क्षेत्रों में इमरजेंसी हेल्थकेयर मजबूत करने की पहल, रिस्पॉन्स टाइम आधा करना लक्ष्य
गांधीनगर, 19 सितंबर (आईएएनएस)। आदिवासी इलाकों में इमरजेंसी हेल्थकेयर सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में गुजरात एक बड़ा कदम उठा रहा है, जिसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में 89 नई एम्बुलेंस शामिल की जा रही हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गुजरात के सबसे दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
पूरे गुजरात में 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा का औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 13 मिनट 9 सेकंड है। शहरी इलाकों में औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 9 मिनट 55 सेकंड है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह लगभग 16 मिनट 28 सेकंड है। हालांकि, आदिवासी इलाकों में मुश्किल भौगोलिक और इलाकाई स्थितियों के कारण, इन इलाकों में मौजूदा औसत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम लगभग 18 मिनट 32 सेकंड है।
नई एम्बुलेंस फ्लीट के साथ, राज्य का मकसद आदिवासी इलाकों में औसत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम को मौजूदा 18 मिनट 32 सेकंड से घटाकर लगभग 10 मिनट करना है, जिससे इन इलाकों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स में काफी सुधार होगा। इस विस्तार का मकसद आदिवासी इलाकों में इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से निपटना है। जंगली इलाके, पहाड़ी इलाके, दूरदराज की बस्तियां और मानसून से जुड़ी पहुंच की समस्याएं एम्बुलेंस को मरीजों तक पहुंचने और उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गुजरात के सबसे दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इमरजेंसी एम्बुलेंस नेटवर्क का यह नया विस्तार यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि भौगोलिक बाधाएं आदिवासी समुदायों को समय पर और जीवन बचाने वाली चिकित्सा देखभाल पाने से न रोकें। नई एम्बुलेंस के जुड़ने से चिन्हित आदिवासी जिलों में एम्बुलेंस की संख्या मौजूदा 553 से बढ़कर 642 हो जाएगी, जिससे इन इलाकों में इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क काफी मजबूत होगा।
रिस्पॉन्स टाइम में कमी से आदिवासी और गैर-आदिवासी इलाकों के बीच का अंतर कम करने में भी मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि भौगोलिक रूप से मुश्किल जगहों पर मरीजों को जल्द से जल्द इमरजेंसी मदद मिल सके। नई एम्बुलेंस सेवा को आदिवासी इलाकों की अलग-अलग इमरजेंसी-केयर जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इनमें 22 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस, 55 बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एम्बुलेंस और 12 फोर-व्हील-ड्राइव (4डब्ल्यूडी) एम्बुलेंस शामिल हैं।
12 खास 4डब्ल्यूडी एम्बुलेंस का शामिल होना दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के लिए बहुत अहम है, जहां भारी बारिश, बाढ़ या खराब सड़कों की वजह से आम एम्बुलेंस का मरीजों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
इस विस्तार से राज्य का प्री-हॉस्पिटल इमरजेंसी केयर नेटवर्क मजबूत होने और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के बाद गोल्डन आवर में मरीजों को समय पर मेडिकल मदद मिलने की संभावना बढ़ने की उम्मीद है। दूर-दराज और मुश्किल से पहुंचने वाले इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए इमरजेंसी सेवाओं तक तेजी से पहुंच बहुत जरूरी है।
इस पहल का मकसद इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट के दोनों अहम चरणों को बेहतर बनाना है, मरीज तक तेजी से पहुंचना और मरीज को तेजी से अस्पताल पहुंचाना। इसलिए, इस प्रस्तावित विस्तार से न सिर्फ इमरजेंसी रिस्पॉन्स बेहतर होने की उम्मीद है, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी समुदायों और हेल्थकेयर सेंटर्स के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
इस अतिरिक्त फ्लीट को ऐसे इलाकों में बेहतर इमरजेंसी कवरेज देने के लिए तैयार किया गया है, जहां भौगोलिक हालात की वजह से रिस्पॉन्स और ट्रांसपोर्टेशन के समय पर काफी असर पड़ सकता है। एम्बुलेंस की तैनाती से इमरजेंसी एम्बुलेंस नेटवर्क अलग-अलग तरह की मेडिकल इमरजेंसी और इलाके से जुड़ी चुनौतियों का ज्यादा असरदार तरीके से सामना कर पाएगा। इन गाड़ियों को खरीदने की प्रक्रिया अभी चल रही है और इसे गांधीनगर में मेडिकल सर्विसेज के एडिशनल डायरेक्टर संभाल रहे हैं।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
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IPL के दम पर चमकेगी भारतीय हॉकी! खेल मंत्रालय का मास्टरस्ट्रोक
हॉकी फैंस के लिए एक दिलचस्प खबर आ रही है. हॉकी इंडिया लीग (HIL) को लंबे समय तक मजबूत और कामयाब बनाए रखने के लिए खेल मंत्रालय एक नए आइडिया पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, खेल मंत्रालय हॉकी इंडिया लीग की निरंतरता और सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसमें मौजूदा आईपीएल के मालिकों और फ्रैंचाइजियों को शामिल करने पर विचार कर रहा है. रिपोर्ट्स में आगे यह भी बताया है कि इस प्रस्ताव पर आईपीएल मालिकों की प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक रही है. अगर यह बातचीत आगे चलकर सफल होती है, तो भविष्य में हॉकी के मैदान पर भी आईपीएल जैसा बड़ा कॉर्पोरेट सपोर्ट देखने को मिल सकता है.
