Pinarayi Vijayan पर FIR के ED अनुरोध पर महाधिवक्ता की राय का अध्ययन कर रहा गृह विभाग
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने शनिवार को कहा कि राज्य विधानसभा में मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनरायी विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद एवं विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के प्रवर्तन निदेशानलय के अनुरोध पर सरकार को महाधिवक्ता की कानूनी राय मिल गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने हाल ही में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)रावाडा ए. चंद्रशेखर को एक पत्र भेजकर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए)के तहत की गई जांच और तलाशी के दौरान मिले ‘साक्ष्यों’ के आधार पर कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में विजयन, वीणा, रियास और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने ‘आईटी परामर्श सेवा’ के नाम पर वीण की अब बंद हो चुकी कंपनी, एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस को 2.78 करोड़ रुपये का जालसाजी कर भुगतान किया।
चेन्निथला ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि कानूनी राय शुक्रवार शाम को मिली थी और गृह विभाग अभी इसकी समीक्षा कर रहा है। संवाददाताओं ने सवाल किया कि क्या ईडी के अनुरोध पर महाधिवक्ता ने प्राथमिकी दर्ज करने के पक्ष में राय दी है तो चेन्निथला ने कहा कि उन्होंने वह राय नहीं देखी है क्योंकि महाधिवक्ता की सिफारिश शुक्रवार को उनके कार्यालय से निकलने के बाद मिली थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इसे (महाधिवक्ता की राय) नहीं देखा है।
शुक्रवार को कार्यालय से निकलने के बाद मुझे यह मिला। इसे देखने के बाद, आगे की कार्रवाई के बारे में सोमवार या मंगलवार को फैसला लिया जाएगा, क्योंकि इन दिनों छुट्टियां हैं।’’ मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की नयी दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान इस मामले पर चर्चा करने के सवाल पर चेन्निथला ने कहा कि ऐसी चर्चा की कोई जरूरत नहीं है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)के महासचिव एमए बेबी ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य पार्टी को निशाना बनाना है और विशेष तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री विजयन को निशाना बनाया जा रहा है।
विकसित देशों में भारत से 6 गुना ज्यादा प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन, PM मोदी ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक एलायंस को लेकर दिया बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि कार्बन उत्सर्जन की ज़िम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर गलत तरीके से डाली जाती है। नई दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम है। पीएम मोदी ने विज्ञान भवन में मौजूद प्रतिनिधियों से कहा, "हम सभी जानते हैं कि कार्बन उत्सर्जन की ज़िम्मेदारी अक्सर गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाली जाती रही है। 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के मेरे कई साथी यहाँ मौजूद हैं। फिर भी, ऐतिहासिक सच्चाई यह है कि आज भी भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है।
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उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और उसने समय से पहले ही पेरिस (COP-21) जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया है। उन्होंने गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। पिछले 12 सालों में, भारत ने पर्यावरण से जुड़े हर क्षेत्र और हर सेक्टर में ज़बरदस्त तरक्की की है। हमारा मुख्य ध्यान रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) पर रहा है और इसने पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है। भारत G-20 का एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस में हुए COP-21 समिट में किए गए अपने वादों को तय समय से पहले ही पूरा कर लिया है। हम रिन्यूएबल एनर्जी पर ध्यान दे रहे हैं। G20 में हम एकमात्र ऐसे देश हैं जिसने अपने पेरिस (COP 21) के वादों को तय समय से काफी पहले ही पूरा कर लिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, "यह नए भारत की ताकत है।
कॉन्फ्रेंस किस बारे में है?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से 19 और 20 सितंबर को दो दिन की कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। यह कॉन्फ्रेंस पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है और इसमें न्यायिक, सरकारी और कानूनी क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हो रहे हैं। उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव भी शामिल हुए। इस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण विशेषज्ञ, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, ज़िला अदालतों के जज, अलग-अलग मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (SEACs), राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणों (SEIAAs), राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसमें 17 देशों के जाने-माने जज और न्यायिक प्रतिनिधि भी एक साथ आएंगे।
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