UPI Payment पर MDR Charge का विरोध, Ghaziabad के Traders ने लगाए 'No UPI' के पोस्टर
गाज़ियाबाद में व्यापारियों ने अपनी दुकानों के बाहर UPI पेमेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा के नोटिस लगाने शुरू कर दिए हैं। यह विरोध 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज़्यादा के चुनिंदा UPI ट्रांज़ैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है। प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत चार्ज को लेकर व्यापारियों की चिंता के कारण दुकानों पर ये नोटिस देखे जा रहे हैं। उनका कहना है कि भले ही सरकार ने कहा है कि MDR व्यापारियों से लिया जाएगा, लेकिन इस अतिरिक्त लागत का असर आखिरकार ग्राहकों पर पड़ सकता है।
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व्यापारी ग्राहकों को सलाह दे रहे हैं कि 15 अक्टूबर से खरीदारी करते समय, खासकर 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए, वे कैश साथ रखें। उनका तर्क है कि व्यापारी शायद अतिरिक्त लागत का बोझ खुद नहीं उठाना चाहेंगे और इसके बजाय बड़ी खरीदारी के लिए ग्राहकों से कैश में भुगतान करने के लिए कह सकते हैं। व्यापारियों के नोटिस असल में ग्राहकों के लिए एक चेतावनी हैं कि प्रस्तावित चार्ज लागू होने के बाद, ज़्यादा कीमत वाली कुछ खरीदारी के लिए UPI स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश में फ्यूल पंप डीलरों के संगठन ने शुक्रवार को कहा कि जब तक प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को वापस नहीं लिया जाता, तब तक वे 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे। कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इस फ़ैसले को डिजिटल ट्रांज़ैक्शन के लिए "गंभीर चिंता" का विषय बताया है। संगठन के भोपाल ज़िला अध्यक्ष और मध्य प्रदेश मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि इससे राज्य के लगभग 4,700 पेट्रोल पंप प्रभावित हो सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि UPI को सालों से 'डिजिटल इंडिया', कैशलेस इकॉनमी और पारदर्शी बिज़नेस के एक अहम स्तंभ के तौर पर बढ़ावा दिया गया है, लेकिन अब व्यापारी प्रस्तावित MDR को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि 2,000 रुपये से ज़्यादा के योग्य UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% MDR का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका मतलब है कि 10,000 रुपये के पेमेंट पर 40 रुपये का खर्च आएगा; वहीं, फ्यूल ट्रांज़ैक्शन के मामले में 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लगाने की बात सामने आई है।
व्रत के दौरान नमक क्यों नहीं खाया जाता? जानें इसका धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक कारण
Vrat mein namak na khane ka karan: हिंदू धर्म में व्रत और उपवास के दौरान सामान्य नमक यानी टेबल सॉल्ट के सेवन से परहेज करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि व्रत के दौरान सात्विक आहार ग्रहण करना आवश्यक होता है, और सामान्य नमक को रासायनिक प्रक्रिया से गुजरा हुआ माना जाता है, इसी वजह से इसे व्रत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। यही कारण है कि व्रत के भोजन में इसकी जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
सेंधा नमक को क्यों माना जाता है शुद्ध?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सेंधा नमक को प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाला नमक माना जाता है, जिसे किसी भी रासायनिक प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाता। मान्यता है कि यह पूरी तरह सात्विक श्रेणी में आता है, इसी वजह से इसे व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि व्रत के दौरान ग्रहण किया जाने वाला हर पदार्थ शुद्ध और प्राकृतिक होना चाहिए, ताकि शरीर और मन दोनों की पवित्रता बनी रहे।
व्रत में सात्विक आहार का महत्व
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रत का मुख्य उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि शरीर और मन को शुद्ध करना माना जाता है। मान्यता है कि सात्विक आहार ग्रहण करने से मन शांत और एकाग्र रहता है, जिससे भक्ति और ध्यान में गहराई आती है। इसी वजह से व्रत के दौरान लहसुन, प्याज और सामान्य नमक जैसी चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन्हें तामसिक या अशुद्ध श्रेणी में रखा जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है इसका कारण
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इस परंपरा को स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि सामान्य नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में पानी की मात्रा को प्रभावित कर सकता है और रक्तचाप पर भी असर डाल सकता है। वहीं सेंधा नमक को अपेक्षाकृत हल्का और पाचन के लिए बेहतर माना जाता है, यही वजह है कि व्रत के दौरान इसका इस्तेमाल अधिक उपयुक्त बताया जाता है।
निर्जला व्रत में और भी सख्त होते हैं नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कुछ विशेष व्रत जैसे निर्जला एकादशी और करवा चौथ में तो जल और भोजन दोनों का त्याग किया जाता है, ऐसे में नमक का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि जिन व्रतों में फलाहार की अनुमति होती है, उनमें सेंधा नमक का सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि शरीर में ऊर्जा और संतुलन बना रहे।
आज भी हर व्रत में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही खान-पान की आदतों में कई बदलाव आए हों, लेकिन व्रत के दौरान सेंधा नमक का इस्तेमाल करने की यह परंपरा आज भी अनेक हिंदू परिवारों में श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है। आज भी नवरात्रि, एकादशी और अन्य व्रतों के दौरान घरों में विशेष रूप से सेंधा नमक से ही व्रत का भोजन तैयार किया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। व्रत या आहार से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले, विशेषकर किसी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में, चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
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