Bhilai Steel Plant कबाड़ चोरी मामले में निजी कंपनी के MD समेत 2 अधिकारी गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से लोहे का कबाड़ कथित तौर पर चोरी करने और उसे गैर-कानूनी तरीके से बेचने के मामले में एक निजी स्टील कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विनोद कुमार गर्ग (60) और कंपनी के निदेशक संदीप कुमार सिंह (39) के रूप में हुई है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र से कबाड़ की कथित चोरी और बाद में उसे रसमड़ा इलाके में स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड की औद्योगिक इकाई में खपाने की जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर दोनों अधिकारियों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है। उन्होंने बताया कि यह मामला 26 मई को पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीही खदान पारा इलाके में एके ट्रेडर्स के परिसर से बड़ी मात्रा में लोहे का कबाड़ बरामद होने से जुड़ा है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने पहले 19 लोगों को गिरफ्तार किया था।
आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि बीएसपी से कथित तौर पर चोरी किया गया कबाड़ रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड की इकाई में खपाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि इस्पात संयंत्र के अंदर और बाहर काम करने वाला एक कथित संगठित गिरोह पिछले चार-पांच महीने से संयंत्र से लोहे का कबाड़ चोरी कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि 26 मई को मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने भिलाई के हथखोज इलाके में एके ट्रेडर्स के परिसर पर छापा मारा था, जहां से ट्रकों और भारी वाहनों में लदी लोहे की प्लेटें, बीम कटिंग सहित अन्य कबाड़ बरामद किया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए कबाड़, वाहनों और मशीनरी की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें लगभग 90 लाख रुपये का लोहे का कबाड़ शामिल है। उन्होंने बताया कि गिरोह में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। दुर्ग के वैशाली नगर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक रिकेश सेन ने भी बीएसपी से लोहा और कबाड़ चोरी का मुद्दा उठाया है और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सेन ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर चोरी में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट क्यों बंद कर दिए जाते हैं? जानें धार्मिक कारण
Grahan ke dauran puja niyam: हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है, इसी वजह से इस दौरान पूजा-पाठ और भगवान के दर्शन पर रोक लगा दी जाती है। यही कारण है कि ग्रहण शुरू होने से पहले ही देशभर के प्रमुख मंदिरों में कपाट बंद करने की तैयारी कर ली जाती है।
सूतक काल से जुड़ी धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण से कुछ घंटे पहले ही "सूतक काल" शुरू हो जाता है, जिसे अशुद्धता का समय माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य ग्रहण में सूतक काल ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले, जबकि चंद्र ग्रहण में लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इसी वजह से सूतक काल लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना रोक दी जाती है।
कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के दौरान राहु और केतु से जुड़ी घटना को ग्रहण का कारण माना जाता है, इसी वजह से इस समय को नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव वाला समय बताया गया है।
ग्रहण के दौरान क्या करने की मनाही होती है?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान भोजन करने, सोने और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान की मूर्ति को छूना भी वर्जित माना जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह पूरी तरह पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।
ग्रहण के दौरान क्या करना माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप, ध्यान और भगवान का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय किया गया जाप सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी होता है। इसके अलावा ग्रहण के दौरान दान करने का संकल्प लेना और ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करना भी विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद की परंपरा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले स्नान करने की परंपरा है, जिसे शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद पूरे घर और मंदिर परिसर में गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध किया जाता है। मंदिरों में भी ग्रहण खत्म होने के बाद भगवान की मूर्तियों को स्नान कराकर, नए वस्त्र पहनाकर और विधिवत श्रृंगार करने के बाद ही कपाट दोबारा खोले जाते हैं।
आज भी हर ग्रहण पर निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही विज्ञान ने ग्रहण की खगोलीय प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझा दिया हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से मंदिरों के कपाट बंद करने और सूतक काल का पालन करने की यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी हर सूर्य और चंद्र ग्रहण के अवसर पर देशभर के प्रमुख मंदिरों में इस नियम का सख्ती से पालन किया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। स्वास्थ्य या गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी सलाह के लिए कृपया चिकित्सक से ही परामर्श लें।
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