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NIA के 7 मामलों में Jagtar Singh Johal को राहत, High Court ने 8 साल बाद दी जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को UK के नागरिक जगतार सिंह जोहल (उर्फ जग्गी) को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की जांच वाले सात मामलों में ज़मानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह देखा कि वह आठ साल से ज़्यादा समय से हिरासत में है और मुकदमों के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें जोहल की ज़मानत नामंजूर कर दी गई थी। कोर्ट ने उसे कई कड़ी शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया, जिनमें पासपोर्ट जमा करना, बातचीत और सोशल मीडिया गतिविधियों पर रोक, जांच अधिकारी के सामने हर दो हफ़्ते में रिपोर्ट करना और गवाहों से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने पर रोक शामिल है। कोर्ट ने जोहल को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की दो ज़मानत भरने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उसे अपना पासपोर्ट (अगर कोई हो) ट्रायल कोर्ट में जमा करने और अगर उसके पास पासपोर्ट नहीं है, तो इस बारे में हलफ़नामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया। 

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हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि ट्रायल के दौरान जोहल सिर्फ़ एक मोबाइल फ़ोन और/या एक लैंडलाइन नंबर का इस्तेमाल करेंगे और वह नंबर हमेशा चालू रहना चाहिए। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपना घर का पता, कॉन्टैक्ट नंबर और ईमेल पता जांच अधिकारी और ट्रायल कोर्ट को दें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वे जांच अधिकारी और ट्रायल कोर्ट को कम से कम सात दिन पहले लिखित सूचना दिए बिना अपना घर या कॉन्टैक्ट की जानकारी नहीं बदलेंगे। जोहल को ट्रायल में सहयोग करने और सुनवाई की हर तारीख पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया गया है, जब तक कि कोर्ट उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट न दे। उन्हें खास तौर पर ऐसी किसी भी हरकत से रोका गया है जिससे ट्रायल की कार्यवाही में देरी हो सकती है। ज़मानत की शर्तों के तहत, हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जोहल किसी भी सरकारी गवाह, सुरक्षित गवाह, शिकायतकर्ता या मामले की जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं करेंगे, उन्हें प्रभावित नहीं करेंगे, धमकाएंगे नहीं या उनसे बातचीत नहीं करेंगे। कोर्ट ने उन्हें मामलों से जुड़े सबूतों, इलेक्ट्रॉनिक मटीरियल, रिकॉर्ड, डिवाइस या दस्तावेज़ों के साथ छेड़छाड़ करने से भी रोका है।

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बेंच ने आगे निर्देश दिया कि जोहल मामलों के गुण-दोष, सबूतों, गवाहों या लंबित मुकदमों से जुड़ी कोई भी सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेंगे, चाहे वह प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से हो। उन्हें ऐसी किसी भी गतिविधि में भाग न लेने का भी निर्देश दिया गया है जिससे सार्वजनिक व्यवस्था या मुकदमे की निष्पक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सोशल मीडिया से संबंधित एक विशिष्ट शर्त में, अदालत ने जोहल को किसी भी ऐसे व्हाट्सएप समूह या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में शामिल न होने का निर्देश दिया जहां "राष्ट्र-विरोधी सामग्री" अपलोड, प्रसारित या प्रचारित की जाती है। अदालत ने उन्हें सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से ऐसी कोई भी सामग्री अपलोड, साझा, प्रसारित या प्रचारित करने से भी रोक दिया। अदालत ने उन्हें इस आशय का एक वचनपत्र (अंडरटेकिंग) ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने जोहल को हर पखवाड़े (दो सप्ताह में) एक बार संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष रिपोर्ट करने, या ट्रायल कोर्ट द्वारा बाद में निर्देशित अंतराल पर रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया।

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MEA Press Briefing: America, Pakistan, Bangladesh, Saudi Arabia, Maldives, Yemen और Bhutan संबंधी मुद्दों पर भारत सरकार ने दी बड़ी जानकारी

भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लाल सागर क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर भारत बेहद चिंतित है। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा में नागरिकों और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की निंदा की। मक्का जैसे पवित्र शहर को निशाना बनाने की कोशिश पर भी भारत पहले ही कड़ा विरोध जता चुका है। जायसवाल ने कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं तथा बाब अल-मंदब जलमार्ग से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए ऐसी स्थिति पूरी तरह अस्वीकार्य है और वह क्षेत्र में जल्द शांति तथा स्थिरता की बहाली की उम्मीद करता है।

प्रेस ब्रीफिंग में भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री टकराव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से भारत के विरोध पर दिया गया जवाब वही पुराना टालमटोल वाला रवैया है। उन्होंने आरोपों और संकेतों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना का पोत कोलकाता पश्चिमी अरब सागर में नियमित तैनाती पर था, तभी पाकिस्तानी नौसेना के पोत हुनैन ने समुद्र में अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर व्यवहार किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पोतों की टक्कर हुई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी पोत की खतरनाक ढंग से आगे निकलने की कोशिश ने अप्रैल 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के अनुच्छेद 10 का उल्लंघन किया, जिसमें समुद्र में दोनों देशों की नौसैनिक इकाइयों के बीच कम से कम तीन समुद्री मील की दूरी रखने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री टक्कर रोकथाम नियमों का उल्लंघन किया गया। हालांकि भारतीय पोत को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह समुद्र में अपनी तैनाती पर बना हुआ है।

