Ganesha Bhog: गणेश मंदिर में मिठाई नहीं, चढ़ाई जाती है बबल टी; जानें बैंकॉक की अनोखी परंपरा
Ganesha Bhog in Bangkok: गणेश उत्सव की शुरुआत इस साल 14 सितंबर 2026 से हुई है और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होगा। गणेश चतुर्थी के दौरान देशभर में भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें मोदक, लड्डू, दूर्वा और अपनी श्रद्धा के अनुसार अलग-अलग तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं। लेकिन भारत से हजारों किलोमीटर दूर थाईलैंड में गणेश जी को लगाया जाने वाला एक भोग काफी अलग है।
गणेश जी को चढ़ाई जाती है बबल टी
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में गणेश जी के एक मंदिर से जुड़ी ऐसी ही स्थानीय परंपरा सामने आई है। यहां भक्त भगवान गणेश को मिठाई या मोदक की जगह बबल टी यानी बोबा मिल्क टी के कप चढ़ाते हैं।
बैंकॉक के यूनियन मॉल के बाहर स्थित गणेश मंदिर में भक्तों को गणेश जी के सामने बबल टी के कप अर्पित करते हुए देखा गया। बैंकॉक में रहने वाली कंटेंट क्रिएटर पिया पिंग ने इस परंपरा से जुड़ा वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। वीडियो में वह भी भगवान गणेश के लिए बबल टी लेकर मंदिर पहुंचती दिखाई दे रही हैं।
मनोकामना पूरी होने पर बढ़ा देते हैं बबल टी के कप
वीडियो में बताई गई स्थानीय मान्यता के अनुसार, भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद भगवान गणेश को पहले से ज्यादा बबल टी अर्पित करने के लिए वापस आते हैं।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी भक्त ने मनोकामना मांगते समय 3 कप बबल टी चढ़ाई है, तो इच्छा पूरी होने के बाद वह 6 या 12 कप चढ़ा सकता है। वीडियो में कुछ मामलों में यह संख्या 200 कप तक पहुंचने की बात भी बताई गई है।
यह मान्यता सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। हालांकि, इसे बैंकॉक की स्थानीय धार्मिक परंपरा और वीडियो में बताई गई मान्यता के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
मंदिर के पास बबल टी ब्रांड की जानकारी भी
इस परंपरा की एक और दिलचस्प बात मंदिर के आसपास देखने को मिलती है। जानकारी के मुताबिक, गणेश मंदिर के पास एक गाइड लगा हुआ है, जिसमें यूनियन मॉल के अंदर मौजूद अलग-अलग बबल टी ब्रांड और उनके फ्लोर की जानकारी दी गई है। यानी भक्त अपनी पसंद की बबल टी खरीदकर उसे भगवान गणेश को अर्पित कर सकते हैं।
भारत में भी हुई इस अनोखे भोग की चर्चा
गणेश जी को बबल टी चढ़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भारतीय दर्शकों के बीच भी इसकी चर्चा होने लगी। भारत में गणेश पूजा के दौरान मोदक, लड्डू और अन्य पारंपरिक प्रसाद चढ़ाने की परंपरा आम है। ऐसे में बबल टी को भोग के रूप में चढ़ाते देखना कई लोगों के लिए बिल्कुल अलग अनुभव रहा।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे थाईलैंड की दिलचस्प स्थानीय परंपरा बताया, जबकि कई लोगों ने गणेश पूजा के इस अलग रूप पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी साझा कीं।
Radha Ashtami Puja Muhurat 2026: आज राधा अष्टमी पर सिर्फ डेढ़ घंटे का शुभ समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त
Radha Ashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के करीब 15 दिन बाद राधा अष्टमी आती है।
इस दिन राधा रानी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में राधा-कृष्ण की संयुक्त आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त इस अवसर पर व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करते हैं।
राधा अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
राधा अष्टमी के दिन पूजा के लिए बताए गए प्रमुख समय इस प्रकार हैं—
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 सितंबर 2026, दोपहर 1:02 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर 2026, दोपहर 3:28 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: 19 सितंबर, सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक
व्रत पारण: 20 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे
यानी आज राधा रानी की पूजा के लिए 11:01 बजे से 1:28 बजे तक करीब 2 घंटे 27 मिनट का समय है। इसलिए आपकी मूल हेडिंग में लिखा “सिर्फ डेढ़ घंटे” का दावा दिए गए समय से मेल नहीं खाता। SEO में इसे ठीक रखना बेहतर रहेगा।
राधा अष्टमी व्रत का पारण कब करें?
राधा अष्टमी व्रत का पारण अगले दिन नवमी तिथि में करने की परंपरा बताई गई है। 20 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे व्रत खोलने का समय बताया गया है।
पारण से पहले स्नान और पूजा करने के बाद जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जा सकता है।
राधा अष्टमी पर ऐसे करें पूजा
राधा अष्टमी के दिन पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। राधा रानी का पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें नए वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। पूजा में रोली, चंदन, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद राधा रानी को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और खीर का भोग लगाया जा सकता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक भोजन का संकल्प ले सकते हैं। दी गई धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत के दौरान अनाज, सामान्य नमक, प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है।
राधा रानी के मंत्र का करें जाप
राधा अष्टमी पर राधा रानी के मंत्रों का जाप करने की भी परंपरा है। पूजा के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं “ॐ ह्रीं श्रीराधायै स्वाहा” या “ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै नमः”
धार्मिक मान्यताओं में मंत्र जाप को भक्ति और साधना का माध्यम माना गया है। मंत्रों के प्रभाव से जुड़ी मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
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