देहरादून रोजगार मेले में 249 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित, अब तक 12 लाख से अधिक युवा लाभान्वित
Uttarakhand News: दीवाली और त्यौहारों का मौसम आने से पहले ही देश के हजारों परिवारों में खुशियों की लहर दौड़ गई है. शनिवार को पूरे देश में 20वें राष्ट्रीय रोजगार मेले का भव्य आयोजन किया गया. इस खास मौके पर अलग अलग सरकारी विभागों और मंत्रालयों में चुने गए 51 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए. यह विशाल आयोजन देश के 45 स्थानों पर एक साथ किया गया था ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक इसकी पहुंच बन सके.
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और युवाओं का हौसला बढ़ाया. उन्होंने सभी नवनियुक्त युवाओं और उनके परिवारों को इस नई शुरुआत के लिए ढेर सारी बधाई दी. साल 2022 में शुरू हुए इस रोजगार मेले के तहत अब तक करीब 12 लाख 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र दिया जा चुका है. यह आंकड़ा अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने और उनके सपने पूरे करने के लिए कितनी तेजी से कदम बढ़ा रही है.
देहरादून में भी दिखा रोजगार मेले का भारी उत्साह
देश के अन्य हिस्सों की तरह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी रोजगार मेले की खूब धूम रही. यहां केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई. कार्यक्रम की शुरुआत पूरे विधि विधान के साथ दीप जलाकर की गई. इसके बाद देहरादून की मुख्य आयकर आयुक्त रेणुका जैन गुप्ता ने मंत्री जी का शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह देकर जोरदार स्वागत किया.
रेणुका जैन ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि सरकारी नौकरी पाना और उसका नियुक्ति पत्र हाथ में लेना किसी भी युवा के लिए एक बहुत बड़ा सपना होता है. आज जब इन युवाओं को यह पत्र मिल रहा है, तो यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार और माता पिता के लिए भी बड़े ही गर्व की बात है. उन्होंने सभी युवाओं की सालों की कड़ी मेहनत और लगन की जमकर तारीफ की. देहरादून में आयोजित इस मेले में कुल 249 युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे गए. ये वो युवा हैं जो अब भारतीय सर्वेक्षण विभाग, आयकर विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स, रेलवे, डाक विभाग और रक्षा मंत्रालय जैसे कई अहम महकमों में अपनी सेवाएं देंगे और देश के विकास में अपना योगदान देंगे.
युवाओं को मिली देश सेवा की बड़ी जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने बहुत ही प्रेरक बातें कही. उन्होंने कहा कि सालों तक सरकारी नौकरी की कठिन तैयारी करने वाले हर युवा के मन में यह सवाल रहता है कि उसे अंत में किस विभाग में काम करने का मौका मिलेगा. आज आप सभी का वह लंबा इंतजार खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि सरकार के इन प्रतिष्ठित विभागों से जुड़ना आपके करियर का एक बहुत बड़ा पड़ाव है जो आपकी जिंदगी बदल देगा.
मंत्री जी ने युवाओं से अपील की कि वे सिर्फ नौकरी पाने तक ही सीमित ना रहें बल्कि सरकार के आईगोट कर्मयोगी प्लेटफार्म से जुड़कर लगातार अपने हुनर और कौशल को निखारते रहें. उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि हमारा लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है और इस बड़े संकल्प को पूरा करने में हर एक सरकारी कर्मचारी की ईमानदारी और जनसेवा बहुत अहम भूमिका निभाएगी.
पीएम मोदी ने युवाओं को दिखाया तरक्की का नया रास्ता
रोजगार मेले को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं में नया जोश भर दिया. उन्होंने कहा कि त्यौहारों के इस सुहावने मौसम में यह रोजगार मेला हजारों घरों में नई उम्मीद और खुशियां लेकर आया है. पीएम ने इस बात पर खास जोर दिया कि आज हमारे युवा एक ऐसे समय में सरकारी सिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं जब देश बहुत तेजी से विकास की राह पर दौड़ रहा है. उन्होंने नई शिक्षा नीति, स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी शानदार पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि आज की नई जरूरतों के हिसाब से युवाओं को तैयार किया जा रहा है.
मोदी जी ने छोटे शहरों में बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम की भी बहुत तारीफ की. उन्होंने कहा कि आज छोटे शहरों के युवा भी नए आइडिया लेकर आ रहे हैं और अपना खुद का कारोबार शुरू कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं. उन्होंने सभी युवाओं से आग्रह किया कि वे हमेशा कुछ नया सीखते रहें.
रोजगार मेले का शानदार सफर और चयन में पारदर्शिता
इस खास मौके पर केंद्रीय मंत्री डाक्टर जितेंद्र सिंह ने भी भर्ती प्रक्रिया में किए गए अहम बदलावों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अब सरकारी परीक्षाएं और चयन प्रक्रिया पहले से बहुत ज्यादा पारदर्शी और साफ सुथरी हो गई है. उन्होंने प्रतिभा सेतु पोर्टल जैसी एक नई पहल के बारे में भी युवाओं को बताया. यह पोर्टल उन होनहार युवाओं की मदद करता है जो सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा के आखिरी चरण तक तो पहुंचते हैं लेकिन किसी वजह से उनका फाइनल चयन नहीं हो पाता. ऐसे युवाओं को निजी और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में अच्छे अवसर दिलाने में यह पोर्टल बड़ी मदद करेगा. आपको बता दें कि रोजगार मेले की शानदार शुरुआत 22 अक्टूबर 2022 को हुई थी.
