नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। महिलाओं में बार-बार होने वाला यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) कोई आम समस्या नहीं है। चिकित्सा जगत में इसे एक साइलेंट एपिडेमिक भी कहा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, हर दो में से एक महिला अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इस संक्रमण का शिकार होती है और लगभग 25 प्रतिशत महिलाओं को बार-बार संक्रमण भी होता है।
इसकी वजह सिर्फ बैक्टीरिया नहीं हैं, बल्कि महिलाओं के शरीर की बनावट और जीवनशैली भी बड़ी भूमिका निभाती है। महिलाओं में मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, इसलिए बैक्टीरिया को पेशाब की थैली (ब्लैडर) तक पहुंचने में ज्यादा दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
इसके अलावा, मूत्रमार्ग का गुदा के पास होना भी संक्रमण को आसान बना देता है। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से योनि के सुरक्षात्मक बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। साथ ही, पानी कम पीना, पेशाब देर तक रोकना, सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल और माहवारी के दौरान स्वच्छता का ध्यान न रखना भी इस समस्या को आम बनाते हैं।
आयुर्वेद में यूटीआई को केवल बैक्टीरिया का हमला नहीं माना जाता, बल्कि इसे मूत्रकृच्छ्र या मूत्राघात कहा गया है और इसे शरीर के पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा गया है। अत्यधिक गर्म, तीखे, नमकीन या खट्टे भोजन और अपच या अजीर्ण की स्थिति पित्त को बढ़ा देती है, जिससे मूत्राशय में जलन, बार-बार पेशाब, पेट या कमर में दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेद में इसका स्थायी और सुरक्षित समाधान बताया गया है। चंद्रप्रभा वटी मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूत करती है और जलन को कम करती है। गोक्षुरादि गुग्गुल पेशाब की मात्रा बढ़ाकर बैक्टीरिया को बाहर निकालता है। नीरी तुरंत राहत देती है और संक्रमण को किडनी तक पहुंचने से रोकती है।
इसके अलावा, चन्दनासय शरीर की गर्मी शांत करता है और पेशाब में जलन को जड़ से खत्म करता है। जड़ी-बूटियां जैसे पुनर्नवा, वरुण और गिलोय भी शरीर की सुरक्षा बढ़ाती हैं।
साथ ही, आयुर्वेद में तुरंत राहत के लिए सुबह धनिया और मिश्री का पानी पीने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त पानी पीना, स्वच्छता का ध्यान रखना और तीखे या भारी भोजन से परहेज करना भी यूटीआई से बचाव में मदद करता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
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BJP National President Election: भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इसका फैसला जल्द होने वाला है. जी हां बीजेपी ने पार्टी के सबसे बड़े पद के चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. इसके मुताबिक अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए 19 और 20 जनवरी 2026 को इलेक्शन होंगे.
19 को नामांकन 20 को मतदान और परिणाम
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 19 और 20 जनवरी को कराया जाएगा. 19 जनवरी को नामांकन की प्रक्रिया पूरी होगी, जबकि 20 जनवरी को मतदान के बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा. यह चुनाव पार्टी के संगठनात्मक भविष्य और आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
वरिष्ठ नेता निभाएंगे प्रस्तावक की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, इस अहम चुनाव में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी रहेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पार्टी और संगठन के लगभग 10 वरिष्ठ नेता प्रस्तावक के रूप में नामांकन प्रक्रिया में शामिल होंगे. इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि नेतृत्व परिवर्तन पूरी तरह संगठित और सहमति के साथ किया जा रहा है.
नितिन नवीन सबसे मजबूत दावेदार
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की रेस में नितिन नवीन का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है. यदि उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो वे बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. बताया जा रहा है कि उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक रहेगा, हालांकि 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए इसमें विस्तार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा.
कार्यकारी अध्यक्ष से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक
बता दें कि 15 दिसंबर 2025 को नितिन नवीन को बीजेपी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. खरमास के कारण उन्होंने कुछ समय बाद औपचारिक रूप से पदभार संभाला. इसके बाद से ही उन्हें पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई थी.
राजनीतिक सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि
45 वर्षीय नितिन नवीन वर्तमान में बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री हैं. वे बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं- 2006, 2010, 2015, 2020 और 2025 में. उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं, जिससे संगठन में उनकी पकड़ और अनुभव को मजबूती मिलती है.
संगठनात्मक चुनाव लगभग पूरे
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव देशभर में लगभग पूरे हो चुके हैं. 37 में से 29 राज्यों में प्रदेश स्तर पर आंतरिक चुनावों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इन राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन दाखिल कर सकते हैं.
कैसे होता है राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव?
बीजेपी के संविधान के अनुसार...
- राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सदस्यों से बने इलेक्टोरल कॉलेज की ओर से किया जाता है.
- उम्मीदवार का कम से कम 15 साल का प्राथमिक सदस्य होना जरूरी है.
- कम से कम 20 सदस्यों का प्रस्तावक समर्थन अनिवार्य है.
- पहले नामांकन, फिर मतदान और उसके बाद दिल्ली में मतगणना कर नए अध्यक्ष की घोषणा की जाती है.
आधिकारिक ऐलान का इंतजार
हाल ही में बीजेपी मुख्यालय में हुई बैठक में चुनाव समिति के संयोजक के. लक्ष्मण, सह-संयोजक संबित पात्रा और नरेश बंसल ने पूरी प्रक्रिया और समयसीमा पर चर्चा की. माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर देगी.
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