दुनिया की सेमीकंडक्टर डिजाइन वर्कफोर्स का लगभग 20 फीसदी हिस्सा भारतीयः मेटी सचिव एस. कृष्णन
नई दिल्ली, 19 सितंबर (आईएएनएस)। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) के सचिव एस. कृष्णन ने सेमीकॉन इंडिया 2026 के तीसरे दिन मुख्य फोकस वाले क्षेत्रों पर बात की। इनमें इन्वेस्टमेंट पॉलिसी में सहयोग और 240 घंटे के स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का विकास शामिल है।
स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेटी) के सचिव एस. कृष्णन ने आईएएनएस कहा, यह एक तरीका है। एक कंपनी ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आजमाया और फीडबैक दिया कि दूसरे देशों में इसी तरह की कोशिशों की तुलना में उन्हें भारत में कहीं अधिक सफलता मिली। इसलिए, हम सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर खास जोर देते हुए स्किल डेवलपमेंट के सभी पहलुओं को प्राथमिकता देंगे।
उन्होंने कहा, चिप डिजाइन के क्षेत्र में पहले से ही बहुत सारे कुशल टैलेंट मौजूद हैं। दुनिया की सेमीकंडक्टर डिजाइन वर्कफोर्स का लगभग 20 फीसदी हिस्सा भारत से है। हमने डिजाइन टैलेंट पर काफी जोर दिया है और लगभग 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का प्रोग्राम चल रहा है।
इन्वेस्टमेंट पॉलिसी में सहयोग पर एस. कृष्णन ने कहा, जहां तक सेमीकॉन में आने वाले निवेश और प्रस्तावों की बात है, तो हर एक का बहुत बारीकी से और सावधानी से विश्लेषण किया जाएगा क्योंकि इसमें सरकार की ओर से काफी बड़ी रकम इंसेंटिव के तौर पर दी जानी है। चूंकि इसमें जनता का पैसा शामिल है, इसलिए हम हर प्रस्ताव का ठीक से मूल्यांकन करने के बाद ही इंसेंटिव देने का वादा कर सकते हैं।
मेटी सचिव ने कहा, कई बड़ी घरेलू और मल्टीनेशनल कंपनियां इस सेक्टर में निवेश करने की बहुत इच्छुक हैं। इस दिलचस्पी के पीछे दो मुख्य कारण हैं- भारत के टैलेंट पूल पर उनका भरोसा और पॉलिसी से मिलने वाली स्थिरता तथा मजबूत सपोर्ट। इन्हीं वजहों से बड़ी संख्या में कंपनियां और निवेशक भारत आना चाहते हैं और यहां निवेश करना चाहते हैं। हम उन्हें सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेंगे और उनके साथ मिलकर काम करेंगे।
--आईएएनएस
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Radha Ashtami Vrat Katha: राधा अष्टमी पर जरूर पढ़ें श्रीराधा रानी की ये व्रत कथा, बरसेगी श्रीजी की कृपा
Radha Ashtami Vrat Katha: राधाष्टमी का पावन पर्व आज मनाया जाता है. इस दिन श्री राधा रानी के प्रकटोत्सव मनाया जाता है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर पड़ने वाला यह पर्व ब्रज समेत देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस दिन राधा रानी और कृष्ण जी की पूजा करने का खास महत्व होता है. राधाष्टमी के दिन व्रत कथा का पाठ करना या सुनने से भक्तों को राधा रानी की कृपा मिलती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कथा का पाठ करने से मन में भक्ति भाव बढ़ता है.
राधाष्टमी व्रत कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, राधा रानी मूल रूप से गोलोक धाम में श्रीकृष्ण की प्रिय शक्ति और महालक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती हैं. एक बार गोलोक में श्रीदामा और राधा रानी के बीच किसी बात के लिए विवाद हो गया. इसके बाद श्रीदामा ने राधा जी को पृथ्वी पर जन्म लेने का श्राप दिया और राधा जी ने भी प्रतिउत्तर में श्रीदामा को शंखचूड़ राक्षस बनने का श्राप दे दिया.
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जब भगवान विष्णु ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया, तब महालक्ष्मी ने भी पृथ्वी लोक पर राधा रानी के रूप में प्रकट होने का निर्णय लिया. धरती पर ब्रज के राजा वृषभानु एक बार यज्ञ के लिए भूमि साफ कर रहे थे. तभी उन्हें यमुना नदी के किनारे एक स्वर्ण कमल के फूल पर एक अत्यंत सुंदर दिव्य कन्या प्रकट हुई मिली. राजा वृषभानु उस कन्या को अपने घर ले आए और अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण करने लगे. माता कीर्ति ने जब उस कन्या को देखा, तो वे अत्यंत प्रसन्न हुईं. कथा में यह भी वर्णित है कि जन्म के समय श्री राधा रानी की आंखें बंद थीं. जब भगवान श्रीकृष्ण बाल रूप में उनके पालने के पास पहुंचे और उन्होंने राधा रानी के चरण स्पर्श किए तो श्रीजी ने अपनी आंखें खोलीं और सर्वप्रथम अपने आराध्य श्रीकृष्ण के दर्शन किए थे.
राधा स्वरूप का वर्णन
देवी राधा श्वेत वर्ण वाली हैं और उनके रूप-सौन्दर्य के समक्ष कोटि-कोटि सूर्यों की आभा भी निम्न प्रतीत होती है. श्री जी को द्विभुजा रूप में कमल लिये हुये स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान दर्शाया जाता है. उनका एक हाथ वरदमुद्रा तथा दूसरा अभय मुद्रा में स्थित रहता है.
देवी राधा के मंत्रों का जाप करें
सामान्य मंत्र- श्री राधायै स्वाहा
बीज मन्त्र- ऊं ह्रीं श्रीराधिकायै नमः
श्री राधा गायत्री मन्त्र- ऊं वृषभानुजाय विद्महे कृष्णप्रियाय धीमहि।
तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
भगवान नारायण द्वारा श्रीराधा रानी की स्तुति
नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी।
रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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