जल्दबाजी में गलत नंबर पर कर दिया UPI पेमेंट? सिर पकड़ने से पहले जान लें आगे क्या करना है
UPI आज के समय में काफी पॉपुलर पेमेंट करने का तरीका बन गया है. आसान और फास्ट होने की वजह से कई लोग इसे यूज करते हैं. इसे छोटे-बड़े दोनों तरह के दुकानदार जल्दी पेमेंट ले सकते हैं. लेकिन कभी-कभी यूजर से गलती हो जाती है और पैसा गलत व्यक्ति के अकाउंट में चला जाता है. इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि ऐसी गलती होने पर आप अपना पैसा कैसे वापस पा सकते हैं.
The post जल्दबाजी में गलत नंबर पर कर दिया UPI पेमेंट? सिर पकड़ने से पहले जान लें आगे क्या करना है appeared first on Prabhat Khabar.
कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल वालों को भी Winter में Heart Attack का खतरा, ये 4 गलतियां पड़ सकती हैं भारी
सर्दियों के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा ही बढ़ जाता है। हार्ट अटैक एक ऐसी कंडीशन है, जो दुनियाभर में कई लोगों की मौत का कारण बनती है। खासकर भारत में तेजी से हार्ट अटैक में मामले बढ़ रहे हैं। पहले तो इसका शिकार बुजुर्ग हो रहे थे, लेकिन अब युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, शरीर में बढ़ती कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को हार्ट अटैक का कारण माना जाता है, हालांकि क्या आप जानते हैं कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल सही होने पर भी हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने पर भी हार्ट अटैक का खतरा कैसे बढ़ जाता है और इससे कैसे बचाव करें।
इन कारण से होता है हार्ट अटैक
आमतौर पर देखने को मिलता है कि कम एलडीएल लेवल यानी लो कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा कम देखने को मिलता है, हालांकि, करीब आधे दिल के दौरे उन लोगों में होते हैं, जिनका कोलेस्ट्रॉल स्तर 'सामान्य' होता है। ऐसा इसलिए किसी व्यक्ति में कई अन्य स्थितियां भी हो सकती हैं, जो जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
वहीं, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हैं। इसके अलावा अन्य संभावित कारणों में स्मोकिंग इफेक्ट और वायु प्रदूषण भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, ऐसे जेनेटिक और लाइफस्टाइल से जुड़े फैक्टर भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिन्हें हम पूरी तरह से नहीं समझते हैं।
सर्दियां भी हैं जिम्मेदार
ठंड के मौसम में हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी अक्सर देखी जाती है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों, रिसर्च और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ठंडी हवाएं और कम होता तापमान दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा देता है। साल 2024 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की प्रमुख जर्नल JACC में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि ठंड के संपर्क में आने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 2 से 6 दिनों के भीतर हार्ट अटैक का जोखिम सबसे अधिक होता है।
सर्दियों में क्यों बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा?
- सर्दियों में हमारा शरीर खुद को गर्म रखने की कोशिश करता है। इस प्रोसेस में शरीर में मौजूद ब्लड वेसल्स और नसें सिकुड़ने लगती हैं। इससे दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो सकती है।
- अक्सर होता है कि सर्दियों में आलस और सुस्ती के कारण लोग फिजिकल एक्टिविटी कम कर देते हैं। ऊपर से इस मौसम में लोग गाजर का हलवा, पराठे और पकौडे जैसे फूड्स का सेवन करते हैं और एक्सरसाइज नहीं करते हैं, इस वजह से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, वजन बढ़ता है और नसों में बैड कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है।
- सर्दियों के मौसम में खून के थक्के बनने का खतरा आमतौर पर बढ़ जाता है। ठंड के कारण शरीर में कुछ हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिनसे रक्त गाढ़ा होने लगता है और थक्का बनने की संभावना बढ़ती है। यदि ऐसा थक्का हृदय की किसी रक्त नली में अटक जाए, तो नस में रुकावट पैदा हो सकती है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
- सर्दी के दिनों में अक्सर पसीना भी कम आता है और हम पानी भी कम मात्रा पीने लगते हैं। जिससे शरीर में फ्लूइड या प्लाज्मा की मात्रा बढ़ जाती है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाकर दिल पर एक्स्ट्रा बोझ डालती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi


















