BMC Election को लेकर आज थम जाएगा प्रचार, 227 सीटों के लिए 15 जनवरी को होगी वोटिंग
महाराष्ट्र में बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) सहित 29 महानगरपालिकाओं के लिए वोटिंग 15 जनवरी को होनी है. चुनाव प्रचार आज यानि मंगलवार को अंतिम दिन है. बीएमसी में 227 वार्ड हैं. 1,700 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. चुनाव परिणाम का ऐलान 16 जनवरी को होगा. बीएमसी के मौजूदा पार्षदों का कार्यकाल सात मार्च, 2022 को ही खत्म हो गया. दरअसल, चुनाव फरवरी 2022 में हो जाने चाहिए थे, मगर कई अलग-अलग वजहों से ये स्थगित होता गया.
2022 तक शिवसेना का राज रहा
इस बीच, चुनाव प्रचार खत्म होने के एक दिन पहले सोमवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा. उन्होंने मराठी लोगों की दुर्दशा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया. शिंदे ने पूछा की ठाकरे ने बीएमसी में अपनी पार्टी के 25 वर्षों के शासनकाल में क्या किया? आपको बता दें कि दो गुटों (शिंदे और उद्धव गुट) में बंटने से पहले बीएमसी पर 1997 से 2022 तक शिवसेना का राज रहा है. उद्धव और राज ठाकरे 20 वर्षों के अलगाव के बाद पहली बार साथ चुनावी मैदान में उतरे हैं. 2006 में अपने चाचा बाला ठाकरे से अलग होकर राज ठाकरे ने अपनी पार्टी बनाई थी. इस नाम 'महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना' रखा.
कौन कितनी सीटों पर लड़ रहा
भाजपा इस चुनाव में 137 पर लड़ रही है. वहीं शिंदे की शिवसेना 90 सीटों पर चुनावी मैदान में हैं. उद्धव की पार्टी 150 और मनसे 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बीएमसी की 32 सीटों पर भाजपा-शिंदे सेना और ठाकरे की सेना-एमएनएस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. यहां पर हालात इसलिए उत्पन्न हुए क्योंकि कांग्रेस-बहुजन वंचित अघाड़ी (वीबीए) गठबंधन ने इन सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है. कांग्रेस ने मुंबई में 143 उम्मीदवारों का ऐलान किया. वहीं वीबीए 46 सीटों पर खड़ा है. छह सीटों पर वामपंथी दलों और राष्ट्रीय समाज पार्टी समेत अन्य सहयोगी दल है. ऐसे में कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन ने कुल 195 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं.
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अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला: गलत तरीके से निर्वासित किए गए भारतीय को वापस बुलाने का आदेश
वाशिंगटन, 13 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका की एक संघीय अदालत ने अपने तरह का एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे एक भारतीय नागरिक को फिर से अमेरिका वापस लाने की व्यवस्था करें, जिसे अदालत के साफ आदेश के बावजूद भारत भेज दिया गया था। जज ने फैसला सुनाया कि डिपोर्टेशन गैर-कानूनी था और न्यायिक अधिकार का उल्लंघन था।
9 जनवरी को जारी आदेश में टेक्सास के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत ने बताया कि फ्रांसिस्को डी’कोस्टा को 20 दिसंबर 2025 को अमेरिका से निकाला गया, जबकि उसे न हटाने का अदालत का आदेश इससे तीन घंटे पहले ही जारी हो चुका था।
अदालत ने कहा कि उसी सुबह उसने डी’कोस्टा की याचिका पर सुनवाई अपने हाथ में ली थी और सरकार को साफ निर्देश दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना उसे अमेरिका से बाहर न भेजा जाए।
कोर्ट ने कहा कि उस आदेश के बावजूद, डीकोस्टा को तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में बिठा दिया गया, जो उसी दिन दोपहर 2:55 बजे ह्यूस्टन से रवाना हुई। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट द्वारा जमा किए गए एक मेमोरेंडम के अनुसार, अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय, आईसीई अधिकारियों और हिरासत सुविधा को फ्लाइट के रवाना होने से पहले स्टे की सूचना थी।
अदालत ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह गलती से हुआ। अदालत ने कहा कि हटाने का इरादा चाहे जो भी रहा हो, निर्वासन गैरकानूनी था और यही सबसे अहम बात है।
फ्रांसिस्को डी’कोस्टा भारत के मूल निवासी हैं और साल 2009 से अमेरिका में रह रहे थे। अक्टूबर 2025 में एक आव्रजन न्यायाधीश ने उन्हें स्वेच्छा से देश छोड़ने की अनुमति दी थी। बाद में उन्होंने वकील की मदद ली और अपने मामले को फिर से खोलने की अर्जी दी। इसमें उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और ईसाई धर्म अपनाने के कारण उन्हें वहां उत्पीड़न का खतरा है।
उस याचिका को दायर करने से फेडरल नियमों के तहत उनका स्वेच्छा से देश छोड़ना अपने आप एक अंतिम निष्कासन आदेश में बदल गया। कोर्ट ने कहा कि इमिग्रेशन जज ने स्टे के अनुरोध को खारिज कर दिया था, लेकिन डीकोस्टा को हटाए जाने के समय मामले को फिर से खोलने की याचिका पर फैसला नहीं सुनाया था।
अदालत ने कहा कि इस स्थिति में डी’कोस्टा को हटाने से उनके कानूनी अधिकार छिन सकते थे और यह न्याय की प्रक्रिया के खिलाफ था।
सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि डी’कोस्टा को वापस लाने की जरूरत नहीं है और वह भारत से ही आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं। अदालत ने इस दलील को भी ठुकरा दिया और कहा कि उन्हें वापस लाना जरूरी है, ताकि मामले की सुनवाई वैसे ही हो सके, जैसे गलत तरीके से हटाए जाने से पहले होनी चाहिए थी।
अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के एक सर्वसम्मत फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी विदेशी नागरिक को अदालत के आदेश के खिलाफ गैरकानूनी तरीके से हटाया जाता है, तो उसे वापस बुलाना सही और जरूरी उपाय है।
अंत में अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि डी’कोस्टा की जल्द से जल्द अमेरिका वापसी की व्यवस्था की जाए। साथ ही पांच दिनों के भीतर यह बताने को कहा कि इसके लिए क्या-क्या कदम उठाए जाएंगे।
--आईएएनएस
एएस/
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