व्रत के दौरान नमक क्यों नहीं खाया जाता? जानें इसका धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक कारण
Vrat mein namak na khane ka karan: हिंदू धर्म में व्रत और उपवास के दौरान सामान्य नमक यानी टेबल सॉल्ट के सेवन से परहेज करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि व्रत के दौरान सात्विक आहार ग्रहण करना आवश्यक होता है, और सामान्य नमक को रासायनिक प्रक्रिया से गुजरा हुआ माना जाता है, इसी वजह से इसे व्रत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। यही कारण है कि व्रत के भोजन में इसकी जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
सेंधा नमक को क्यों माना जाता है शुद्ध?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सेंधा नमक को प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाला नमक माना जाता है, जिसे किसी भी रासायनिक प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाता। मान्यता है कि यह पूरी तरह सात्विक श्रेणी में आता है, इसी वजह से इसे व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि व्रत के दौरान ग्रहण किया जाने वाला हर पदार्थ शुद्ध और प्राकृतिक होना चाहिए, ताकि शरीर और मन दोनों की पवित्रता बनी रहे।
व्रत में सात्विक आहार का महत्व
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रत का मुख्य उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि शरीर और मन को शुद्ध करना माना जाता है। मान्यता है कि सात्विक आहार ग्रहण करने से मन शांत और एकाग्र रहता है, जिससे भक्ति और ध्यान में गहराई आती है। इसी वजह से व्रत के दौरान लहसुन, प्याज और सामान्य नमक जैसी चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन्हें तामसिक या अशुद्ध श्रेणी में रखा जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है इसका कारण
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इस परंपरा को स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि सामान्य नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में पानी की मात्रा को प्रभावित कर सकता है और रक्तचाप पर भी असर डाल सकता है। वहीं सेंधा नमक को अपेक्षाकृत हल्का और पाचन के लिए बेहतर माना जाता है, यही वजह है कि व्रत के दौरान इसका इस्तेमाल अधिक उपयुक्त बताया जाता है।
निर्जला व्रत में और भी सख्त होते हैं नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कुछ विशेष व्रत जैसे निर्जला एकादशी और करवा चौथ में तो जल और भोजन दोनों का त्याग किया जाता है, ऐसे में नमक का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि जिन व्रतों में फलाहार की अनुमति होती है, उनमें सेंधा नमक का सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि शरीर में ऊर्जा और संतुलन बना रहे।
आज भी हर व्रत में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही खान-पान की आदतों में कई बदलाव आए हों, लेकिन व्रत के दौरान सेंधा नमक का इस्तेमाल करने की यह परंपरा आज भी अनेक हिंदू परिवारों में श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। आज भी नवरात्रि, एकादशी और अन्य व्रतों के दौरान घरों में विशेष रूप से सेंधा नमक से ही व्रत का भोजन तैयार किया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। व्रत या आहार से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले, विशेषकर किसी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में, चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
Bhilai Steel Plant कबाड़ चोरी मामले में निजी कंपनी के MD समेत 2 अधिकारी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से लोहे का कबाड़ कथित तौर पर चोरी करने और उसे गैर-कानूनी तरीके से बेचने के मामले में एक निजी स्टील कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विनोद कुमार गर्ग (60) और कंपनी के निदेशक संदीप कुमार सिंह (39) के रूप में हुई है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र से कबाड़ की कथित चोरी और बाद में उसे रसमड़ा इलाके में स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड की औद्योगिक इकाई में खपाने की जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों अधिकारियों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने बताया कि यह मामला 26 मई को पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीही खदान पारा इलाके में एके ट्रेडर्स के परिसर से बड़ी मात्रा में लोहे का कबाड़ बरामद होने से जुड़ा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने पहले 19 लोगों को गिरफ्तार किया था।
आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि बीएसपी से कथित तौर पर चोरी किया गया कबाड़ रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड की इकाई में खपाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि इस्पात संयंत्र के अंदर और बाहर काम करने वाला एक कथित संगठित गिरोह पिछले चार-पांच महीने से संयंत्र से लोहे का कबाड़ चोरी कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि 26 मई को मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने भिलाई के हथखोज इलाके में एके ट्रेडर्स के परिसर पर छापा मारा था, जहां से ट्रकों और भारी वाहनों में लदी लोहे की प्लेटें, बीम कटिंग सहित अन्य कबाड़ बरामद किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए कबाड़, वाहनों और मशीनरी की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें लगभग 90 लाख रुपये का लोहे का कबाड़ शामिल है। उन्होंने बताया कि गिरोह में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। दुर्ग के वैशाली नगर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रिकेश सेन ने भी बीएसपी से लोहा और कबाड़ चोरी का मुद्दा उठाया है और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सेन ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर चोरी में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
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