हॉकी इंडिया को वित्तीय संकट से उबारने की कवाय
हॉकी इंडिया लीग को पैसों की तंगी और टीमों को चलाने में आ रही दिक्कतों से बाहर निकालने के लिए खेल मंत्रालय पूरी तरह एक्टिव हो गया है. खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने हॉकी इंडिया के अधिकारियों और मौजूदा टीम मालिकों के साथ एक बड़ी बैठक की है, ताकि लीग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके. खेल मंत्रालय का मानना है कि इस समस्या का सबसे पक्का इलाज आईपीएल टीमों के मालिकों को साथ लाना हो सकता है, क्योंकि उनके पास खेल को एक कामयाब बिजनेस बनाने का बड़ा अनुभव और अच्छा-खासा पैसा है.
JSW ग्रुप ने पहले ही पेश की मिसाल
आईपीएल मालिकों का दूसरे खेलों में आना सिर्फ कोई सुनी-सुनाई बात नहीं है, बल्कि यह सच में शुरू हो चुका है. उदाहरण के लिए, आईपीएल की टीम दिल्ली कैपिटल्स के सह-मालिक JSW ग्रुप ने हॉकी इंडिया लीग में अपनी पुरुष और महिला दोनों टीमें खरीदी हैं, जिनका नाम 'JSW सूरमा हॉकी क्लब' है. JSW ग्रुप का यह कदम साफ दिखाता है कि क्रिकेट की तरह अब बड़े कॉर्पोरेट घराने हॉकी में भी लंबे समय के लिए पैसा लगाने को तैयार हैं.
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हॉकी ही नहीं, अन्य खेलों पर भी मंत्रालय की नजर
खेल मंत्रालय की यह सोच सिर्फ हॉकी तक ही सीमित नहीं है. सरकार चाहती है कि देश के बड़े और जाने-माने खेल निवेशक भारत की दूसरी घरेलू लीग्स में भी अपना पैसा लगाएं. खेल मंत्रालय IPL मालिकों को प्रो कबड्डी लीग और प्राइम वॉलीबॉल लीग जैसे अन्य बड़े खेलों से जोड़ने के लिए भी काफी दिलचस्पी दिखा रहा है, ताकि इन खेलों का स्तर भी आईपीएल जैसा ऊंचा हो सके.
Sources in the know revealed that the Sports Ministry was looking at existing Indian Premier League owners and franchises to get involved in the Hockey India League (HIL) as well, to ensure its sustainability and success, further stating that the IPL owners have been positive in… pic.twitter.com/XdytJymEhG
— Sportstar (@sportstarweb) September 19, 2026
मंत्रालय का भरोसा, हॉकी घाटे का सौदा नहीं
खेल मंत्रालय के अधिकारियों ने उन बातों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें कहा जाता है कि हॉकी घाटे का सौदा है. अधिकारियों का साफ कहना है कि हमारे खेल में कोई कमी नहीं है, बल्कि कमियां सिर्फ इसके मैनेजमेंट और रणनीतियों में हो सकती हैं. हाल ही में भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों के शानदार प्रदर्शन और मोबाइल-टीवी पर मैच देखने वाले फैंस की बढ़ती संख्या ने यह साबित कर दिया है कि देश में हॉकी का बहुत बड़ा बाजार है. मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिया है कि हॉकी इंडिया के आपसी विवादों को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा और हॉकी इंडिया लीग बिना किसी रुकावट के लगातार चलती रहेगी.
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