सरकार का लक्ष्य 10 लाख युवाओं को एक तय समय सीमा के भीतर सरकारी रोजगार देना था. पहले ही मेले में 75 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे गए थे और अब 20वें संस्करण तक यह गिनती 12 लाख के पार पहुंच चुकी है. यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी सभी सरकारी एजेंसियां पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ इन होनहार युवाओं का चयन कर रही हैं. आज देहरादून समेत पूरे देश में आयोजित हुआ यह कार्यक्रम युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है और इसने उन्हें राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का बड़ा अवसर दिया है.
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गुजरात : आदिवासी क्षेत्रों में इमरजेंसी हेल्थकेयर मजबूत करने की पहल, रिस्पॉन्स टाइम आधा करना लक्ष्य
गांधीनगर, 19 सितंबर (आईएएनएस)। आदिवासी इलाकों में इमरजेंसी हेल्थकेयर सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में गुजरात एक बड़ा कदम उठा रहा है, जिसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में 89 नई एम्बुलेंस शामिल की जा रही हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गुजरात के सबसे दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
पूरे गुजरात में 108 इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा का औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 13 मिनट 9 सेकंड है। शहरी इलाकों में औसत रिस्पॉन्स टाइम लगभग 9 मिनट 55 सेकंड है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह लगभग 16 मिनट 28 सेकंड है। हालांकि, आदिवासी इलाकों में मुश्किल भौगोलिक और इलाकाई स्थितियों के कारण, इन इलाकों में मौजूदा औसत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम लगभग 18 मिनट 32 सेकंड है।
नई एम्बुलेंस फ्लीट के साथ, राज्य का मकसद आदिवासी इलाकों में औसत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम को मौजूदा 18 मिनट 32 सेकंड से घटाकर लगभग 10 मिनट करना है, जिससे इन इलाकों में इमरजेंसी रिस्पॉन्स में काफी सुधार होगा। इस विस्तार का मकसद आदिवासी इलाकों में इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से निपटना है। जंगली इलाके, पहाड़ी इलाके, दूरदराज की बस्तियां और मानसून से जुड़ी पहुंच की समस्याएं एम्बुलेंस को मरीजों तक पहुंचने और उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गुजरात के सबसे दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इमरजेंसी एम्बुलेंस नेटवर्क का यह नया विस्तार यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि भौगोलिक बाधाएं आदिवासी समुदायों को समय पर और जीवन बचाने वाली चिकित्सा देखभाल पाने से न रोकें। नई एम्बुलेंस के जुड़ने से चिन्हित आदिवासी जिलों में एम्बुलेंस की संख्या मौजूदा 553 से बढ़कर 642 हो जाएगी, जिससे इन इलाकों में इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क काफी मजबूत होगा।
रिस्पॉन्स टाइम में कमी से आदिवासी और गैर-आदिवासी इलाकों के बीच का अंतर कम करने में भी मदद मिलेगी और यह सुनिश्चित होगा कि भौगोलिक रूप से मुश्किल जगहों पर मरीजों को जल्द से जल्द इमरजेंसी मदद मिल सके। नई एम्बुलेंस सेवा को आदिवासी इलाकों की अलग-अलग इमरजेंसी-केयर जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। इनमें 22 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एम्बुलेंस, 55 बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एम्बुलेंस और 12 फोर-व्हील-ड्राइव (4डब्ल्यूडी) एम्बुलेंस शामिल हैं।
12 खास 4डब्ल्यूडी एम्बुलेंस का शामिल होना दूर-दराज के आदिवासी इलाकों के लिए बहुत अहम है, जहां भारी बारिश, बाढ़ या खराब सड़कों की वजह से आम एम्बुलेंस का मरीजों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
इस विस्तार से राज्य का प्री-हॉस्पिटल इमरजेंसी केयर नेटवर्क मजबूत होने और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के बाद गोल्डन आवर में मरीजों को समय पर मेडिकल मदद मिलने की संभावना बढ़ने की उम्मीद है। दूर-दराज और मुश्किल से पहुंचने वाले इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए इमरजेंसी सेवाओं तक तेजी से पहुंच बहुत जरूरी है।
इस पहल का मकसद इमरजेंसी ट्रांसपोर्ट के दोनों अहम चरणों को बेहतर बनाना है, मरीज तक तेजी से पहुंचना और मरीज को तेजी से अस्पताल पहुंचाना। इसलिए, इस प्रस्तावित विस्तार से न सिर्फ इमरजेंसी रिस्पॉन्स बेहतर होने की उम्मीद है, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी समुदायों और हेल्थकेयर सेंटर्स के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
इस अतिरिक्त फ्लीट को ऐसे इलाकों में बेहतर इमरजेंसी कवरेज देने के लिए तैयार किया गया है, जहां भौगोलिक हालात की वजह से रिस्पॉन्स और ट्रांसपोर्टेशन के समय पर काफी असर पड़ सकता है। एम्बुलेंस की तैनाती से इमरजेंसी एम्बुलेंस नेटवर्क अलग-अलग तरह की मेडिकल इमरजेंसी और इलाके से जुड़ी चुनौतियों का ज्यादा असरदार तरीके से सामना कर पाएगा। इन गाड़ियों को खरीदने की प्रक्रिया अभी चल रही है और इसे गांधीनगर में मेडिकल सर्विसेज के एडिशनल डायरेक्टर संभाल रहे हैं।
--आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
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