धारा 147A पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, आयकर पुनर्मूल्यांकन पर फिलहाल ब्रेक
आयकर अधिनियम की धारा 147A को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने धारा 147A को असंवैधानिक करार दिया था. यह मामला आयकर विभाग के लिए भी अहम है और उन करदाताओं के लिए भी, जिनके मामलों में दोबारा कर निर्धारण की कार्रवाई शुरू की गई है.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए साफ किया कि फिलहाल संबंधित आकलन और पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. मामले की अगली सुनवाई अब 3 दिसंबर 2026 को होगी. यानी सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को फिलहाल प्रभावी रहने से रोक दिया है, लेकिन साथ ही विवाद से जुड़े आकलन की प्रक्रिया पर भी अंतरिम तौर पर रोक लगा दी है.
आकलन को दोबारा खोला जाता है
पूरा विवाद आयकर विभाग की उस व्यवस्था से जुड़ा है, जिसमें किसी पुराने आयकर आकलन को दोबारा खोला जाता है. सवाल यह उठा था कि ऐसी कार्रवाई स्थानीय क्षेत्र के आयकर अधिकारी यानी क्षेत्रीय आकलन अधिकारी कर सकते हैं या फिर इसे बिना मानवीय हस्तक्षेप वाली केंद्रीय व्यवस्था के जरिए ही किया जाना चाहिए.
फैसलों में भी एकरूपता नहीं रही
दरअसल, फेसलेस आकलन व्यवस्था के तहत कुछ मामलों में नोटिस जारी करने और आगे की कार्रवाई के लिए मामलों का स्वचालित और निर्धारित तरीके से आवंटन किया जाना था. इसी व्यवस्था को लेकर अलग-अलग अदालतों में मामले पहुंचे और कई जगह स्थानीय आयकर अधिकारियों द्वारा शुरू की गई पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही को चुनौती दी गई. अलग-अलग हाईकोर्ट के फैसलों में भी एकरूपता नहीं रही.
प्रभाव 1 अप्रैल 2021 से माना गया
इसी पृष्ठभूमि में संसद ने वित्त अधिनियम, 2026 के जरिए धारा 147A को पिछली तारीख से लागू किया. इसका प्रभाव 1 अप्रैल 2021 से माना गया. इस प्रावधान में यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई कि पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी धाराओं में आकलन अधिकारी से आशय राष्ट्रीय फेसलेस आकलन केंद्र के अधिकारी के अलावा दूसरे आकलन अधिकारी से भी हो सकता है.
मूल कानूनी कमी को दूर करना जरूरी
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सितंबर में इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द कर दिया था. हाईकोर्ट का कहना था कि सिर्फ कानून में पिछली तारीख से बदलाव करके उन न्यायिक फैसलों के प्रभाव को खत्म नहीं किया जा सकता, जिनमें पहले की प्रक्रिया को कानूनी रूप से गलत माना गया था. अदालत के अनुसार मूल कानूनी कमी को दूर करना जरूरी था.
केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. केंद्र की ओर से तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए लिया और अब हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है.
अधिकारियों की भूमिका किस हद तक मान्य
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने धारा 147A की संवैधानिक वैधता पर अंतिम राय नहीं दी है. दिसंबर में होने वाली सुनवाई में अदालत को यह तय करना होगा कि संसद द्वारा पिछली तारीख से किया गया यह बदलाव कानूनी कमियों को दूर करता है या नहीं और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में स्थानीय आयकर अधिकारियों की भूमिका किस हद तक मान्य है. इस मामले का असर देशभर में चल रहे आयकर पुनर्मूल्यांकन मामलों पर पड़ सकता है. हालांकि, अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी.
गानों के क्रेडिट चोरी पर छलका अमाल मलिक का दर्द, बोले- 'अपने ही सॉग्स के लिए लड़नी पड़ी लड़ाई'
Amaal Mallik Opens Up song Credits Stolen: सिंगर और म्यूजिक कंपोजर अमाल मलिक (Amaal Mallik आजकल किसी न किसी वजह से विवादों में जरूर रहते हैं या तो फेनडम वार में उलझते हुए नजर आते हैं या फिर किसी का पुराना कच्चा चिट्ठा खोलते हुए दिखाई देते हैं. जिसको लेकर अक्सर विवाद खड़ा हो जाता है. इतना ही नही कंपोजर अमाल कई बार अपने गानों का क्रेडिट ना मिलने पर भी अपना गुस्सा और दर्द जाहिर कर चुके हैं. वह कितनी बार बता चुके हैं कि जब एक क्रिएटर को उसकी मेहनत का फल नहीं मिलता तो बहुत दुख होता है. हाल ही वह 'मैं तेरा हीरो' गाने में क्रेडिट ना मिलने भी अपना दुख जाहिर करते नजर आए. इन दिनों वह इसी वजह से विवादों में चल रहे हैं. वो लगातार क्रेडिट ना मिलने की वजह से पोस्ट शेयर कर रहे हैं और इसके खिलाफ अपनी आवाज भी उठा रहे हैं. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट शेयर किए हैं.
क्रेडिट को लेकर क्या बोले अमाल मलिक
अमाल मलिक का कहना है कि वह क्रेडिट की बात इसलिए नहीं उठाते हैं कि उन्हें लाइमलाइट की जरूरत है. उनका कहना वह करीब एक दशक से कोशिश कर रहे है कि उन्हें उनके काम का क्रेडिट मिले. अमान ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'यह मामला किसी विवाद के बारे में नहीं है. यह सही क्रेडिट, लेखक के तौर पर पहचान और जवाबदेही के बारे में है, और मैं इन सिद्धांतों को नज़रअंदाज़ नहीं होने देना चाहता. जो लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि मैं बार-बार "विवादों" में क्यों आ जाता हूं, उनसे कहना चाहता हूं. अपनी पहचान बनाने के लिए मुझे विवादों की ज़रूरत नहीं है.
आज कई गानों का नहीं मिला अमाल को क्रेडिट
उन्होंने आगे लिखा, 'सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से पहले, मैंने पिछले एक दशक में पूरी कोशिश की है. मैंने लेबल, प्रोडक्शन हाउस, कलाकारों और इस काम से जुड़े अन्य लोगों से निजी तौर पर संपर्क किया और उनसे सभी स्ट्रीमिंग नेटवर्क पर ज़रूरी क्रेडिट और मेटा-डेटा जोड़ने के लिए कहा. जब वे एक कलाकार के तौर पर मेरी बुनियादी ज़रूरत यानी सही क्रेडिट मिलना को पूरा करने में नाकाम रहे, तब मैंने उनके खिलाफ आवाज़ उठाई और पोस्ट किया. अगर आप आज भी मेरे गानों के क्रेडिट देखें, तो उनमें से कई में मेरा नाम शामिल नहीं है.'
Dear All,
— Amaal Mallik (@AmaalMallik) September 18, 2026
This is not about “controversy.” It is about due credit, authorship and accountability and my refusal to let those principles be ignored.
To those questioning why I keep finding myself in “controversies”
I have no need to do controversies to manufacture my identity.…
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