इसके अलावा, बांग्लादेश में पूर्ववर्ती अवामी लीग सरकार के दौरान भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा किए जाने की खबरों पर भारत ने कहा कि इस संबंध में उसे आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। गंगा जल बंटवारे सहित जल संबंधी मुद्दों पर जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच संयुक्त नदी तंत्र मौजूद है और तकनीकी स्तर पर जल संबंधी बैठकें लगातार हो रही हैं।

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साथ ही अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर भी भारत ने अपनी चिंताएं स्पष्ट कीं। रूस और ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी कानून के संभावित प्रभावों को लेकर भारत पहले ही अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख चुका है। भारत ने विशेष रूप से अपनी ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और दोनों देशों के समग्र संबंधों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का उल्लेख किया। व्यापार समझौते पर संभावित असर के सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को प्रतिबद्ध है और इस संबंध में भारतीय व्यापार तथा उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा।

भारत-अमेरिका के बीच मादक पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए मजबूत सहयोग जारी रहने की भी जानकारी दी गई। भारत का कहना है कि यह समस्या दोनों देशों के लोगों के साथ-साथ पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित करती है, इसलिए दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे।

मालदीव के साथ आर्थिक सहयोग पर जायसवाल ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक द्वारा मालदीव सरकार के लिए रखे गए कुल 150 करोड़ डॉलर के राजकोषीय प्रतिभूति निवेश की अंतिम 50 करोड़ डॉलर की किस्त 17 सितंबर को सफलतापूर्वक निपटा दी गई। ये प्रतिभूतियां 2019 से छह बार एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई थीं। मूलधन का भुगतान मालदीव सरकार ने किया, जबकि पिछले पांच वर्षों में इन प्रतिभूतियों पर करीब 45 करोड़ डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने वहन किया।

वहीं भूटान के साथ संबंधों को लेकर जायसवाल ने विदेश मंत्री की 16 से 18 सितंबर तक हुई यात्रा को सफल बताया। यात्रा के दौरान भूटान के राजा और प्रधानमंत्री से मुलाकात के साथ विकास सहयोग, ऊर्जा, जनसंपर्क और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत ने भूटान के विकास लक्ष्यों के प्रति समर्थन दोहराया। दोनों देशों के बीच छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार किया गया और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस संबंधी समझौते के भूटान द्वारा अनुमोदन का स्वागत किया गया।

साथ ही ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास रूसी तेल टैंकर से जुड़े मामले में भारत ने कहा कि टैंकर को ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश के तहत रोका गया है। रूसी चालक दल की स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार आवश्यक कार्रवाई कर रही है और रूसी दूतावास के लगातार संपर्क में है।

वहीं, ब्रिक्स में आंकड़ों के आदान-प्रदान से जुड़े प्रावधानों पर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली डिक्लेरेशन में इस संबंध में कुछ समझ बनी है, लेकिन किसी विशेष देश के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करने के लिए वह और जानकारी जुटाकर बाद में जवाब देंगे। सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को मिली जेल की सजा के मामले में उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास स्थानीय सरकार के लगातार संपर्क में है और नागरिकों की सुरक्षा, देखभाल तथा कल्याण भारत की स्थायी प्राथमिकता है। यमन में संघर्षरत क्षेत्र में भारतीयों के होने संबंधी प्रभासाक्षी के सवाल पर जायसवाल ने कहा कि अभी तक हमें इस प्रकार की कोई सूचना नहीं मिली है कि यमन के संघर्षरत क्षेत्र में कोई भारतीय फँसा हुआ है। बहरहाल, आइये देखते हैं विस्तृत प्रेस वार्ता में जायसवाल ने और क्या बातें कहीं।

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वनडे में सबसे ज्यादा रन देने वाले 5 तेज गेंदबाज, 23 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

Most runs conceded 5 fast bowlers in ODI: वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले टॉप पांच तेज गेंदबाजों की लिस्ट में वसीम अकरम, चमिंडा वास, वकार यूनिस लसिथ मलिंगा और शॉन पोलॉक शामिल हैं. यह आंकड़े किसी असफलता का नहीं, बल्कि इन गेंदबाजों के लंबे और सफल करियर का प्रमाण हैं. सैकड़ों मुकाबले खेलने और टीम के लिए लगातार ओवर फेंकने की वजह से इनके खाते में इतने रन दर्ज हुए, जबकि सभी ने सैकड़ों विकेट चटकाकर अपनी टीमों को ऐतिहासिक जीत दिलाईं. Fri, 18 Sep 2026 19:15:14 +0530

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