जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की वह चेतना, जिसने शास्त्र और राष्ट्र को दी नई रोशनी
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। यह सिर्फ एक संत की जीवनगाथा नहीं, बल्कि उस चेतना की कथा है जो खुद अंधकार में जीकर भी समूचे जगत को प्रकाश का मार्ग दिखाती है। यह कहानी है जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की, जिनकी अंतर्दृष्टि ने शास्त्रों को जीवंत किया, जिनकी वाणी में वेदों की गूंज है और जिनका जीवन त्याग, तपस्या और दिव्य ज्ञान की अखंड साधना का प्रतीक है। शारीरिक दृष्टि से वंचित होकर भी उन्होंने ऐसी दिव्य दृष्टि प्राप्त की, जिसे देखकर सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों से ताल्लुक रखने वाले कहने में हिचके नहीं हैं कि वे एक दिव्य शक्ति हैं।
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