ISIS ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन केस में NIA की बड़ी कार्रवाई, 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन और आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. NIA ने यह चार्जशीट विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश की विशेष NIA अदालत में दाखिल की है. मामला प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियों, युवाओं के कट्टरपंथीकरण और हिंसक आतंकी गतिविधियों की तैयारी से संबंधित है.
NIA केस नंबर RC-01/2026/NIA/VSKP में आरोपी मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश, मिर्जा सोहेल बेग, लकी अहमद, जीशान अब्दुल मजीद, मीर आसिफ अली, अब्दुल सलाम, शाहरुख खान और शेख फैज उर रहमान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है.
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) सहपठित धारा 3(5) और धारा 152, तथा UAPA की धारा 13(1), 38 और 39 के तहत आरोप लगाए गए हैं.
23 मार्च को दर्ज हुई थी FIR
यह मामला शुरुआत में 23 मार्च 2026 को विजयवाड़ा II टाउन पुलिस स्टेशन, NTR कमिश्नरेट में FIR नंबर 98/2026 के रूप में दर्ज किया गया था. प्रारंभिक FIR में BNS की धारा 113(3), 152, 196(1)(a) और धारा 61(2), IT Act की धारा 66F तथा UAPA की धारा 13, 18, 18A, 18B, 38 और 39 लगाई गई थीं.
बाद में मामले की जांच NIA ने अपने हाथ में ली. एजेंसी के मुताबिक अब तक इस मामले में 11 आरोपियों और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार किया जा चुका है.
सोशल मीडिया के जरिए ISIS नेटवर्क से जुड़ने का आरोप
NIA की जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के सदस्य या समर्थक थे और संगठन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी साजिश का हिस्सा बने. जांच के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खास तौर पर Instagram, का इस्तेमाल आपसी संपर्क और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार के लिए किया गया.
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों का कथित उद्देश्य भारत में हिंसक जिहाद के जरिए खिलाफत स्थापित करना और इस प्रक्रिया में देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय8 अखंडता को नुकसान पहुंचाना था.
युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप
NIA के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे युवाओं को प्रभावित और कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की, जिन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल किया जा सके. जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क से जुड़े लोगों ने हिंसक आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी के तहत विस्फोटक तैयार करने और हथियारों की ट्रेनिंग की योजना बनाई थी.
एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि साजिश के तहत आरोपियों ने आपस में गुप्त तरीके से संपर्क बनाए रखने के लिए एक सुरक्षित कम्युनिकेशन एप्लिकेशन विकसित किया और उसका परीक्षण भी किया. जांच के अनुसार, इसका उद्देश्य आपसी बातचीत को गुप्त रखना और कथित आतंकी गतिविधियों की तैयारी के दौरान सुरक्षित संचार करना था.
बाकी आरोपियों और संदिग्धों की जांच जारी
NIA ने कहा है कि मामले में अन्य आरोपियों और संदिग्धों के खिलाफ जांच अभी जारी है. एजेंसी इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, उनकी गतिविधियों और साजिश के संभावित विस्तार की भी जांच कर रही है.
सुनीता विलियम्स : नासा के जरिए अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला
नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सबसे अनुभवी और चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में से एक सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरी।
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के हैं, जो गुजरात से हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी हैं।
सुनीता का पूरा नाम सुनीता लिन विलियम्स है। उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से फिजिकल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली।
नासा में आने से पहले वह अमेरिकी नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट थीं और उन्होंने 30 से ज्यादा विभिन्न एयरक्राफ्ट में 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी है। सुनीता को 1998 में नासा ने अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना था। इससे पहले भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला थीं, जिन्होंने 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में उड़ान भरी थीं।
कल्पना चावला के बाद सुनीता विलियम्स ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। सुनीता ने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को डिस्कवरी स्पेस शटल से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर एक्सपीडिशन 14 और 15 मिशन का हिस्सा रहीं। इस मिशन में उन्होंने 195 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो उस समय किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था।
उन्होंने इस दौरान 4 बार स्पेसवॉक किया, जिसमें कुल 29 घंटे 17 मिनट तक वह अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर रहीं। दूसरी बार सुनीता 14 जुलाई 2012 को रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान से आईएसएस के लिए रवाना हुईं और एक्सपीडिशन 32/33 मिशन की कमांडर बनीं। इस मिशन में वह 127 दिन अंतरिक्ष में रहीं।
सुनीता विलियम्स का तीसरा मिशन उनके करियर का सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण रहा। दरअसल, 5 जून 2024 को वह बोइंग के स्टारलाइनर क्रू फ्लाइट टेस्ट के तहत बैरी विल्मोर के साथ आईएसएस पर गईं। वैसे तो यह मिशन केवल 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से उन्हें नौ महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में ही रुकना पड़ा।
आखिरकार 18 मार्च 2025 को सुनीता विलियम्स स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं। सुनीता के लिए सकुशल पृथ्वी पर वापस लौटना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद उनकी सुरक्षित वापसी हुई।
अब तक सुनीता विलियम्स कुल 3 अंतरिक्ष मिशनों में 608 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं और 9 स्पेसवॉक किए, जिसका कुल समय 62 घंटे 6 मिनट है। उन्हें भारत सरकार ने भी सम्मानित किया है। सुनीता ने अंतरिक्ष में भगवदगीता और गणेशजी की मूर्ति ले जाने और अंतरिक्ष में समोसे का जिक्र कर भारत से अपना गहरा जुड़ाव दिखाया है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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