कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, एक दिन पहले हुई थी गिरफ्तारी
पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को शनिवार को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. उन्हें एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत में पेश किया गया था.
पूर्वी मेदिनीपुर जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या के पुराने मामले में पहले से गिरफ्तारी वारंट जारी था. इसी वारंट के आधार पर उन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया और शनिवार को अदालत में पेश किए जाने के बाद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
बता दें, शुक्रवार शाम करीब 5.30 बजे के बाद मिलन प्रधान नंदीग्राम ब्लॉक नंबर-2 के रेयापारा से सटे इलाके में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार में जुटे थे. इसी दौरान, पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया.
ममता बनर्जी ने किया था समर्थन का ऐलान
शुक्रवार को प्रधान की गिरफ्तारी से पहले शुक्रवार को ही ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की. उन्होंने इसे विपक्षी दलों के बीच की एकजुता से जोड़ा. उन्होंने कहा कि हम इंडी गठबंधन के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे फोन पर बात की थी और कहा था कि विपक्षी दल मिलकर साथ में चुनाव लड़ेंगे.
https://x.com/ANI/status/2100904673180033200?s=20
ममता गुट की उम्मीदवार ने वापस लिया नाम
ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम उपचुनाव में संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था और संचिता ने अपना नामांकन वापस ले लिया. नाम वापस लेने से पहले उन्होंने बंगाल के मुख्यमंंत्री शुभेंदु अधिकारी से नबन्ना में मुलाकात की थी. उनके साथ उनके पति सत्यजीत भी मौजूद थे. संचिता के नामांकन वापस लेने के बाद ममता के पास नंदीग्राम से नया उम्मीदवार उतारने का विकल्प नहीं बचा था क्योंकि नामांकन वापसी की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, जिस वजह से ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है.
आज लोकतंत्र के लिए काला दिन- ममता
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हम संवैधानिक पद का अनादर नहीं करते हैं. हमें लगता है कि आज हमारे लोकतांत्रित इतिहास का एक काला दिन है. उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में जो भी हो रहा है, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक, गैर-कानूनी और अलोकतांत्रित है. सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए यह पक्षपाती कार्रवाई की गई है. उन लोगों ने पहले ही कहा था कि ना तो नाम रहने दूंगा और न ही निशान. आखिर ये लोग कौन हैं. आज जो लोग सत्ता में हैं, वे कल सत्ता में नहीं रहेंगे. उनको अपनी सीमा समझनी चाहिए.
#WATCH | Mamata Banerjee says, "...We don't disrespect the Constitutional Chair, but we feel today is a black day in our democratic history. What is happening in our country is very unfortunate, unconstitutional, illegal, undemocratic and a totally biased vendetta to satisfy the… https://t.co/pB3ruoPj79 pic.twitter.com/wuPnWMSdaL
— ANI (@ANI) September 18, 2026
इस वजह से खाली हुई नंदीग्राम सीट
नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. भाजपा ने यहां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है. हसीरानी रथ, सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जिनकी मई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
भारतीय रेलवे ने पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन में 252 करोड़ रुपए की लागत से कवच 4.0 परियोजना को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने शनिवार को रेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश में कवच संस्करण 4.0 के विस्तार को मंजूरी दे दी है। रेलवे ने बताया कि पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन में 607.7 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0 लागू करने की परियोजना को 252 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना स्वदेशी तकनीक-आधारित रेल सुरक्षा प्रणाली के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत लखनऊ डिवीजन के चिन्हित शेष रेल खंडों पर कवच 4.0 की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा ढांचे को और मजबूती मिलेगी।
कवच भारतीय रेल द्वारा विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) प्रणाली है, जिसका उद्देश्य ट्रेन संचालन की सुरक्षा को बढ़ाना और मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है।
यह प्रणाली सिग्नल पास्ड एट डेंजर (एसपीएडी) जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करती है। जरूरत पड़ने पर यह स्वतः ब्रेक लगा सकती है और ट्रेनों की गतिविधियों की निगरानी करते हुए सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है।
रेलवे के अनुसार, यह पहल पूरे रेल नेटवर्क में कवच प्रणाली के विस्तार की चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका मकसद ट्रेन सुरक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना और रेलवे परिचालन की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को बढ़ाना है।
इसी के साथ भारतीय रेल ने मध्य रेलवे के सोलापुर मंडल के सात स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली लगाने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना की लागत 209 करोड़ रुपए होगी।
रेलवे ने कहा कि यह आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली सोलापुर मंडल में सिग्नलिंग ढांचे को मजबूत करेगी और कवच जैसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणालियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करेगी।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक आधुनिक कंप्यूटर-आधारित सिग्नलिंग प्रणाली है, जो पारंपरिक रिले-आधारित इंटरलॉकिंग का स्थान लेती है। इससे प्वाइंट्स और सिग्नलों का संचालन अधिक भरोसेमंद बनता है, खराबी का पता लगाने और उसे ठीक करने में कम समय लगता है तथा रखरखाव भी आसान होता है।
स्वीकृत परियोजना के तहत मोहोल, मुंधेवाड़ी, बाले, सोलापुर, होटगी जंक्शन-होटगी ए केबिन, शाहाबाद और वाडी जंक्शन स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी। ये स्टेशन हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन-7) मार्ग पर स्थित हैं, जहां पहले ही कवच, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) और सेंट्रलाइज्ड ट्रैफिक कंट्रोल (सीटीसी) परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।
बयान में आगे कहा गया है कि यह परियोजना उच्च घनत्व वाले रेल मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने, सिग्नलिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण और परिचालन दक्षता में सुधार लाने के लिए किए जा रहे लगातार प्रयासों का हिस्सा है। इससे रेल संचालन अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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