‘शराबबंदी से क्या हासिल हुआ?’ सुप्रीम कोर्ट ने गिनाईं '5 बुराइयां', 600 से ज्यादा मौतों का जिक्र
शराबबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए इसके 5 संभावित नुकसान गिनाए। कोर्ट ने राजस्व नुकसान, लागू करने का खर्च, पुलिस भ्रष्टाचार, अवैध शराब और नशीली दवाओं की समस्या का जिक्र किया।
Radha Ashtami 2026: आज है राधाष्टमी पर्व, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
Radha Ashtami 2026: सनातन धर्म में राधाष्टमी पर्व श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जाने वाला पर्व है. आज यानी 19 सितंबर 2026 को राधाष्टमी मनाई जा रही है. हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी व्रत पर्व मनाया जाता है. इस अष्टमी तिथि पर राधाजी का जन्मोत्सव पर्व मनाने की परंपरा हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा जी का जन्म बरसाना में हुआ था. वहीं, कुछ धर्म शास्त्र उनका जन्म राधाजी की ननिहाल रावल मथुरा में बताते हैं. राधाजी के जन्म स्थान बरसाना में राधाष्टमी का भव्य उत्सव मनाया जाता है. कहते हैं कि राधाष्टमी का व्रत किए बिना जन्माष्टमी व्रत का पूरा फल कभी प्राप्त नहीं होता है. इसलिए, राधाष्टमी के दिन व्रत रखकर राधारानी का प्रकट उत्सव मनाते हैं. इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है.
आइए जानते हैं किस मुहूर्त में राधा रानी की पूजा करें. पूजा की विधि और राधाष्टमी व्रत का क्या महत्व है.
राधाष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त
राधाजी का जन्मोत्सव पर्व दोपहर के समय मनाया जाता है. दरअसल, उनका जन्म मधयाह्न काल में हुआ था. आज पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. इसके साथ चौघड़िया मुहूर्त में भी श्रीजी की पूजा कर सकते हैं. 19 सितंबर को शुभ चौघड़िया सुबह 07 बजकर 39 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. लाभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 46 मिनट से दोपहर 03 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. इन मुहूर्त में राधाजी का जन्मोत्सव पर्व मनाने से व्रत करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा.
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राधाष्टमी पूजन विधि
राधाष्टमी के दिन आपको सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा करें. घर की उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. अब चौकी पर श्रीराधा जी और भगवान कृष्ण दोनों की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान कृष्ण और राधाजी का पंचामृत से अभिषेक करें. अभिषेक के बाद उन्हें नई पोशाक पहनाएं. भगवान कृष्ण और राधा रानी को चंदन और रोली का टीका लगाएं. सुगंधित फूलों की माला पहनाएं. इसके बाद फल और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं. राधा जी को दही अरबी का भोग अवश्य लगाएं. भगवान कृष्ण को माखन मिश्री का भोग लगाएं. श्रद्धा-भक्ति के साथ उनकी आरती करें. इसके बाद आसन पर बैठकर राधाजी के मंत्रों का जाप करें. राधा चालीसा, राधाजी के जन्म की कथा का पाठ कर सकते हैं. इसके बाद क्षमा मांगते हुए पूजा का समापन करें.
जन्माष्टमी से राधाष्टमी व्रत का क्या संबंध है?
धर्म शास्त्रों में जितना महत्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बताया जाता है, उतना ही महत्व राधाष्टमी व्रत का भी बताया गया है. भगवान कृष्ण की शक्ति श्रीराधाजी को माना जाता है. राधाजी प्रेम और करुणा की मूर्ति हैं. इनकी कृपा स्वयं भगवान कृष्ण पाना चाहते हैं. यही कारण है राधाष्टमी का व्रत किए बिना जन्माष्टमी व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है. श्रीराधाजी की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसा,र जो राधाष्टमी के दिन व्रत पूर्वक श्रीराधा का जन्मोत्सव मनाता हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
राधा-रानी के इन मंत्रों का जाप करें
बीज मंत्र- ऊं ह्रीं श्रीं राधिकाये नम:
महामंत्र- ऊं श्री राधिकाये नम:
राधा गायत्री मंत्र- ऊं वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्
नाम जप- आज आप राधे-राधे का जाप 108 बार कर सकते हैं.
युगल मंत्र- ऊं राधा-कृष्णाय नम:
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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