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इस लिस्ट में सेगमेंट के कुल 23 मॉडल को शामिल किया है। इसमें टॉप-3 मॉडल की 10-10 हजार से ज्यादा यूनिट बिकीं। वहीं, 11 मॉडल ऐसे भी हैं जिन्हें एक-एक हजार से भी कम ग्राहक मिले। खास बात ये है कि लिस्ट में शामिल पहले 5 मॉडल ने ही 71% से ज्यादा मार्केट शेयर पर कब्जा जमा लिया।
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामला: जूतो के तलवों में छिपाकर बाहर निकाले गए थे प्रश्नपत्र, चार्जशीट में बड़ा खुलासा
Maharashtra TET Paper leak Case: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में ठाणे शहर पुलिस ने एक बेहद चौकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की ओर से स्थानीय अदालत में दाखिल की गई करीब 3,500 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया है कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों को आगरा की एक प्रिंटिंग प्रेस से जूतों के तलवों (इंसोल) के भीतर छिपाकर बाहर निकाला गया था।
इस साजिश को अंजाम देने वाले प्रेस के दो कर्मचारियों को इसके बदले महज 8,000 रुपये दिए गए थे। भिवंडी की एक स्थानीय अदालत में शुक्रवार को सौंपी गई इस चार्जशीट में कथित मास्टरमाइंड बृजेंद्र गुप्ता समेत कुल 18 आरोपियों के नाम शामिल हैं।
पुलिस अब तक इस मामले में 16 संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अशोक साव और प्रकाश मिसल नामक दो मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।
जल्द दाखिल की जाएगी सप्लीमेंट्री चार्जशीट
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी है कि इस मामले में जैसे-जैसे आगे की जांच आगे बढ़ेगी, एक पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी अदालत में पेश की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, इस बड़े रैकेट का खुलासा परीक्षा से ठीक एक दिन पहले हुआ था, जो कि 28 जून को निर्धारित थी। जोन-द्वितीय के पुलिस उपायुक्त (DCP) पवन बंसोड़ को एक गुप्त सूचना मिली थी कि तीन संदिग्ध लोग भिवंडी के एक स्थानीय निवासी को परीक्षा के पेपर बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कोंगांव इलाके में डिकॉय (नकली ग्राहक या कर्मी) तैनात कर एक जाल बिछाया और संदिग्धों को दबोच लिया। उनके पास से प्रश्नपत्रों के चार सेट बरामद किए गए। इसके बाद जब महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) के अधिकारियों से इसकी सत्यता की जांच कराई गई, तो यह पुष्टि हो गई कि जब्त किए गए कागजात बिल्कुल असली प्रश्नपत्र हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, आपरेश्कि विश्वासघात और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ परीक्षा कदाचार और अनुचित साधनों के रोकथाम से जुड़े राज्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है जो मामले की तह तक जाने में जुटी है।
आगरा की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा था लीक का मुख्य स्रोत
चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे पेपर लीक का मुख्य स्रोत आगरा स्थित 'महिम पाट्रन प्राइवेट लिमिटेड' (Mahim Patran Pvt. Ltd.) नामक प्रिंटिंग प्रेस को पाया गया है, जिसे गोपनीय टीईटी परीक्षा सामग्री छापने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पुलिस ने बताया कि 15 जून से 17 जून के बीच, प्रेस के दो मौजूदा कर्मचारियों और एक पूर्व कर्मचारी ने सुरक्षा गार्डों को चकमा देने के लिए मुड़े हुए प्रश्नपत्रों को अपने जूतों के इंसोल में छिपा लिया था। सुरक्षाकर्मी कर्मचारियों के कपड़ों की तलाशी तो लेते थे, लेकिन वे जूतों की तरफ ध्यान नहीं देते थे, जिसका फायदा इन लोगों ने उठाया। परीक्षा की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए राज्य प्रशासन ने दो टीईटी पेपरों के तहत चार अलग-अलग सेट तैयार किए थे ताकि परीक्षा के दिन इनमें से किसी एक को रैंडम तरीके से चुना जा सके। हालांकि, शातिर अपराधियों ने सुरक्षा चक्र को भेदते हुए चारों सेट बाहर निकालने में कामयाबी हासिल कर ली थी।
प्रेस कर्मियों को मिले थे मात्र 8000 रुपये और जमीन का लालच
चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया गया है कि परीक्षा सामग्री चुराने के एवज में प्रेस के उन कर्मचारियों को केवल 8,000-8,000 रुपये दिए गए थे। इसके अलावा उन्हें आगरा में जमीन के प्लॉट देने का भी लालच दिया गया था।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने इस अंतरराज्यीय रैकेट के मास्टरमाइंड के रूप में पूर्व कोचिंग शिक्षक बृजेंद्र गुप्ता की पहचान की है, जो पहले ओडिशा में हुए एक अन्य परीक्षा पेपर लीक मामले में भी संलिप्त पाया जा चुका है। पुलिस ने पैसों के लेन-देन के ट्रेल और तकनीकी लॉक्स के अलावा, बृजेंद्र गुप्ता के बिहार स्थित रिश्तेदार के घर से एक मूल प्रश्नपत्र (ओरिजिनल क्वेश्चन पेपर) की बरामदगी को एक मजबूत भौतिक साक्ष्य के रूप में पेश किया है, जो इस अवैध आपूर्ति श्रृंखला को साबित करता है।
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