महिलाओं में बार-बार यूटीआई की समस्या? आयुर्वेद के उपाय देंगे तुरंत राहत
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। महिलाओं में बार-बार होने वाला यूटीआई (मूत्र पथ संक्रमण) कोई आम समस्या नहीं है। चिकित्सा जगत में इसे एक 'साइलेंट एपिडेमिक' भी कहा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, हर दो में से एक महिला अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इस संक्रमण का शिकार होती है और लगभग 25 प्रतिशत महिलाओं को बार-बार संक्रमण भी होता है।
असम के मशहूर गायक समर हजारीका का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, भारत रत्न भूपेन हजारीका के सबसे छोटे भाई थे
असम के संगीतकार और गायक समर हजारीका का मंगलवार को गुवाहाटी में निधन हो गया। उनकी उम्र 75 साल थी। वह कुछ समय से बीमार थे और हाल ही में अस्पताल से घर लौटे थे। पीटीआई के अनुसार, हजारीका का निधन गुवाहाटी के निजारापार इलाके में उनके घर पर हुआ। इसी इलाके में हजारीका परिवार के सभी सदस्य पहाड़ी पर बने अलग-अलग घरों में रहते हैं। परिवार ने उनकी मौत की पुष्टि की है। समर भारत रत्न से सम्मानित सिंगर भूपेन हजारीका के सबसे छोटे भाई थे। वो दस भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उन्होंने रेडियो, एल्बम और फिल्मों के लिए कई गाने गाए और संगीत भी तैयार किया। 1960 के दशक में करियर शुरू किया हजारीका ने 1960 के दशक में अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत की। उनका पहला एल्बम उत्तर कोंवर प्रोतिमा बरुआ देवी 1968 में रिलीज हुआ था। एल्बम के अलावा उन्होंने असमिया फिल्मों में प्लेबैक सिंगर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने उपोपथ, बोवारी और प्रवती पोखिर गान जैसी फिल्मों के लिए गाने गाए। वह भूपेन हजारीका की विरासत को सम्मान देने वाले कार्यक्रमों में भी शामिल हुए थे। इन मौकों पर उन्होंने मोई बिसारिसु हेजार सोकुट जैसे प्रसिद्ध असमिया गीत भी गाए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दुख जताया असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके निधन पर दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समर हजारीका की आवाज हर मौके को खास बना देती थी। उन्होंने असम की संस्कृति में बड़ा योगदान दिया। उन्होंने भूपेन हजारीका की विरासत को आगे बढ़ाया और उनके जन्म शताब्दी समारोह में भी अहम योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जाने से असम ने एक और बेहतरीन आवाज खो दी है। उन्होंने परिवार और चाहने वालों के प्रति संवेदना जताई। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी समर हजारीका के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि उरुका, यानी माघ बिहू के दिन उनका जाना बेहद दुखद है। उन्होंने अपनी आवाज से लोगों के दिलों को छू लिया था। उन्होंने कहा कि असमिया संगीत में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
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