Bihar के ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए OTS योजना मंजूर, मूलधन चुकाने पर ब्याज होगा माफ
बिहार सरकार ने वर्ष 2024-25 के ईंट-भट्ठा सत्र के बकाया भुगतान के निपटारे के लिए एकमुश्त समाधान (ओटीएस) योजना लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत बकाया मूलधन एकमुश्त जमा करने पर ब्याज की पूरी राशि माफ कर दी जाएगी। खान एवं भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को बताया कि यह योजना 21 सितंबर से 20 दिसंबर, 2026 तक तीन महीने के लिए प्रभावी रहेगी और इससे राज्य के करीब 6,000 ईंट-भट्ठा संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि जिला खनन पदाधिकारियों ने प्रमाणपत्र वाद और प्राथमिकी की कार्रवाई के जरिये अब तक 27.28 करोड़ रुपये की वसूली की है। इसके बावजूद 289.38 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसमें करीब 203 करोड़ रुपये मूलधन और 85 करोड़ रुपये ब्याज है। कुमार ने कहा कि ईंट-भट्ठा संचालक लंबे समय से एकमुश्त भुगतान की सुविधा की मांग कर रहे थे।
उन्होंने संचालकों से निर्धारित अवधि में बकाया राशि जमा करने की अपील करते हुए कहा कि समय सीमा समाप्त होने के बाद उन्हें पिछली व्यवस्था के अनुरूप मूलधन के साथ पूरा ब्याज भी चुकाना होगा। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने बिहार जिला खनिज फाउंडेशन (संशोधन) नियमावली, 2026 को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में पत्थर, बालू या अन्य खनिजों का खनन होता है, वहां खनिज राजस्व का दो प्रतिशत जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) में जमा किया जाता है।
संशोधित नियमों के तहत अब डीएमएफ की 70 प्रतिशत राशि खनिज उत्खनन वाले प्रखंड में ही खर्च की जाएगी, जबकि 30 प्रतिशत राशि जिले के अन्य प्रखंडों में खर्च होगी। पहले यह अनुपात 60:40 था। अब संबंधित जिले के सांसद, विधायक और विधान पार्षद भी जिला खनिज फाउंडेशन के सदस्य होंगे।
मंत्री ने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास एवं जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
Tata Trusts के विरोध से Tata Chemicals और TCS शेयर टूटे, Tata Sons लिस्टिंग पर चर्चा तेज
18 सितंबर के कारोबार में टाटा समूह के कई शेयरों में शुरुआती गिरावट देखने को मिली है। इसके पीछे टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच सामने आया विवाद अहम वजह माना जा रहा है। खबर को उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर नए तरीके से लिखा गया है।
टाटा समूह के शेयरों में शुक्रवार, 18 सितंबर को शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। एक दिन पहले तेज बढ़त के बाद टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयर नीचे आ गए। निवेशकों की नजर अब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के निदेशक मंडल के बीच बढ़ते विवाद पर है।
करीब सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर टाटा केमिकल्स सबसे ज्यादा गिरने वाले प्रमुख शेयरों में रहा। इसमें 7.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ भाव 719.50 रुपये के आसपास पहुंच गया। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 3.43 प्रतिशत की कमजोरी आई और इसका भाव 694.65 रुपये रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर भी 2.53 प्रतिशत गिरकर 2,134.60 रुपये के करीब पहुंच गए।
इसके अलावा टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स में 2.51 प्रतिशत की गिरावट रही और शेयर करीब 306.60 रुपये पर आ गया। टाटा पावर 1.10 प्रतिशत गिरकर 364.95 रुपये, टाटा मोटर्स 0.70 प्रतिशत कमजोर होकर 433.05 रुपये और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 0.49 प्रतिशत नीचे 1,008.70 रुपये के आसपास रहा। टाटा स्टील में भी हल्की गिरावट देखी गई और शेयर 187.13 रुपये के करीब कारोबार करता नजर आया।
यह गिरावट एक दिन पहले की तेजी के उलट है। 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए कार्यकारी चेयरमैन बनाए रखने के फैसले के बाद समूह की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी आई थी। उस दिन टाटा केमिकल्स में 5.86 प्रतिशत, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 5.47 प्रतिशत, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स में 4.58 प्रतिशत, टाटा मोटर्स में 2.88 प्रतिशत और टाटा स्टील में 2.82 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी।
लेकिन इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर आपत्ति जताई। टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को बताया था कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा पद नहीं लेना चाहते हैं। ट्रस्ट्स का कहना है कि उन्होंने इस फैसले को स्वीकार कर लिया था और नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था।
वहीं, टाटा संस के बोर्ड का कहना है कि बोर्ड के अनुरोध के बाद चंद्रशेखरन ने अपने फैसले पर दोबारा विचार करने पर सहमति जताई और फिर बोर्ड ने बहुमत से उनकी एक बार फिर से नियुक्ति को मंजूरी दी। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। ट्रस्ट्स ने कंपनी के नियमों का हवाला देते हुए इस फैसले को कानूनी रूप से अमान्य बताया है।
गौरतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद का असर केवल नेतृत्व के सवाल तक सीमित नहीं है। इससे कंपनी के संचालन और आगे लिए जाने वाले बड़े फैसलों पर भी ध्यान बढ़ गया है।
इस पूरे विवाद के बीच टाटा संस की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग का मुद्दा भी फिर चर्चा में आ गया है। टाटा संस के बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक के लागू नियमों के पालन की दिशा में कदम उठाने और नियामक तथा अन्य संबंधित पक्षों से मार्गदर्शन लेने की बात कही है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि केवल लिस्टिंग को ही एकमात्र रास्ता मानने के बजाय उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
टाटा केमिकल्स और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे शेयरों पर टाटा संस से जुड़े घटनाक्रम का असर ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि इन कंपनियों का टाटा संस से सीधा वित्तीय संबंध है। ऐसे में गुरुवार की तेजी के बाद शुक्रवार की गिरावट में निवेशकों की बदली हुई चिंता दिखाई दे रही है।
अब बाजार की नजर टाटा संस के चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति की वैधता, कंपनी की आगामी वार्षिक आम बैठक और टाटा ट्रस्ट्स तथा टाटा संस के बोर्ड के बीच आगे होने वाली बातचीत पर बनी हुई है। आने वाले फैसले टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों की चाल के साथ-साथ समूह के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए भी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
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