क्यों टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से डरे ट्रंप? कहा-अमेरिका बर्बाद हो जाएगा
Donald Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दूसरे देशों पर भारीभरकम टैरिफ लगा रहे हैं. इस का विरोध खुद उनके देश में हो रहा है. इस बीच टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाने वाला है. अगर फैसला ट्रंप के विपरीत जाता है तो ये ट्रंप के लिए बड़ी हार होगी. इसे लेकर ट्रंप घबराए हुए हैं. सोमवार को ट्रंप ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनके प्रशासन के खिलाफ टैरिफ नीति के खिलाफ फैसला देता है तो अमेरिका को ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होगा. ट्रंप ने कहा कि इससे देश पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा.
अमेरिकियों को डराने में लगे
दरअसल, अमेरिका में टैरिफ का केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप निर्णय से पहले ही अमेरिकियों को डराने में लगे हैं. वह टैरिफ को राष्ट्रहित में बता रहे हैं. वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बर्बाद होने चेतावनी दे रहे हैं. अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में फैसला आता है तो दुनिया के कई देश मुश्किल में पड़ जाएंगे. वहीं अगर ट्रंप केस को हार जाते हैं तो ये उनकी सरकार के लिए बड़ी फजीहत होगी. उन्हें अपनी आर्थिक नीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा.
सैकड़ों अरब डॉलर का टैरिफ वापस लौटाना होगा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया कि अगर सुप्रीम कोर्ट सरकार के खिलाफ फैसला सुनाती है तो अमेरिका को पहले से वसूली सैकड़ों अरब डॉलर का टैरिफ वापस लौटाना होगा. इससे पूरी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो सकती है. वहीं उन देशों और कंपनियों से भी अतिरिक्त भुगतान की डिमांड हो सकती है, जिन्होंने ड्यूटी से बचाव के लिए फैक्ट्री, प्लांट और उपकरणों में निवेश किया है.
पूरी तरह गलतफहमी में है: ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, 'जब इन निवेशों को जोड़ा जाएगा तो ये ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाता है. उन्होंने संभावित नुकसान को गड़बड़ बताया है. उन्होंने चेताया कि इतनी बड़ी रकम वापस करना देश के लिए नामुमकिन है. ट्रंप का कहना है कि किसे, कितना और कितने वक्त के लिए भुगतान करना है, यह तय करने में काफी वक्त लगेगा. इसे तय करने में कई वर्ष लगेंगे. उन्होंने लिखा, अगर ऐसा कोई कहता है कि यह जल्द और आसानी से होता है तो यह गलत या पूरी तरह गलतफहमी में है.’
ट्रंप की दलील
ट्रंप ने दलील दी कि अगर वाइट हाउस हारता है तो प्रशासन के पास टैरिफ लगाने के लिए अन्य कानूनी विकल्प हैं. इसमें आपातकालीन अधिकारों की आवश्यकता नहीं है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि टैरिफ को रद्द करने से अमेरिका की आर्थिक नीतियां कमजोर हो जाएंगी. उन्होंने लिखा,‘जब अमेरिका चमकता है, तो दुनिया भी चमक जाती है. अगर सुप्रीम कोर्ट इस नेशनल सिक्योरिटी बोनान्ज़ा (टैरिफ) पर यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका के खिलाफ निर्णय सुनाता है, तो हम बर्बाद होंगे.’
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Budget: 1 फरवरी को पेश होगा देश का 80वां बजट, जानिए भारत के पहले बजट की पूरी कहानी
Budget: देश का आम बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा. इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी. यह स्वतंत्र भारत का 80वां बजट होगा. हर साल की तरह इस बार भी किसान, नौकरीपेशा, महिलाएं, युवा और व्यापारी वर्ग को बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. लोग जानना चाहते हैं कि टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं और महंगाई पर काबू पाया जाएगा या नहीं. बता दें कि आज बजट का आकार लाखों करोड़ का है, लेकिन क्या आपको पता है कि आजाद भारत में पहला बजट कितने रुपये का था? तो आइए यहां जानते हैं पहले बजट की पूरी कहानी.
क्या होता है बजट?
बजट दरअसल सरकार का सालाना आर्थिक खाका होता है. इसमें आने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय और खर्च का पूरा ब्योरा दिया जाता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, केंद्रीय बजट सरकार का वार्षिक वित्तीय दस्तावेज होता है. बजट दो हिस्सों में होता है- रेवेन्यू बजट (जिसमें रोजमर्रा की आय और खर्च शामिल होते हैं) और कैपिटल बजट (जिसमें बड़े निवेश, कर्ज और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े खर्च आते हैं).
भारत का पहला बजट कब पेश हुआ था?
बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत का पहला बजट आजादी के बाद नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन के दौरान पेश हुआ था. 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश भारत के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पहला बजट पेश किया था. उस समय बजट का मकसद आम लोगों की भलाई नहीं, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत की जरूरतें पूरी करना था. इसी बजट में पहली बार आयकर लगाने की घोषणा की गई थी.
आजाद भारत का पहला बजट
भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली. इसके करीब तीन महीने बाद 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला यूनियन बजट संसद में पेश किया गया. इसे देश के पहले वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था. यह बजट पूरे साल के लिए नहीं, बल्कि साढ़े सात महीने यानी 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के लिए बनाया गया था.
इस पहले बजट की एक खास बात यह थी कि देश के बंटवारे के बावजूद भारत और पाकिस्तान सितंबर 1948 तक एक ही मुद्रा का इस्तेमाल करने पर सहमत थे. बाद में आर.के. शनमुखम चेट्टी के इस्तीफे के बाद जॉन मथाई ने वित्त मंत्री का पद संभाला और 1949-50 का बजट पेश किया, जो पूरी तरह एकीकृत भारत का पहला बजट माना जाता है.
कितने करोड़ का था पहला बजट?
आपको बता दें कि आजाद भारत का पहला बजट आकार में बेहद छोटा था. उस समय सरकार की कुल अनुमानित आय 171.15 करोड़ रुपये थी, जबकि कुल खर्च करीब 197.29 करोड़ रुपये आंका गया था. इस तरह पहला बजट करीब 24.59 करोड़ रुपये के घाटे का था. उस दौर में देश की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती थी, इसलिए बजट का बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च किया गया. रक्षा बजट करीब 92.74 करोड़ रुपये था, जो कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा था. आज जब बजट लाखों करोड़ रुपये का हो चुका है, तब भारत के पहले बजट के ये आंकड़े देश की आर्थिक यात्रा को साफ तौर पर दिखाते हैं.
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