टैक्स या सर्विस फीस? जानिए यूपीआई पर लगे नए एमडीआर नियमों का पूरा सच और ग्राहकों पर इसका असर
डिजिटल पेमेंट सेवा UPI पर ₹2000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर व्यापारियों और दुकानदारों में भारी संशय और विरोध का माहौल है. इस विषय की जमीनी हकीकत जानने के लिए न्यूज़ नेशन की टीम ने नोएडा सेक्टर-18 सावित्री मार्केट और भोपाल के पेट्रोल पंपों का दौरा कर व्यापारियों और ग्राहकों से सीधी बात की. नोएडा के कारोबारियों की चिंताएं: सावित्री मार्केट के रेस्टोरेंट और दुकान मालिकों ने शिकायत की कि जीएसटी और महंगाई के बीच अब यूपीआई पर एमडीआर लगने से उनका व्यापार 60 से 70 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है. दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों को यूपीआई की आदत पड़ चुकी है और वे जेब में कैश लेकर नहीं चलते. शुल्क कटने पर व्यापारी और ग्राहक के बीच विवाद बढ़ने की आशंका है. सरकारी पक्ष और भ्रम का निवारण: रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि एमडीआर कोई नया सरकारी टैक्स नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का शुल्क है.यह शुल्क केवल दुकानदारों/व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं. भोपाल पेट्रोल पंप का हाल: भोपाल में पेट्रोल पंप कर्मचारी और उपभोक्ता इस नियम के बावजूद यूपीआई सुविधा का उपयोग कर रहे हैं [03:34]। ग्राहकों का कहना है कि अब कैश रखना मुश्किल है, इसलिए मजबूरी में ऑनलाइन पेमेंट ही चुनना पड़ता है.
एक पंखा चलाने पर आया ₹76 हजार का बिल, सरसीवा बिजली दफ्तर का ग्रामीणों ने किया घेराव
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम पिंडरावन में भारी बिजली बिलों और गंभीर लो-वोल्टेज की समस्या से तंग आकर ग्रामीणों का आक्रोश बिजली कार्यालय पर फूट पड़ा. बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर सरसीवा बिजली विभाग पहुंचे और विभागीय कार्यशैली के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया. ग्रामीणों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अत्यधिक बिजली बिलों में कटौती करने, लो-वोल्टेज की समस्या का स्थाई समाधान निकालने और क्षेत्र से स्मार्ट मीटरों को हटाने की मांग रखी. प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया: लो-वोल्टेज से परेशानी: गांव के कई मोहल्लों (विशेषकर झुमका रोड) में वोल्टेज 110 से 120 वोल्ट ही रहता है, जिससे न तो पंखे काम करते हैं और न ही पानी की बोरिंग मशीनें चल पाती हैं.
भारी-भरकम बिजली बिल: एक सामान्य किसान, जो केवल बुनियादी बिजली और पंखे का उपयोग करता है, उसका मासिक बिजली बिल अचानक बढ़कर ₹75,916 से लेकर ₹80,000 तक पहुंच गया है. जबकि पिछले महीनों में उनका बिल औसतन मात्र ₹180 के आसपास आता था. ग्रामीणों का कहना है कि पूरे साल की खेती की उपज बेचने के बाद भी वे इतना बड़ा बिल चुकाने में असमर्थ हैं,
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation











