सुनीता विलियम्स : नासा के जरिए अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला
नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सबसे अनुभवी और चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में से एक सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरी।
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के हैं, जो गुजरात से हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी हैं।
सुनीता का पूरा नाम सुनीता लिन विलियम्स है। उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से फिजिकल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली।
नासा में आने से पहले वह अमेरिकी नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट थीं और उन्होंने 30 से ज्यादा विभिन्न एयरक्राफ्ट में 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी है। सुनीता को 1998 में नासा ने अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना था। इससे पहले भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला थीं, जिन्होंने 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में उड़ान भरी थीं।
कल्पना चावला के बाद सुनीता विलियम्स ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। सुनीता ने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को डिस्कवरी स्पेस शटल से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर एक्सपीडिशन 14 और 15 मिशन का हिस्सा रहीं। इस मिशन में उन्होंने 195 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो उस समय किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था।
उन्होंने इस दौरान 4 बार स्पेसवॉक किया, जिसमें कुल 29 घंटे 17 मिनट तक वह अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर रहीं। दूसरी बार सुनीता 14 जुलाई 2012 को रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान से आईएसएस के लिए रवाना हुईं और एक्सपीडिशन 32/33 मिशन की कमांडर बनीं। इस मिशन में वह 127 दिन अंतरिक्ष में रहीं।
सुनीता विलियम्स का तीसरा मिशन उनके करियर का सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण रहा। दरअसल, 5 जून 2024 को वह बोइंग के स्टारलाइनर क्रू फ्लाइट टेस्ट के तहत बैरी विल्मोर के साथ आईएसएस पर गईं। वैसे तो यह मिशन केवल 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से उन्हें नौ महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में ही रुकना पड़ा।
आखिरकार 18 मार्च 2025 को सुनीता विलियम्स स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं। सुनीता के लिए सकुशल पृथ्वी पर वापस लौटना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद उनकी सुरक्षित वापसी हुई।
अब तक सुनीता विलियम्स कुल 3 अंतरिक्ष मिशनों में 608 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं और 9 स्पेसवॉक किए, जिसका कुल समय 62 घंटे 6 मिनट है। उन्हें भारत सरकार ने भी सम्मानित किया है। सुनीता ने अंतरिक्ष में भगवदगीता और गणेशजी की मूर्ति ले जाने और अंतरिक्ष में समोसे का जिक्र कर भारत से अपना गहरा जुड़ाव दिखाया है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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ओडिशा में बनेगी 'सिलिकॉन वैली', सरकार को मिले 23,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य सरकार कटक जिले के नारज में पूर्वी भारत की सिलिकॉन वैली विकसित करेगी. मुख्यमंत्री माझी ने नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 सेमिनार में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने कटक के पास नारज में 870 एकड़ भूमि पर ओडिशा सिलिकॉन वैली के विकास की घोषणा की. ओडिशा सिलिकॉन वैली में प्रमुख सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नारज में स्थित ओडिशा सिलिकॉन वैली क्षेत्र कनेक्टिविटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे के लिए एक अत्यंत अनुकूल रणनीतिक स्थान प्रदान करता है. राज्य सरकार ने कहा कि कटक-भुवनेश्वर शहरी गलियारे से निर्बाध संपर्क के साथ, यह स्थल पारादीप और धामरा जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक कुशल बहुआयामी पहुंच प्रदान करता है, साथ ही प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से भी जुड़ा हुआ है. इन लाभों के कारण नारज सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध उद्योगों के लिए एक संभावित रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर सकता है.
सरकार ने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधाओं और असेंबली इकाइयों को पर्याप्त मात्रा में पानी और बिजली की विश्वसनीय आपूर्ति की आवश्यकता होती है, और महानदी नदी के निकट स्थित यह स्थल औद्योगिक जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण भौगोलिक लाभ प्रदान करता है. सरकार ने आगे कहा कि अपनी कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे की क्षमता के साथ, नारज विश्व स्तरीय सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम विकसित करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है.
ओडिशा के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को महत्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए राज्य को सम्मेलन के दौरान लगभग 23,600 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 6,100 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है. यह सेमीकॉन 2.0 के तहत एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के निर्माण की दिशा में ओडिशा के कदम का संकेत है.
सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान, मुख्यमंत्री ने वैश्विक और घरेलू सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी कंपनियों, उद्योग निकायों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें कीं, जिनमें जापान, स्वीडन और ताइवान के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बातचीत भी शामिल थी.
इन बैठकों में क्वाडक्वांटम के साथ एसआईसी सबस्ट्रेट वेफर्स के उत्पादन के लिए एक सेमीकंडक्टर संयंत्र स्थापित करने हेतु आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ ओडिशा की भागीदारी और मजबूत हुई.
सम्मेलन में ओडिशा पवेलियन ने आरआईआर पावर, एसआईसीएसईएम, 3डीजीएस, एआरएफ डिजाइन और एनआईटी राउरकेला और पीएमईसी ब्रह्मपुर जैसे शैक्षणिक संस्थानों की परियोजनाओं को प्रदर्शित किया, जो मेड इन इंडिया चिप्स के पहले बैच का डिजाइन तैयार कर रहे हैं.
--आईएएनएस
एमएस/
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